धनु से मकर में पहुंच उत्तरायण हुए सूर्य, खरमास समाप्त, काशी में उमड़ी भक्तों की भीड़
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/15/article/image/patang-1768443108408.jpgसूर्योदय से सूर्यास्त तक आकाश में उड़ती रही पतंग। जागरण
जागरण संवाददाता, वाराणसी। सृष्टि के प्रत्यक्ष संचालक, ऊर्जा के स्रोत भगवान भाष्कर ने अपनी राहें बदल लीं। बुधवार की रात्रि 9:39 बजे वे धनु से मकर राशि में प्रवेश कर गए। सूर्य के राशि परिवर्तन से होने वाली संक्रांति को सनातन धर्मावलंबी मकर संक्रांति के रूप में उल्लासपूर्वक गुरुवार को मनाएंगे।
काशी में गंगा व प्रयागराज मेें त्रिवेणी संगम में संक्रांति स्नान के लिए रात से ही आस्थावानों की भीड़ जुटने लगी थी। आस्थावानों को गुरुवार को दोपहर 1:58 बजे तक स्नान-दान का पुण्यकाल मिलेगा। इसके साथ ही घर-घर में खिचड़ी बनेगी।
भक्त बाबा विश्वनाथ, माता अन्नपूर्णा समेत सभी देवालयों में देव विग्रहों को खिचड़ी का भोग लगाएंगे। ब्राह्मणों, याचकों व दरिद्र नारायण को तिल, गुड़, कंबल, लाई-च्यूड़ा व खिचड़ी का दान करेंगे। अनेक स्थानों पर स्वयंसेवी संस्थाओं व मंदिर समितियों के लोगों द्वारा खिचड़ी का भंडारा भी आयोजित होगा।
खेलकूद व सांस्कृतिक कार्यक्रमों के आयोजन होंगे। लोग खिचड़ी, तिल-गुड़ से बने व्यंजनों का स्वाद चखेंगे और एक-दूसरे को भेंट करने के साथ ही बहू-बेटियों को खिचड़ी भेजी जाएगी।
अनुराधा नक्षत्र में होने से नाम होगा ‘मंदाकिनी’
काशी हिंदू विश्वविद्यालय के ज्योतिष विभाग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. विनय कुमार पांडेय ने बताया कि इस बार सूर्य की यह संक्रांति अनुराधा नक्षत्र में हो रही है। इसलिए इस बार इसका नाम ‘मंदाकिनी’ होगा। यह सम संज्ञक तथा 30 मुहर्त की ऊर्ध्व स्थिति वाली संक्रांति है जिसका वाहन वाराह अर्थात सूअर, वस्त्र हरे रंग का, शस्त्र खड्ग, भोजन भिक्षा से प्राप्त अन्न, लेप रक्त चंदन, योनि सर्प तथा पुष्प बकुल है।
सूर्य की मकर संक्रांति धर्म कार्य हेतु केवल पुण्यकाल ही नहीं अपितु इस लोक व्यवस्था के संचालन में एक मास तक शुभाशुभ फल भी निर्धारित करती है यह फल उस संक्रांति की संज्ञा, वाहन, वस्त्र, आयुध, अन्न, लेप, जाति और उसके पुष्प आदि से व्याख्यायित होती है।
इस वर्ष की मकर संक्रांति मंदाकिनी के जो वाहन, वस्त्र, आयुध, भक्ष्य पदार्थ, लेप, योनि, पुष्प, वय इत्यादि बताए गए हैं, उनका तथा उनसे संबंधित कार्य करने वाले लोगों के समक्ष एक मास तक अनेक प्रकार की कठिनाइयां उपस्थित होती हैं, उनके व्यवसाय में हानि की संभावना बनी रहती है। इस संक्रांति के प्रभाव से एक मासपर्यंत धन धान्य की समृद्धि का उत्तम योग है।
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शासकों, सिपाहियों के अनुकूल, धर्म विरुद्ध आचरण करने वालों के प्रतिकूल
अनुराधा नक्षत्र में यह संक्रमण होने के कारण मंदाकिनी संज्ञक यह संक्रांति राजाओं के लिए प्रशासकों के लिए तथा रक्षण का कार्य करने वाले सिपाहियों सैनिकों के लिए अनुकूल फल प्रदान करने वाली तथा सुखकारी है। रात्रि काल के द्वितीय प्रहर में संक्रांति होने के कारण यह संक्रांति सनातन धर्म के प्रतिकूल आचरण करने वाले तथा भारतीय संस्कृति के विरुद्ध राक्षसवृति का आचरण करने वाले, सामाजिक धार्मिक एवं सभ्यता के विरुद्ध आचरण करने वाले लोगों के लिए अच्छी नहीं है। मौसम एवं वातावरण अनुकूल रहेगा तथा अन्न भोजन पदार्थ सहित वस्त्र आभूषण इत्यादि के मूल्यों में स्थिरता रहेगी।
छह नक्षत्रों में उत्पन्न जातकों के लए सुख-समृद्धि का योग
अनुराधा से पूर्व चित्रा स्वाति एवं विशाखा इन तीन नक्षत्रों में उत्पन्न जातकों के लिए यह संक्रांति यात्रा का योग, पुष्य अश्लेषा मघा पूर्वाफाल्गुनी उत्तराफाल्गुनी और हस्त इन छह नक्षत्रों में उत्पन्न जातकों को सुख शांति समृद्धि, मृगशिरा आर्द्रा और पुनर्वसु तीन नक्षत्र में उत्पन्न जातकों को दुख की प्राप्ति, उ भा, रेवती, अश्विनी, भरणी, कृतिका और रोहिणी इन छह नक्षत्रों में उत्पन्न जातकों को वस्त्र आभूषण आदि का लाभ, धनिष्ठा शतभिषा पू भा इन तीन में जन्मे जातकों को हानि तथा अन्य छह नक्षत्रो में उत्पन्न जातकों को मास पर्यंत लाभ दिलाने वाली है।
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