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आरएसएस और मुस्लिम समाज के बुद्धिजीवियों के बीच संवाद की नई शुरुआत, दूरियां पाटने के लिए देशभर में खुलेंगे मंच

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नेमिष हेमंत, नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) व मुस्लिम समाज में आपसी विश्वास की कमी कोई नई नहीं है, लेकिन ये दूरियां पाटने की दिशा में गंभीर प्रयास भी हो रहे हैं। पूर्व में सरसंघचालक मोहन भागवत खुद एक मस्जिद व मदरसा गए। कुछ माैकों पर कहा, मुस्लिमों के बिना भारत हिंदू राष्ट्र नहीं है। मत पंथ भले अलग हो, लेकिन डीएनए एक है। इसके साथ ही वह नियमित रूप से मुस्लिम बुद्धीजिवियों से मुलाकात व संवाद करते हैं। इसी तरह, की संवाद प्रक्रिया संघ के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ भी होती रही है।

वैसे, ये प्रक्रिया अक्सर बंद कमरों में रही है। अब उसमें बड़ा बदलाव लाया जा रहा है। विश्वास बहाली की यह प्रक्रिया अब खुले मंच पर भी होगी तथा उसमें आम मुस्लिमों को भागीदार बनाया जाएगा। जहां संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी तथा प्रमुख मुस्लिम बुद्धिजीवी शामिल होंगे तो चुनिंदा श्रोता भी होंगे, जिनकी शंकाओं का समाधान व भ्रम दूर करने का काम संघ पदाधिकारी करेंगे।इस नए तरह के संवाद की प्रक्रिया की शुरुआत पिछले वर्ष लखनऊ में 23 नवंबर को खुद मोहन भागवत ने की थी। तब तय किया गया था कि ऐसे आयोजन देशभर के प्रमुख शहरों में भी हो।

इस क्रम में दूसरा आयोजन राष्ट्रीय राजधानी में शुक्रवार को इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में होगा। जहां खुले मंच पर संवाद में संघ के सहसरकार्यवाह डा. कृष्ण गोपाल व अखिल भारतीय संपर्क प्रमुख रामलाल शामिल होंगे। मुस्लिम बुद्धिजीवियों की ओर से नुमाइंदगी पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एसवाइ कुरैशी, दिल्ली के पूर्व उपराज्यपाल नजीब जंग, लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त जमीरूद्दीन शाह जैसे 80 लोग करेंगे। उसमें कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता सलमान खुर्शीद को भी आमंत्रित किया गया है।

इस संवाद के आयोजन इंटर फेथ हार्मोनी फाउंडेशन ऑफ इंडिया के ख्वाजा इफ्तिकार अहमद ने बताया कि कोशिश रहेगी कि संवाद की इस प्रक्रिया को गैर राजनीतिक रखा जाए। सलमान खुर्शीद को बतौर इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर अध्यक्ष आमंत्रित किया गया है। उन्होंने आगे बताया कि इस तरह के आयोजन मुंबई, कोलकाता, चेन्नई समेत 20 से अधिक शहरों में कराने की कोशिश है। जिससे कि आपस में भ्रम की स्थिति दूर हो और देश को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में सभी एकजुटता से आगे बढ़े।

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