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सावधान! आनलाइन गेम की लत से संकट में जिंदगी... 20 साल का बेटा करने लगा अजीबोगरीब हरकत

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संवाद सहयोगी, राठ (हमीरपुर)। ऑनलाइन गेम की लत से जिंदगी पर मंडराते खतरे को उजागर किया गया है। बुधवार सुबह मोबाइल पर गेम खेलते-खेलते अचानक युवक का मानसिक संतुलन बिगड़ गया। वह गाने लगा ये अंधा कानून है... ये अंधा कानून है। वह कभी फिल्मी गाने तो कभी भक्ति गीत, तो कभी शायरी पढ़ने लगा। बेटे की अजीबों गरीब हरकत देख उसकी मां घबरा गईं। जब बेटे को शांत कराने की कोशिश की, तो वह उनके सामने भी गाना गाने लगा। सूचना मिलते ही पिता घर पहुंचे।

उन्होंने बेटे के चेहरे पर पानी डाला, लेकिन हालत में कोई सुधार नहीं हुआ और वह लगातार अजीब हरकत कर रहा था। इसके बाद स्वजन उसे अस्पताल लेकर गए। जहां उसका इलाज चला। कस्बा राठ के सिकंदरपुरा में रमेश अपने परिवार के साथ रहते हैं। घर में पत्नी गुड्डी और 20 वर्षीय बेटा अमृतलाल रहते हैं। एक बेटी गायत्री थी, जिसकी 20 दिन पहले बीमारी से मौत हो गई। पिता-पुत्र ईंट-भट्टे में मजदूरी करते करके परिवार का भरण पोषण करते हैं। जबकि मां गृहिणी हैं।

पिता रमेश ने बताया कि बेटा खाली समय में लगातार फोन चलाता रहता था। अक्सर कुछ न कुछ बड़बड़ाता रहता था। घरवाले मना करते तो वह घर से दूर बाग में जाकर मोबाइल चलाने लगता। स्वजन उसे समझाते कि ज्यादा मोबाइल चलाने से आंखें खराब हो जाएंगी, लेकिन वह नहीं मानता था।

पिता ने बताया कि बुधवार को भी अमृतलाल मोबाइल में गेम खेल रहा था। इसी दौरान वह तेज-तेज बड़बड़ाने लगा और भोजपुरी और भक्ति गीत गाने लगा। स्वजन ने काफी देर तक उसे शांत कराने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माना। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाने पर भी युवक लगातार गाता रहा।

अमृतलाल अस्पताल में एक लाइन गाया कि “ये अंधा कानून है.. ये अंधा कानून है“। इसके बाद शायरी पढ़ी, “ये जिंदगी एक कहानी है, ये जिंदगी एक कहानी है“ ये पहेली ही पहेली है, पहेली ही सहेली है। इसके बाद जय बाला जी महाराज, जय बाला जी महाराज का जयकारा लगाया। जिससे परेशान होकर स्वजन उसे सीएचसी लेकर पहुंचे। जहां पर उसका इलाज चल रहा है। जिसकी हालत में सुधार है।

राठ सीएचसी के डाक्टर कनिष्क माहुर ने बताया युवक को एंजायटी है। नींद पूरी न होने से इस तरह की समस्या होती है। अधिक मोबाइल चलाना भी इसकी वजह हो सकता है। फिलहाल युवक की हालत ठीक है। उसे शाम 5 बजे राठ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से डिस्चार्ज कर दिया गया है। वहीं इस पर मनोवैज्ञानिक चिकित्सक डा. नीता वर्मा ने बताया कि ज्यादा देर तक मोबाइल चलाने के कारण ऐसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। इसलिए ऐसे गेमों से दूर रहना चाहिए और कम से कम मोबाइल चलाना चाहिए।
बहन की मौत से भी परेशान था

पिता ने बताया कि अमृतलाल ने करीब पांच साल पहले मोबाइल खरीदा था। पिछले लगभग एक साल से वह मोबाइल में गेम खेलने का आदी हो गया था। इसके अलावा 20 दिन पहले अमृतलाल की बहन गायत्री की बीमारी के चलते ससुराल कोटरा जालौन में मौत हो गई थी। इस घटना के बाद से वह मानसिक रूप से काफी चिंतित रहने लगा था।
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