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18 हजार सीटें खाली, नीट-पीजी प्रवेश के लिए कटऑफ प्रतिशत में की गई कमी

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18 हजार सीटें खाली नीट-पीजी प्रवेश के लिए कटऑफ प्रतिशत में की गई कमी (फाइल फोटो)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। देश भर में 18 हजार से अधिक स्नातकोत्तर मेडिकल सीटें खाली रहने के कारण राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) ने नीट-पीजी 2025 प्रवेश के लिए अर्हता प्रतिशत को संशोधित किया है।

आरक्षित श्रेणियों के लिए कटआफ 40 प्रतिशत से घटाकर शून्य प्रतिशत कर दिया है। मंगलवार को एनबीईएमएस द्वारा प्रकाशित नोटिस के अनुसार, सामान्य वर्ग के लिए नीट-पीजी का कटआफ 50 प्रतिशत से घटाकर सात प्रतिशत कर दिया गया है।

यह निर्णय काउंसलिंग के दूसरे चरण के पूरा होने के बाद लिया गया है। आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि इस संशोधन का उद्देश्य उपलब्ध सीटों का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करना है, जो भारत में प्रशिक्षित चिकित्सा विशेषज्ञों की संख्या बढ़ाने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

ऐसी सीटों को खाली छोड़ने से स्वास्थ्य सेवा वितरण में सुधार के प्रयासों को नुकसान पहुंचता है और बहुमूल्य शैक्षिक संसाधनों का नुकसान होता है। नीट-पीजी एक रैं¨कग तंत्र के रूप में कार्य करता है, जो केंद्रीकृत काउंसलिंग के माध्यम से पारदर्शी और योग्यता-आधारित सीट आवंटन को सुगम बनाता है।

पिछली प्रतिशत सीमा ने सीटों की उपलब्धता के बावजूद पात्र उम्मीदवारों की संख्या को सीमित कर दिया था। मुख्य बिंदुओं को सूचीबद्ध करते हुए आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि प्रवेश प्रक्रिया पूर्णतया योग्यता-आधारित रहेगी, जो नीट-पीजी रैंक और उम्मीदवारों की प्राथमिकताओं के आधार पर निर्धारित की जाएगी।

सीटों का आवंटन केवल अधिकृत परामर्श प्रक्रियाओं के माध्यम से किया जाएगा और प्रत्यक्ष या विवेकाधीन प्रवेश की अनुमति नहीं है। सूत्रों ने बताया कि सीटों का वितरण पहले की तरह ही योग्यता और पसंद-आधारित आवंटन द्वारा निर्देशित होगा।

सूत्रों ने बताया कि शैक्षणिक मानकों में कोई कमी नहीं आएगी और संशोधित प्रतिशत केवल पहले से ही योग्य एमबीबीएस डाक्टरों के बीच पात्रता का दायरा बढ़ाता है। सूत्रों ने यह भी कहा कि पारदर्शिता और निष्पक्षता इस प्रक्रिया के केंद्र में हैं।

गौरतलब है कि इंडियन मेडिकल एसोसिएशन (आइएमए) ने 12 जनवरी को औपचारिक रूप से अर्हता कटआफ प्रतिशत में संशोधन का अनुरोध किया था, जिसमें सीटों को रिक्त रहने से रोकने और स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की आवश्यकता का हवाला दिया गया था।
योग्यता परीक्षा की विश्वसनीयता ऐसे निर्णयों से नष्ट होती है- एसोसिएशन

फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन (एफएआइएमए) के मुख्य संरक्षक डा. रोहन कृष्णन ने बुधवार को राष्ट्रीय चिकित्सा विज्ञान परीक्षा बोर्ड (एनबीईएमएस) द्वारा रिक्त स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटों को भरने के लिए नीट-पीजी के अर्हता प्रतिशत को कम करने की आलोचना की।

एक वीडियो संदेश में उन्होंने कहा कि ऐसे निर्णयों से योग्यता परीक्षा की विश्वसनीयता नष्ट होती है। कटआफ को शून्य प्रतिशत तक कम करने का मतलब है कि कटआफ से कम अंक प्राप्त करने वाले उम्मीदवार भी अब स्नातकोत्तर चिकित्सा प्रवेश के लिए पात्र हैं।

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