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धमकी के बाद भी ईरान पर क्यों हमला नहीं कर पा रहे ट्रंप? वो 4 फैक्टर जो अमेरिका को रोक रहे

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ईरान पर क्यों हमला नहीं कर पा रहे ट्रंप? (फाइल)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। ईरान में चले रहे विरोध प्रदर्शन के बीच अमेरिका के राष्ट्रपति कई बार ईरान में सैन्य कार्रवाई की धमकी दे चुके हैं। अपनी ताजा धमकी में उन्होंने कहा है कि अगर ईरान विरोध प्रदर्शन के आरोप में गिरफ्तार किए गए किसी व्यक्ति को फांसी देता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। हालांकि ट्रंप के लिए ईरान पर हमला करना आसान नहीं होगा।

आइये जानते हैं ऐसे कौन से फैक्टर हैं जो ट्रंप को ईरान पर हमले से रोक रहे हैं।
अमेरिका ने नहीं भेजा है एयरक्राफ्ट कैरियर

राष्ट्रपति ट्रंप की आक्रामक बयानबाजी के बावजूद पेंटागन ने इस क्षेत्र की ओर कोई भी एयरक्राफ्ट कैरियर नहीं भेजा है। अमेरिका के सहयोगी खाड़ी देश पिछले वर्ष इजराइल के साथ 12 दिन की लड़ाई के दौरान हुए ईरानी हवाई हमलों से अभी भी उबर नहीं पाए हैं, उन्होंने भी ईरान पर अमेरिकी हमले में सहयोग देने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई है।

विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि कोई भी अमेरिकी सैन्य हमला सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई और ईरानी सरकार को घरेलू समर्थन जुटाने, आंतरिक विरोध प्रदर्शनों को गैर-कानूनी ठहराने और बाहरी खतरे के खिलाफ क्षेत्रीय गठबंधनों को मजबूत करने में मदद करेगा।
लेनी होगी खाड़ी देशों की मदद

अक्टूबर से अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में कोई एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात नहीं किया है, क्योंकि गर्मियों में यूएसएस गेराल्ड आर फोर्ड को कैरिबियन भेज दिया गया था और पतझड़ में यूएसएस निमित्त को अमेरिका के वेस्ट कोस्ट के एक पोर्ट पर भेज दिया गया था।

इसका मतलब है कि ईरानी ठिकानों पर और अयातुल्ला अली खामेनेई पर कोई भी हवाई या मिसाइल हमला मध्य पूर्व में अमेरिका और उसके सहयोगी देशों के एयरबेस से ही करना होगा या उसमें उनका शामिल होना जरूरी होगा। ऐसे में अमेरिका को कतर, बहरीन, इराक, यूएई, ओमान और सऊदी अरब जैसे देशों में बेस इस्तेमाल करने की इजाजत लेनी होगी और उसे इन देशों को जवाबी कार्रवाई से बचाना होगा।
बी-2 विमानों से हमला हो सकता है खतरनाक

दूसरा विकल्प जून में फोर्डो की अंडरग्राउंड ईरानी न्यूक्लियर साइट पर बी-2 विमानों के मिशन जैसा हमला हो सकता है। लेकिन किसी शहरी, ज्यादा आबादी वाली जगह पर ऐसा हमला खतरनाक साबित हो सकता है क्योंकि इसमें बड़े पैमाने पर नागरिकों की मौत हो सकती है। भले ही अमेरिका मध्य पूर्व के एयरबेस पर तैनात प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल न करे, लेकिन ईरानी नेताओं ने धमकी दी है कि अगर उनके देश पर हमला हुआ तो वे उसके बेस और जहाजों पर हमला करेंगे।
ईरान के पास 2,000 बैलिस्टिक मिसाइलें

इजरायल के साथ 12 दिन की लड़ाई में ईरान की सैन्य क्षमताएं बहुत कमजोर हो गई थीं, लेकिन तेहरान ने सीमित मिसाइल क्षमता बरकरार रखी है। ईरान के मुख्य लांच साइट पहाड़ों में छिपे हुए हैं, जिन्हें वह फिर से बना रहा है। द गार्जियन की एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान के पास लगभग 2,000 बैलिस्टिक मिसाइलें हैं, जो अगर बड़ी संख्या में लॉन्च की जाएं, तो अमेरिका और इजराइल के एयर डिफेंस को भेदते हुए बड़े पैमाने पर तबाही मचा सकती हैं।

स्त्रोत: जागरण रिसर्च

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