ठंड में ऑटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ा, महिलाएं सबसे ज्यादा प्रभावित; क्या है इसकी मुख्य वजह?
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/15/article/image/Delhi-News-Update-(60)-1768424240460.jpgबुधवार को बढ़ी ठंड में शाम को ठिठुरते हुए कनाट प्लेस पर जाते राहगीर। फोटो- चंद्र प्रकाश मिश्र
जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। ठंड गंभीर बीमारियों का जोखिम बढ़ा रहा है, विशेष कर आटोइम्यून बीमारियों का। पुरुषों की तुलना में महिलाएं इससे अधिक प्रभावित हैं। एम्स चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार समय पर पहचान और नियमित इलाज से इन बीमारियों को नियंत्रित किया जा सकता है। इसमें लापरवाही बड़ी दिक्कत का कारण बन सकती है।
एम्स नई दिल्ली के रूमेटोलाजी विभाग की प्रमुख प्रो. डॉ. उमा कुमार ने बुधवार को आयोजित पत्रकार वार्ता में जानकारी दी कि सर्दियों में आटोइम्यून बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है, इसका सबसे ज्यादा असर महिलाओं में देखने को मिलता है।
बताया कि बुखार, लगातार थकान, मुंह और आंखों का सूखना, धूप में निकलने पर खुजली, त्वचा पर चकत्ते, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द जैसे लक्षण इस दौरान अधिक सामने आते हैं। इसके अलावा ठंड में महिलाओं में गर्भपात की घटनाएं भी अधिक देखी जाती हैं। सलाह दी कि लक्षण दिखते ही डॉक्टर से संपर्क करें और नियमित इलाज जारी रखें, ताकि बीमारी को नियंत्रण में रखा जा सके।
क्या है कारण और निदान?
डॉ. उमा कुमार के अनुसार आटोइम्यून बीमारियों के बढ़ने के पीछे कई कारण हैं। इनमें जांच सुविधाओं का विस्तार, लोगों में बढ़ती जागरूकता, जीवनशैली में बदलाव, वायु प्रदूषण, विटामिन-डी की कमी और हाइजीन हाइपोथिसिस जैसे कारक शामिल हैं।
बताया कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में आटोइम्यून बीमारियां ज्यादा पाई जाती हैं, क्योंकि महिलाओं के सेक्स हार्मोन इम्यून सिस्टम को प्रभावित करते हैं। सामान्य स्थिति में शरीर का इम्यून सिस्टम अपने ही प्रोटीन और टिश्यू को पहचानता है।
लेकिन कुछ परिस्थितियों में यह पहचान गड़बड़ा जाती है और इम्यून सिस्टम स्वस्थ सेल्स व टिश्यू पर ही हमला करने लगता है। इस प्रक्रिया में शरीर में सूजन बढ़ती है और बी-सेल, टी-सेल जैसे तत्व सक्रिय हो जाते हैं, जिससे आटोइम्यून बीमारियां विकसित होती हैं।
हाइपरटेंशन, डायबिटीज, स्ट्रोक का बढ़ता खतरा
डॉ. उमा कुमार ने बताया कि आटोइम्यून बीमारियों से हाइपरटेंशन, डायबिटीज, स्ट्रोक और कोरोनरी आर्टरी डिजीज का खतरा भी बढ़ जाता है। बताया कि आटोइम्यून बीमारियों की श्रेणी में 60 से अधिक बीमारियां आती हैं।
बताया कि रूमेटाइड आर्थराइटिस भी एक आटोइम्यून बीमारी है, जिसमें सर्दियों में जोड़ों में जकड़न और दर्द बढ़ जाता है। ठंड में शारीरिक सक्रियता कम होने, वजन बढ़ने और धूप की कमी से विटामिन-डी घटने के कारण समस्या और गंभीर हो जाती है। इसके अलावा नींद की कमी, तनाव, धूम्रपान, मोटापा और तंबाकू का सेवन भी आटोइम्यून बीमारियों को बढ़ावा देता है।
क्या होती हैं आटोइम्यून बीमारियां?
डॉ. उमा कुमार के अनुसार आटोइम्यून बीमारियां वह रोग होते हैं, जिनमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली बाहरी संक्रमणों से लड़ने के बजाय गलती से अपने ही स्वस्थ अंगों को नुकसान पहुंचाने लगती हैं।
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