हर दिन 10000 लोगों को काट रहे कुत्ते, डॉग बाइट बना देश का साइलेंट सार्वजनिक सुरक्षा संकट
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/dog-1768409123483.jpgहर दिन 10000 लोगों को काट रहे कुत्ते डॉग बाइट बना देश का साइलेंट सार्वजनिक सुरक्षा संकट (फाइल फोटो)
अरविंद शर्मा, जागरण, नई दिल्ली। काॉलोनियों की गलियों, सड़कों और सार्वजनिक जगहों पर एक ऐसा संकट चुपचाप गहराता जा रहा है, जिसकी गूंज अब सरकारी आंकड़ों में भी साफ सुनाई देने लगी है। कुत्तों के काटने की घटनाएं अब अपवाद नहीं रहीं।
देश में हर दिन औसतन दस हजार से अधिक लोग डाग बाइट का शिकार हो रहे हैं। यह सिर्फ पशु-मानव टकराव नहीं, बल्कि गंभीर सुरक्षा और स्वास्थ्य संकट का रूप ले चुका है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आइडीएसपी के आंकड़े इस खतरे की भयावहता दिखाते हैं।
वर्ष 2022 में देश में करीब 22 लाख डाग बाइट के मामले दर्ज किए गए थे। 2023 में यह संख्या बढ़कर 27.5 लाख हो गई। 2024 में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई, जब देश भर में 37 लाख से अधिक मामलों की पुष्टि हुई। महज दो वर्षों में लगभग डेढ़ गुना बढ़ोतरी संकेत देती है कि खतरा लगातार बढ़ रहा है।
क्या कहते हैं ताजा आंकड़े?
ताजा आंकड़ों के अनुसार 2024 में कुल 37,17,336 डाग बाइट के मामले सामने आए। मतलब रोजाना औसतन दस हजार लोग कुत्तों के काटने के शिकार हुए। 2022 से 2023 के बीच मामलों में करीब 26.5 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।
पशु कल्याण बोर्ड के पास 2025 के पूरे साल के आंकड़े उपलब्ध नहीं हैं, लेकिन अधिकारियों का अनुमान है कि यह संख्या 45 लाख के पार जा सकती है। इसकी झलक 2025 के शुरुआती आंकड़ों से मिलती है, जब सिर्फ एक महीने में 4,29,664 मामले सामने आए। राज्यवार तस्वीर भी चिंताजनक है।
2024 में महाराष्ट्र में करीब पांच लाख लोगों को कुत्ते काटे। तमिलनाडु में यह आंकड़ा 4.8 लाख तक पहुंच गया। उत्तर प्रदेश में एक लाख 64 हजार से ज्यादा लोग कुत्तों के काटने का शिकार हुए, जबकि पंजाब में यह संख्या 23 हजार रही।
दिल्ली नगर निगम क्षेत्र में ही पिछले वर्ष 26,334 मामले दर्ज किए गए।पूर्वी और मध्य भारत में स्थिति तेजी से बिगड़ी है। बिहार में 2022 में जहां 1.41 लाख मामले थे, वहीं 2024 में बढ़कर 2.63 लाख हो गई। मध्य प्रदेश में दो वर्षों के भीतर डॉग बाइट के मामले दोगुने से ज्यादा हो गए। 2022 में 66,018 लोगों को कुत्तों ने काटा था, जो 2024 में बढ़कर 1,42,948 तक पहुंच गया।
झारखंड में वृद्धि की रफ्तार सबसे तेज रही। 2022 में 9,539 मामलों से बढ़कर 2024 में यह संख्या 43,874 हो गई। यह समस्या केवल महानगरों तक सीमित नहीं, बल्कि छोटे शहरों और कस्बों में भी गहराती जा रही है।विशेषज्ञों के मुताबिक तेजी से हो रहा शहरीकरण, आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या और कमजोर प्रबंधन व्यवस्था इसकी बड़ी वजहें हैं।
नसबंदी और टीका कार्यक्रमों का असर जमीन पर दिखाई नहीं देता। डॉग बाइट का खतरा सिर्फ चोट तक सीमित नहीं रहता, बल्कि इसके साथ रेबी.ा जैसी जानलेवा बीमारी का जोखिम भी जुड़ा है। इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों और बु.ाुर्गों पर पड़ता है। कस्बों और गांवों में समय पर इलाज और रेबीज का टीका मिलना अब भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।
कुत्ते काटने के मामले एवं रेबिज से मौत
[*]वर्ष- 2022
[*]मामले- 21,89,909
[*]मौत- 21
[*]वर्ष- 2023
[*]मामले- 30,52,521
[*]मौत- 50
[*]वर्ष- 2024
[*]मामले- 37,15,713
[*]मौत- 54
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