अरावली ग्रीन वाल प्रोजेक्ट में तेजी, 27 लाख हेक्टेयर भूमि पर शुरू हुआ हरियाली का काम
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/Aravalli-Green-Wall-Project-1768408428730.jpgअरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट में तेजी से काम जारी
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। दुनिया की प्राचीन पर्वतमालाओं में शामिल अरावली रेंज की पहाडि़यों की नई परिभाषा पर उठे विवाद के बीच केंद्र सरकार ने उसके संरक्षण को लेकर फिर से अपनी प्रतिबद्धता जताई है और कहा कि वह इस दिशा में तेजी से काम कर रही है।
केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने बताया कि पिछले दो- तीन सालों में अरावली रेंज की हजारों हेक्टेयर भूमि को हरा-भरा बनाया गया है।
साथ ही अरावली ग्रीन वाल प्रोजेक्ट के तहत अरावली रेंज की दिल्ली, हरियाणा, राजस्थान व गुजरात में फैली 27 लाख हेक्टेयर खराब भूमि पर हरियाली फैलाने का अभियान शुरू किया गया है।
अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट में तेजी से काम जारी
जिसमें सभी राज्य व जिले अपने-अपने स्तर पर काम रहे है। केंद्रीय मंत्री ने यह जानकारी बुधवार को दिल्ली में अरावली लैंडस्केप के इको-रेस्टोरेशन पर आयोजित एक राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित करते हुए कही। इसका फोकस अरावली ग्रीन वॉल प्रोजेक्ट को मजबूती देना था।
इस बीच हरियाणा सरकार, डेनमार्क और एक गैर-सरकारी संगठन की ओर से अरावली रेंज से जुड़े चार गांवों में किए गए संरक्षण को लेकर एक रिपोर्ट भी पेश की गई है। जिसे अरावली रेंज के संरक्षण के माडल प्रोजेक्ट के तौर पर भी पेश किया गया है। सम्मेलन में हरियाणा के वन एवं पर्यावरण मंत्री राव नरवीर सिंह शामिल सहित अरावली रेंज में आने वाले सभी 37 जिलों के अधिकारी व विशेषज्ञ शामिल थे।
27 लाख हेक्टेयर खराब भूमि पर हरियाली का अभियान
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सरकार ने यूएनसीसीडी (यूनाइटेड नेशनंस कंजर्वेशन टू कोम्बेट डिजर्टीफिकेशन ) के तहत 2030 तक देश की 260 लाख हेक्टेयर खराब भूमि को संरक्षित किया जाना है। इसमें अरावली ग्रीन वाल प्रोजेक्ट को भी शामिल किया गया है।
उन्होंने बताया कि \“इस पहल के तहत अरावली रेंज में 64.50 लाख हेक्टेयर खराब भूमि की पहचान की गई है, जिसमें गुजरात, दिल्ली, हरियाणा व राजस्थान की भूमि शामिल है।
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव ने संरक्षण पर जोर दिया
इस काम 29 जिलों के वनमंडल अधिकारियों की देखरेख में किया जा रहा है। इन सभी को कीकर के पौधों की जगह स्थानीय प्रजातियों के पौधों को ही रोपने के लिए ध्यान देने को कहा है। साथ ही इसके अनुरूप नर्सरी भी विकसित करने को कहा गया है।\“
केंद्रीय मंत्री ने अरावली संरक्षण को लेकर प्रगति और योजना की यह जानकारी तब साझा किया है, जब पिछले दिनों अरावली पर्वतमाला की परिभाषा को लेकर एक विवाद खड़ा हो गया है। हालांकि बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे लेकर दिए गए अपने आदेश पर रोक लगा दी थी।
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