आर्मी चीफ को खत और बदल गया इतिहास: कौन हैं लेडी कैडेट 001 प्रिया झिंगन, जिन्होंने महिलाओं के लिए खोले सेना के द्वार?
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/Priya-Jhingan-First-Female-Army-Officer-1768403428032.jpgमेजर प्रिया झिंगन के देश की पहली महिला सैन्य अधिकारी बनने की पूरी कहानी। ग्राफिकस जागरण
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। साल 1992… देश धीरे-धीरे, लेकिन बेहद महत्वपूर्ण बदलावों के दौर से गुजर रहा था। भारतीय बाजार पहली बार निजी और विदेशी कंपनियों के लिए खुल रहा था। मंडल आयोग को लेकर सुप्रीम कोर्ट से हरी झंडी मिल चुकी थी।
एमबीए, इंजीनियरिंग और आईटी जैसे प्रोफेशनल कोर्स युवाओं के ड्रीम करियर बनते जा रहे थे। दफ्तरों में टाइपराइटरों की खटखट धीरे-धीरे खामोश हो रही थी और उनकी जगह कंप्यूटर व कीबोर्ड की हल्की आवाजें सुनाई देने लगी थीं।
इन बदलावों ने देश की आर्थिक और राजनीतिक तस्वीर को पूरी तरह बदल दिया। लेकिन इसी दौर में एक ऐसा परिवर्तन भी हुआ, जिसका सीधा संबंध न राजनीति से था और न ही अर्थव्यवस्था से। फिर भी वह बदलाव ऐतिहासिक और क्रांतिकारी था।
इस परिवर्तन का सूर्योदय दक्षिण भारत के चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (ओटीए) के परेड ग्राउंड पर हुआ। उस दिन जो दृश्य सामने आया, वह किसी सामान्य परेड का हिस्सा नहीं था, बल्कि इस बात का संकेत था कि भारतीय सेना में एक नए युग की शुरुआत हो चुकी है।
उस दिन परेड ग्राउंड पर ऑलिव ग्रीन वर्दी में एक युवती आगे बढ़ी और अपना रैंक हासिल कर इतिहास रच दिया। ऑलिव ग्रीन यूनिफॉर्म में पुरुष अधिकारियों के कंधे से कंधा मिलाकर खड़ी उस शख्सियत का नाम था, मेजर प्रिया झिंगन। उनकी पहचान थी, लेडी कैडेट नंबर 001। ऐसा नहीं था कि इससे पहले भारतीय सशस्त्र बलों में महिलाएं मौजूद नहीं थीं; वे थीं, लेकिन केवल डॉक्टर और नर्स के रूप में।
उस दौर में ऑलिव ग्रीन वर्दी पहनकर कंधों पर सितारे सजा अधिकारी बनने का सपना देखना किसी भी महिला के लिए लगभग अकल्पनीय था। प्रिया झिंगन ने न सिर्फ उस अकल्पनीय सपने को देखा, बल्कि उसे साकार कर दिखाया।
कौन हैं प्रिया झिंगन और कैसे बनीं देश की पहली महिला सैनिक अधिकारी? पढ़िए पूरी कहानी…
प्रिया झिंगन का जन्म हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला में हुआ। शुरुआती पढ़ाई शिमला से पूरी की। 21 वर्षीय प्रिया झिंगन ने साल 1989 में कानून (LAW) की पढ़ाई करने के लिए शिमला के ही सेंट बीड्स कॉलेज में दाखिला लिया था।
उसी साल की एक सुबह की बात है। प्रिया के पिता पुलिस में थे। घर में अखबार आता था। उनकी नजर अखबार में छपे एक विज्ञापन पर पड़ी, जिसमें पुरुषों से सेना में भर्ती होने की अपील की गई थी। प्रिया गौर से विज्ञापन को पढ़ा। फिर कुछ देर मंथन किया और फिर बिना देर किए तत्कालीन थल सेना प्रमुख जनरल सुनीथ फ्रांसिस रोड्रिग्स को एक पत्र लिखा।
प्रिया ने पत्र में पूछा- सेना में शामिल होने के लिए सिर्फ पुरुषों से ही अपील क्यों की जा रही है, महिलाओं से क्यों नहीं? प्रिया ने आगे लिखा- \“मैं सेना में शामिल होना चाहती हूं।\“
प्रिया झिंगन को पत्र लिखते वक्त इस बात का अंदाजा नहीं था कि उनका सवाल न सिर्फ इतिहास की दिशा बदल देगा, बल्कि सेना में महिलाओं की भूमिका को लेकर सोच और व्यवस्था भी बदल देगा।
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सेना प्रमुख का जवाब आया
कुछ समय बाद जनरल रोड्रिग्स का जवाब आया। लिखा- वे सेना में शामिल होने के लिए इतनी उत्साही लड़की का पत्र पाकर बेहद खुश हैं। साथ ही आपको अवगत कराना चाहता हूं कि यह बहुत जल्द संभव होगा।
तीन साल बाद छपा नया विज्ञापन- इंडियन आर्मी आपको बुला रही है
पूरे तीन साल बाद 1992 में प्रिया झिंगन का सपना सच हुआ। प्रिया को अखबार में एक नया विज्ञापन नजर आया, जिसमें पहली बार महिलाओं से सेना में भर्ती की अपील की गई थी।शब्द थे- ‘Indian Army Beckons You’ (भारतीय सेना आपको बुला रही है)।
भारतीय सेना ने लघु सेवा आयोग (SSC) के तहत महिलाओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए।25 हजार से ज्यादा लड़कियों ने आवेदन किए थे, उनमें प्रिया झिंगन भी शामिल थीं। फिर मुश्किल चयन प्रक्रिया से गुजरकर 250 महिलाएं इंटरव्यू राउंड तक पहुंची। आखिर में केवल 25 महिलाओं का सिलेक्शन हुआ था।
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प्रिया झिंगन ने कब आर्मी ज्वाइन की थी?
