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लोकतंत्र का दमन और बदलता ईरान: 1953 से लेकर आज तक के संघर्षों की पूरी कहानी

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वर्तमान संकट से अस्थिर होता ईरान, इस स्थिति तक कैसे पहुंचा? (फोटो- रॉयटर)



डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। आज का ईरान एक ऐसे चौराहे पर खड़ा है जहां का रास्ता दशकों पुराने संघर्षों, विदेशी हस्तक्षेपों और आंतरिक विद्रोहों से होकर गुजरता है। 1953 में लोकतंत्र के दमन से शुरू हुआ यह सफर, 1979 की इस्लामिक क्रांति और उसके बाद के दमनकारी दौर से होते हुए अब एक निर्णायक मोड़ पर पहुंच गया है। पिछले सात दशकों में ईरान ने न केवल पश्चिम के साथ अपने बिगड़ते रिश्तों को देखा है, बल्कि सामाजिक और आर्थिक असमानता के खिलाफ अपनी जनता के बढ़ते आक्रोश का भी सामना किया है।

वर्तमान में तेहरान की सड़कों पर गूंजती बदलाव की आवाजें महज आर्थिक संकट का परिणाम नहीं, बल्कि वर्षों से संचित जन-असंतोष का विस्फोट हैं। हम आज जानेंगे कि आखिर ईरान इस स्थिति तक कैसे पहुंचा?
ईरान का वर्तमान संकट: ऐतिहासिक घटनाओं की एक शृंखला

ईरान आज जिस स्थिति में है, वह 1953 से लेकर हाल के वर्षों तक की कई ऐतिहासिक और राजनीतिक घटनाओं का परिणाम है, जिसमें विदेशी हस्तक्षेप, घरेलू क्रांति, युद्ध और आंतरिक असंतोष शामिल हैं।
1953: तख्तापलट और शाह का उदय

1953 में, अमेरिका और ब्रिटेन ने मिलकर एक योजनाबद्ध तरीके से ईरान के लोकतांत्रिक रूप से चुने गए प्रधानमंत्री मोहम्मद मोसद्देक का तख्तापलट कर दिया। इसके बाद, पश्चिम-समर्थक शाह मोहम्मद रजा पहलवी ने सत्ता संभाली, जिससे पश्चिमी शक्तियों का ईरान पर प्रभाव बढ़ गया।
1979: इस्लामिक क्रांति

1979 में ईरान में इस्लामिक क्रांति हुई। अमेरिका समर्थित शाह को देश छोड़कर भागना पड़ा। निर्वासित अयातुल्लाह खुमैनी की वापसी क्रांति में एक महत्वपूर्ण मोड़ था, जिसने ईरान और मध्य पूर्व की राजनीति को हमेशा के लिए बदल दिया। इसी वर्ष, युवा प्रदर्शनकारियों ने तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर हमला किया और बंधकों को ले लिया, जिन्हें अंततः 1981 में रिहा किया गया।
इस्लामिक क्रांति के बाद देश छोड़कर मिस्र चले गए थे शाह

बता दें कि 26 साल तक ईरान पर राज करने के बाद शाह के परिवार को मिस्र में शरण लेनी पड़ी थी। वहीं, इस क्रांति के बाद इराक और फ्रांस में निर्वासन की जिंदगी बिता रहे अयातुल्लाह रुहोल्लाह खामेनेई वापस ईरान आ गए थे।

अयातुल्लाह रुहोल्लाह खामेनेई को ईरान का पहला सुप्रीम लीडर बनाया गया था। साल 1989 में अयातुल्लाह रुहोल्लाह खामेनेई के निधन के बाद अयातुल्ला अली खामेनेई को ईरान का दूसरा सुप्रीम लीडर बनाया गया।
1980-1988: ईरान-इराक युद्ध

1980 में, ईरान और इराक के बीच एक लंबे समय से चला आ रहा क्षेत्रीय विवाद युद्ध में बदल गया। यह विनाशकारी युद्ध 1988 तक चला, जिसमें अनुमानित रूप से पांच लाख से अधिक लोग मारे गए।
2022: महसा अमीनी की मौत और विरोध प्रदर्शन

2022 में, 22 वर्षीय महसा अमीनी को ठीक से हिजाब नहीं पहनने के आरोप में मोरैलिटी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हिरासत में उनकी मौत से पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए।
2025 के अंत से वर्तमान स्थिति: आर्थिक संकट और देशव्यापी अशांति

2025 के अंत में, राजधानी तेहरान में आर्थिक मुद्दों, जैसे कि बढ़ती मुद्रास्फीति और गिरते रियाल के कारण विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए। ये प्रदर्शन धीरे-धीरे इस्लामिक रिपब्लिक को समाप्त करने की मांगों में बदल गए। शासन ने कठोर कार्रवाई की है, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं, जिससे देश एक गंभीर संकट के मुहाने पर खड़ा है।
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