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दिल्ली के बिंदापुर में पेयजल संकट गहराया, नलों से आ रहा काला जहरीला पानी

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बिंदापुर एक्सटेशन में जलबोर्ड द्वारा आपूर्ति किया जा रहा पानी : जागरण



जागरण संवाददाता, पश्चिमी दिल्ली। कहते हैं जल ही जीवन है, लेकिन उत्तम नगर विधानसभा की दो कॉलोनियों के लिए जल ही जहर बन चुका है। बिंदापुर एक्सटेंशन और आदर्श नगर के करीब ढाई हजार परिवारों के 10 हजार निवासी पिछले तीन वर्षों से दिल्ली जल बोर्ड की घोर लापरवाही का दंश झेल रहे हैं।

यही इसके अलावा इस इलाके में करीब 1 से डेढ हजार किरायेदार भी रहते हैं, जो इसी पानी पर निर्भर हैं। यहां सरकारी पाइपलाइन से पानी नहीं, बल्कि गहरे काले रंग का बदबूदार तरल निकल रहा है, जिसे स्थानीय निवासियों ने व्यंग्य और बेबसी में कोका-कोला नाम दे दिया है। स्थिति इतनी विकट है कि यह इलाका अब इंदौर जैसे भीषण जल संक्रमण कांड की दहलीज पर खड़ा नजर आ रहा है।
तीन घंटे तक बहता है काला पानी

स्थानीय लोगों के अनुसार, इलाके में एक दिन छोड़कर शाम 7:30 बजे पानी की सप्लाई शुरू होती है। रात 12 बजे तक चलने वाली इस आपूर्ति के शुरुआती तीन घंटे तक नलों से केवल गाढ़ा काला और बदबूदार पानी निकलता है। इसकी गंध इतनी तीव्र होती है कि घर में सांस लेना मुश्किल हो जाता है। लोग इस पानी को पूरी तरह अनुपयोगी मानकर बहा देते हैं और रात के आखिरी एक घंटे में आने वाले थोड़े साफ पानी को केवल शौचालय के लिए सहेज पाते हैं।
लोग झेल रहे हैं दोहरी मार

दूषित जलापूर्ति ने स्थानीय निवासियों पर दोहरी आर्थिक मार की है। मुफ्त पानी के दावों के बीच, यहां के 10 हजार लोग हर महीने हजारों रुपये पीने और खाना बनाने के लिए बाहरी पानी के कैन खरीदने पर खर्च कर रहे हैं। साथ ही, काला जहरीले पानी के उपयोग से चर्म रोग, पीलिया और पेट के संक्रमण फैल रहे हैं, जिससे अस्पताल और दवाओं का भारी खर्च मध्यमवर्गीय परिवारों की कमर तोड़ रहा है। सरकारी लापरवाही का हर्जाना जनता अपनी गाढ़ी कमाई और स्वास्थ्य गंवाकर भर रही है।

विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए लोगों ने बताया कि साल 2023 में समाधान के नाम पर पूरे क्षेत्र की पाइपलाइन बदली गई थी। लेकिन लाखों के खर्च के बावजूद समस्या जस की तस है। जल बोर्ड के अधिकारी तीन साल में यह तक पता नहीं लगा पाए हैं कि आखिर सीवर का पानी पेयजल लाइन में मिल कहां से रहा है।


डॉक्टरों के अनुसार सीवर मिश्रित यह काला दूषित पानी त्वचा रोग, पीलिया और टाइफाइड जैसी बीमारियों का घर है। यदि विभाग ने समय रहते लीकेज के स्रोत का पता नहीं लगाया, तो यहां कभी भी गंभीर महामारी फैल सकती है। शासन-प्रशासन की यह चुप्पी जनता की जान पर भारी पड़ रही है।






तीन साल बीत गए, पर नलों से कोका-कोला आना बंद नहीं हुआ। अधिकारी आते हैं, जांच का ढोंग करते हैं और चले जाते हैं।
हरिदत्त गौतम, स्थानीय निवासी






नई पाइपलाइन डालना महज दिखावा साबित हुआ। आज भी हमें अपनी गाढ़ी कमाई पीने के पानी के कैन खरीदने में गंवानी पड़ रही है।
अतर सिंह राणा, स्थानीय निवासी

पानी की बदबू से मोहल्ले में रहना दूभर है। जब सप्लाई आती है, तो पहली बार आने वाले व्यक्ति को मितली और उल्टियां होने लगती हैं।
सचिन राजपूत, स्थानीय निवासी

हम रोज इस काले पानी से रूबरू हो रहे हैं। बच्चों के बीमार होने का डर लगा रहता है। क्या सरकार किसी की मौत का इंतजार कर रही है?: \“

रीना , स्थानीय निवीसी




मुकेश ठाकुर


क्षेत्र में बिजली, गैस और पानी की लाइनें आपस में उलझी हुई हैं, जिन्हें अलग किया जा रहा है। लोगों द्वारा खुद की गई अवैध खुदाई भी दूषित पानी का बड़ा कारण है। हम समस्या के स्थाई समाधान के लिए लगातार काम कर रहे हैं।



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पवन शर्मा , विधायक, उत्तम नगर
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