झारखंड माटीकला बोर्ड ने राज्य भर में 5000+ ई-चाक किया वितरित, महिला कारीगरों की सोच और आय बदली
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/15/article/image/Hazaribagh-News-(12)-1768438394672.jpgमाटीकला बोर्ड ने कारीगरों की सोच और आमदनी दोनों में किया बड़ा बदलाव। फोटो जागरण
मासूम अहमद, हजारीबाग। परंपरागत माटीकला को आधुनिक तकनीक से जोड़कर झारखंड माटीकला बोर्ड ने कारीगरों की सोच और आमदनी दोनों में बड़ा बदलाव किया है। कभी हाथ से चाक चलाने में झिझक और कठिनाई महसूस करने वाली महिला माटीकला कारीगर आज ईलेक्ट्रिक-चाक के माध्यम से बेहतर गुणवत्ता और अधिक उत्पादन कर रही हैं।
इस संबंध में महिला माटीकला कारीगर शांति देवी ने बताया कि पारंपरिक चाक से कार्य करने में सामाजिक रूढियों के कारण रोक रहती थी। मगर इलेेक्ट्रिक चाक मिलने से अब हम सब बेझिझक माटीकला का कार्य कर रहे हैं और परिवार की आमदनी बढ रही है।
इधर माटीकला कारीगर राजेश कुमार जो अब मास्टर ट्रेनर की भूमिका भी निभा रहे हैं ने बताया कि पांरपरिक चाक से पहले केवल पुरूष ही कार्य करते थे जिससे समय अधिक लगता था मगर अब इलेक्ट्रिक चाक मिलने से महिला और पुरुष दोनों कारीगर काम करते हैं जिससे कार्य में तेजी आई है साथ ही आय में भी कई गुणा बढोत्तरी हुई है।
जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के सौजन्य से झारखंड माटीकला बोर्ड द्वारा बीते आठ वर्षों में पूरे राज्य में लगभग 5000 से अधिक ईलेक्ट्रिक-चाक का वितरण माटीकला कारीगरों के बीच किया जा चुका है। इसके साथ ही अब तक 25 बैचों में (प्रति बैच 20 प्रशिक्षु) आवासीय प्रशिक्षण भी दिया गया है।
90 प्रतिशत अनुदान पर मशीनें, आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा
माटीकला बोर्ड द्वारा कारीगरों को ईलेक्ट्रिक-चाक, पगमील मशीन और प्रेस मशीन 90 प्रतिशत अनुदान पर उपलब्ध कराई जा रही हैं। इसके अलावा गोला आईटीआई सेंटर में माटीकला का आवासीय प्रशिक्षण दिया जा रहा है, जिससे कारीगर आधुनिक तकनीक के साथ बेहतर डिजाइन और फिनिशिंग सीख रहे हैं।
मेलों से बढ़ी पहचान और आमदनी
कारीगरों को अपने उत्पादों की बिक्री के लिए सरस मेला, गांधी शिल्प बाजार, हैंडीक्राफ्ट मेला सहित विभिन्न राज्य व राष्ट्रीय स्तर के मेलों में स्टॉल लगाने का अवसर मिल रहा है। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ी है, बल्कि माटीकला उत्पादों को नई पहचान भी मिली है।
हजारीबाग जिले में ईलेक्ट्रिक-चाक वितरण
हजारीबाग जिले में अब तक ईलेक्ट्रिक-चाक का वितरण इस प्रकार हुआ है- सदर (55), डाड़ी (110), बरही (27), चौपारण (22), बड़कागांव (18), कटकमसांडी (16), दारू (20), चुरचू (28), कटकमदाग (54), केरेडारी (16), बरकट्ठा (12), चालकुशा (04), पदमा (15), ईचाक (27), टाटीझरिया (06)।
डिजाइनर दीया के लिए प्रेस मशीन
डिजाइनर दीया निर्माण के लिए प्रेस मशीन का भी वितरण किया गया है। माटीकला बोर्ड के नियमानुसार 05 कारीगर मिलकर एक प्रेस मशीन ले सकते हैं। अब तक सदर (02), डाड़ी (03), केरेडारी (02), कटकमदाग (04), कटकमसांडी (01) और बड़कागांव (01) में प्रेस मशीन दी जा चुकी है।
पगमील मशीन से बेहतर मिट्टी
मिट्टी से कंकर-पत्थर अलग करने के लिए पगमील मशीन का उपयोग किया जा रहा है। जिले में पगमील मशीन सदर (03), डाड़ी (05), कटकमदाग (02) और बरही (01) में वितरित की गई है।
इस संबंध में श्रीशपति त्रिपाठी, जिला उद्यमी समन्वयक ने बताया कि सरकार का उद्देश्य माटीकला कारीगरों को आत्मनिर्भर बनाना है। मुख्यमंत्री लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड के सौजन्य से झारखंड माटीकला बोर्ड द्वारा बीते आठ वर्षों में पूरे राज्य में लगभग 5000 से अधिक ईलेक्ट्रिक-चाक का वितरण माटीकला कारीगरों के बीच किया जा चुका है। आधुनिक मशीन, प्रशिक्षण और मार्केटिंग सुविधा देकर उन्हें स्थायी रोजगार से जोड़ा जा रहा है।
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