क्या अब पूरी तरह बिक जाएगा Yes Bank, जापानी फर्म SMBC का होगा फुल कंट्रोल, RBI की अहम मंजूरी के क्या मायने?
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/15/article/image/YES-BANK-AND-SMBC-1768480531020.jpgफिलहाल, जापानी बैंकिंग फर्म एसएसबीसी के पास यस बैंक में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।
नई दिल्ली। यस बैंक के शेयरधारकों के लिए एक अच्छी नहीं बल्कि बहुत अच्छी खबर आई है। दरअसल, रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने जापानी बैंकिंग फर्म SMBC (सुमितोमो मित्सुई बैंकिंग कॉर्पोरेशन) को भारत में पूरी तरह से सब्सिडियरी (WOS) स्थापित करने के लिए \“सैद्धांतिक\“ मंज़ूरी देने का फैसला किया है। RBI का यह निर्णय यस बैंक के लिए अहम साबित हो सकता है क्योंकि, SMBC अब यस बैंक में कंट्रोलिंग स्टैक लेने की दिशा में आगे बढ़ सकता है।
फिलहाल, एसएमबीसी, भारत के प्राइवेट बैंक, यस बैंक में 24.2% की हिस्सेदारी रखता है, जो एक संस्था द्वारा सबसे बड़ी शेयरहोल्डिंग है, और कंट्रोलिंग स्टैक हासिल करने के लिए उसे यस बैंक में 26 फीसदी की हिस्सेदारी चाहिए होगी।
क्या SMBC को यस बैंक में मिलेगा कंट्रोलिंग स्टैक?
मार्केट एक्सपर्ट अंबरीश बलिगा का कहना है कि यस बैंक में कंट्रोलिंग स्टेक का मतलब होगा कि एसएमबीसी की बैंक में 26% हिस्सेदारी होना, और यह आसान लग रहा है क्योंकि RBI ने बैंक की मालिकाना हक वाली सब्सिडियरी में भरोसा दिखाया है। हालांकि, यस बैंक ने मई 2025 में इस बात से इनकार किया था कि SMBC की यस बैंक में मेजॉरिटी हिस्सेदारी लेने की कोई योजना है।
SMBC ने पिछले साल खरीदी थी हिस्सेदारी
वहीं, एसएमबीसी ने भी कई मौकों पर इससे इनकार किया है लेकिन साथ-साथ यह भी कहा कि वे यस बैंक में अपना निवेश बढ़ा सकते हैं या इसके लिए तैयार हैं। पिछले साल, SMBC ने यस बैंक में 24.22% हिस्सेदारी खरीदी थी। इस ट्रांजैक्शन के साथ, SMBC यस बैंक का सबसे बड़ा शेयरहोल्डर बन गया था, जबकि SBI के पास 10% से ज़्यादा की बड़ी हिस्सेदारी बनी हुई है।
ये भी पढ़ें- भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील जल्द संभव, कॉमर्स सेक्रेटरी ने कहा- दोनों देश डील के करीब पहुंचे
SMBC अभी भारत में नई दिल्ली, मुंबई, चेन्नई और बेंगलुरु में अपनी चार ब्रांच के ज़रिए बैंकिंग बिज़नेस कर रहा है। RBI ने एक बयान में कहा, “बैंक को भारत में अपनी मौजूदा ब्रांच को बदलकर WOS (पूरी तरह से सब्सिडियरी कंपनी) बनाने के लिए \“सैद्धांतिक\“ मंज़ूरी दे दी गई है।“ सेंट्रल बैंक ने कहा कि यह फैसला रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (विदेशी बैंकों द्वारा पूरी तरह से स्वामित्व वाली सब्सिडियरी स्थापित करना) गाइडलाइंस, 2025 के तहत लिया गया है।
Pages:
[1]