हाईवे पर आवारा पशुओं के आवाजाही की रियल टाइम जानकारी, SMS के जरिए मिलेगा अलर्ट
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/stray-animal-alerts-1768413052487.jpgNHAI ने आवारा पशुओं के लिए पायलट परियोजना शुरू की
डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। राष्ट्रीय राजमार्ग पर अचानक आवारा पशुओं के आने के कारण होने वाले सड़क हादसे को रोकने के लिए एनएचएआइ बड़ा कदम उठाया है।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI) ने बुधवार को घोषणा की कि राष्ट्रीय राजमार्गों पर वास्तविक समय में आवारा पशुओं की सुरक्षा संबंधी चेतावनी देने के लिए दो राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों में एक पायलट परियोजना शुरू की है।
आवारा पशुओं की रियल टाइम जानकारी
NHAI ने कहा कि यह पायलट परियोजना जयपुर-आगरा और जयपुर-रेवाड़ी राष्ट्रीय राजमार्ग गलियारों पर लागू की जा रही है।
इस इस पहल के तहत रिलायंस जियो ने अपने प्लेटफार्म को अपग्रेड किया है ताकि देश भर में वास्तविक समय में आवारा पशुओं की सुरक्षा संबंधी अलर्ट भेजे जा सकें।
पिछले महीने NHAI ने रिलायंस जियो के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था, जिसके तहत राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क पर दूरसंचार आधारित सुरक्षा अलर्ट प्रणाली शुरू की जाएगी।
इस पहल का उद्देश्य राष्ट्रीय राजमार्गों पर अचानक पशुओं की आवाजाही से होने वाली दुर्घटनाओं को कम करना है, खासकर कोहरे और कम ²श्यता की स्थिति में।
NHAI ने बना लिया प्लान
NHAI ने कहा कि पायलट परियोजना के तहत, राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा करने वालों के लिए लगभग 10 किलोमीटर पहले अग्रिम चेतावनी प्रदान करेंगे। इससे यात्रियों को एहतियाती उपाय करने के लिए कुछ समय मिल जाएगा।
\“आगे आवारा पशुजनित क्षेत्र है, कृपया सावधानी से चलें\“ NHAI ने कहा कि पायलट परियोजना के दौरान, राष्ट्रीय राजमार्ग पर यात्रा करने वालों के साथ प्रभावी संचार सुनिश्चित करने के लिए, सुरक्षा सलाह फ्लैश एसएमएस और उसके बाद वायस अलर्ट के माध्यम से दी जाएगी।
SMS से मिलेगा अलर्ट
फ्लैश SMS अलर्ट हिंदी में जारी किया जाएगा, जिसमें लिखा होगा, \“आगे आवारा पशुजनित क्षेत्र है। कृपया धीरे और सावधानी से चलें।\“ इसके बाद इसी सुरक्षा संदेश को दर्शाने वाला वायस अलर्ट भी जारी किया जाएगा।
30 मिनट के अंतराल में एक ही यूजर को बार-बार अलर्ट जारी नहीं किए जाएंगे। इससे वाहन चालकों में जागरूकता बढ़ेगी और राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुरक्षा में सुधार होगा।
अलर्ट दुर्घटना डाटा और जमीनी स्तर की जानकारी से पहचाने गए मवेशी क्षेत्रों के मानचित्रण के आधार पर तैयार किए जाएंगे और उन्नत दूरसंचार अवसंरचना के माध्यम से भेजे जाएंगे।
(न्यूज एजेंसी पीटीआई के इनपुट के साथ)
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