भरण-पोषण से बचने के लिए पति ने मां को दान कर दी जमीन, प्रशासन ने दांव उल्टा कर संपत्ति की कुर्क
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/Kurki-(1)-1768408151918.jpgप्रतीकात्मक चित्र
जागरण संवाददाता, बरेली। भरण पोषण के वाद में न्यायालय ने पीड़ित महिला और बच्चों के लिए प्रतिमाह पांच हजार रुपये मासिक भरण पोषण के लिए धनराशि देने का आदेश दिया था। महिला से अलग हुए पति ने भरण पोषण नहीं दिया, जिसके बाद आरसी जारी कर दी गई थी। धनराशि देने से बचने के लिए आरोपित ने अपनी संपत्ति अपनी मां के नाम दान कर दी थी, जिसे प्रशासन ने निरस्त कर दिया। भरण पोषण की धनराशि वसूलने के लिए संपत्ति कुर्क की गई है।
भोजीपुरा थाना क्षेत्र के ग्राम बुझिया शुमाली निवासी शांति देवी का उनके पति हरीश के बीच विवाद चल रहा था। मामला अपर न्यायाधीश परिवार न्यायालय तृतीय ज्ञानेंद्र त्रिपाठी की अदालत में पहुंचा तो सुनवाई के बाद अदालत ने वादिनी को 3,000 रुपये और अव्यस्क बच्चों के बालिग होने तक एक-एक हजार रुपये मिलाकर कुल 5,000 रुपये मासिक भरण पोषण के लिए देने का आदेश दिया।
हरीश ने गुजारा भत्ता देने से बचने के लिए दानपत्र विलेख के माध्यम से अपनी संपत्ति को अपनी मां मुन्नी देवी के नाम हस्तांतरित करा दिया। शांति देवी के दोबारा अदालत का दरवाजा खटखटाने पर न्यायाधीश ने दान पत्र विलेख को निष्प्रभावी घोषित कर संपत्ति कुर्क कर नीलाम कराकर भुगतान कराने का आदेश दिया।
राजस्व विभाग की टीम ने आरोपित के मकान पर नोटिस भी चस्पा कर दिया था। इसके बाद भी भुगतान नहीं करने पर बुधवार को राजस्व विभाग की टीम ने आरोपित के खेत को कुर्क करने की कार्रवाई की। अब इस संपत्ति की बिक्री नहीं की जा सकेगी। शीघ्र भुगतान नहीं करने पर संपत्ति की नीलामी कराकर धनराशि अदालत में जमा कराई जाएगी, जहां से पीड़िता को भुगतान किया जा सकेगा।
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