निर्यात तैयारी में महाराष्ट्र अव्वल, चौथे नंबर पर यूपी; 2047 तक 10% हिस्सेदारी का है लक्ष्य
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/14/article/image/niti-aayog-1768409633111.jpgनिर्यात तैयारी में महाराष्ट्र अव्वल चौथे नंबर पर यूपी (फाइल फोटो)
जागरण ब्यूरो, नई दिल्ली। विकसित देश बनने के लिए भारत वैश्विक व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए प्रयासरत हो गया है। इस दिशा में सभी राज्यों से निर्यात के लिए इको-सिस्टम तैयार करने एवं उसके अनुकूल नीति बनाने के लिए कहा गया है।
नीति आयोग की तरफ से राज्यों की इस तैयारी पर बुधवार को एक रिपोर्ट जारी की गई। रिपोर्ट के मुताबिक निर्यात तैयारी में महाराष्ट्र अव्वल है। तमिलनाडु दूसरे तो गुजरात तीसरे स्थान पर है। वहीं उत्तर प्रदेश चौथे तो बिहार 16वें स्थान पर है।
किस आधार पर की गई रैंकिंग?
इंफ्रास्ट्रक्चर व अन्य इको-सिस्टम, निर्यात के लिए विशेष सेक्टर का चयन, प्रतिस्पर्धा क्षमता और बाजार के विकास के आधार पर निर्यात तैयारी की रैंकिग की गई है। पंजाब सातवें नंबर है। वर्तमान में वैश्विक कारोबार में भारत की हिस्सेदारी लगभग दो प्रतिशत है जिसे वर्ष 2047 तक 10 प्रतिशत करने तो वर्ष 2030 तक भारत के निर्यात को एक लाख करोड़ डालर तक ले जाने का लक्ष्य तय किया गया है।
चालू वित्त वर्ष 2025 में वस्तु व सेवा को मिलाकर भारत का कुल निर्यात 850 अरब डालर से अधिक रहने का अनुमान है। अमेरिका के साथ व्यापार समझौते में हो रही देरी से भारतीय निर्यात प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि इस कमी की भरपाई के लिए सरकार यूरोपीय यूनियन समेत कई अन्य देशों से मुक्त व्यापार समझौता कर रहा है।
पिछले साल ब्रिटेन, ओमान, न्यूजीलैंड जैसे देशों के साथ समझौता किए गए हैं जिन पर इस साल अप्रैल के बाद अमल शुरू हो सकता है।नीति आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक वर्तमान में निर्यात कारोबार देश के चंद राज्यों में ही सिमटा हुआ है।
टॉप पर कौन-कौन से राज्य?
महाराष्ट्र, तमिलनाडु व गुजरात जैसे सिर्फ तीन राज्य 56 प्रतिशत निर्यात करते हैं। देश में 680 जिले हैं और देश के निर्यात में 100 जिलों की हिस्सेदारी 88 प्रतिशत है। बाकी के 580 जिलों की निर्यात में सिर्फ 12 प्रतिशत की हिस्सेदारी है।
देश के सिर्फ 10 जिलों से कुल 38 प्रतिशत निर्यात होता है और उत्तर प्रदेश के गौतम बुद्ध नगर को छोड़ अन्य सभी नौ जिसे गुजरात, महाराष्ट्र और तमिलनाडु के हैं। नीति आयोग का मानना है कि निर्यात को लेकर जो असमानता है, उसे दूर करने की जरूरत है और यह राज्य की तैयारी पर निर्भर करता है। इसलिए सभी राज्यों को निर्यात तैयारी के लिए प्रेरित किया जा रहा है।
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