21 सितंबर, 1992.. सेना के इतिहास में नई तारीख जुड़ी। प्रिया झिंगन समेत 25 महिला कैडेट्स का पहला बैच उस दिन सेना में शामिल हुआ। इसी के साथ एक बंद दरवाजा हमेशा के लिए खुल गया।
जिस सपने के लिए प्रिया ने कभी सेना प्रमुख को पत्र लिखा था, जब वह सच हुआ तो फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) की कड़ी, थकाने वाली और मानसिक-शारीरिक परीक्षा लेने वाली ट्रेनिंग में प्रिया ने हर मोर्चे पर खुद को साबित किया। नतीजा यह रहा कि वह सिर्फ इतिहास का हिस्सा नहीं बनीं, बल्कि उत्कृष्ट प्रदर्शन की मिसाल भी कायम कर गईं।
[*]प्रिया को 6 मार्च 1993 को अकादमी की पासिंग आउट परेड में सिल्वर मेडल से सम्मानित किया गया।
[*]प्रिया ने यंग ऑफिसर्स कोर्स में प्रथम स्थान प्राप्त किया और उन्हें ‘इंस्ट्रक्टर ग्रेडिंग’ से सम्मानित किया गया।
मार्च 1993 में प्रिया झिंगन सेना के जज एडवोकेट जनरल (JAG) विभाग में कमीशन पाने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं। यहां वो सेना के कानूनी मामलों को देखती थीं। इसके बाद 10 साल तक उन्होंने समर्पण, अनुशासन और गर्व के साथ सेवा की और मेजर के पद से सेवानिवृत्त हुईं।
सैन्य करियर में प्रिया झिंगन ने क्या-क्या किया?
प्रिया झिंगन ने10 साल तक सेना में सेवा की। इस दौरान उन्होंने..
[*]कई कोर्ट मार्शल की जटिल कार्यवाहियों का कुशल संचालन किया, बल्कि उच्च न्यायालयों में सैन्य मामलों मेंसेना का सशक्त पक्ष भी रखा।
[*]जवानों और अधिकारियों को कानूनी प्रक्रियाओं का प्रशिक्षण देकर सेना के अनुशासन और न्यायिक समझ को मजबूत आधार दिया।
भारतीय सेना से रिटायर होने के बाद भी मेजर प्रिया झिंगन का रिश्ता वर्दी से नहीं टूटा। उन्होंने युवाओं को सेना में शामिल होने के लिए लगातार प्रेरित किया। इसके साथ ही उन्होंने पत्रकारिता और शिक्षण के क्षेत्र में भी कदम रखा और राष्ट्र सेवा का सपना देखने वाली युवा महिलाओं के लिए एक सशक्त रोल मॉडल बनकर उभरीं।
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प्रिया झिंगन ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था-
\“वर्दी कभी आपका साथ नहीं छोड़ती, यह आपके व्यक्तित्व का हिस्सा बन जाती है।\“
प्रिया झिंगन कई इंटरव्यू में बताया- उनका बचपन से ही सपना था कि वह देश की सेवा करेंगी। जब बड़ी हुई तो पिता की तरह भारतीय पुलिस सेवा (IPS)में जाने का सपना देखने लगी। उस दौर में सेना में शामिल होने ख्याल चांद को पाने की जिद करने जैसा था। फिर काननू की पढ़ाई की। सेना प्रमुख का पत्र और महिलाओं के लिए सेना ने नियम बदले तो लगा जैसे सच में चांद को पाने का सपना पूरा हो गया।
हालांकि, उनको अपने छोटे कार्यकाल को लेकर मलाल रहा।वे अक्सर कहती हैं- \“मैंने सेना को नहीं छोड़ा, सेना ने मुझे छोड़ा।\“ दरअसल, महिला अधिकारियों के पहले बैच को 10 साल से अधिक समय तक सेवा का विकल्प नहीं दिया गया था।
यह भी पढ़ें- \“सेना में महिलाओं को भी भर्ती किया जाए..21 साल की लड़की ने लिखी थी चिट्ठी\“; पढ़ें सेना में नारी शक्ति का सफर
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