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नोएडा में नोबल को-आपरेटिव बैंक के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों पर धोखाधड़ी का आरोप, ट्रांसपोर्टरों ने की जांच की मांग

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जागरण संवाददाता, नोएडा। सेक्टर-29 में बृहस्पतिवार को नोएडा बस एसोसिएशन ने नोबल को-आपरेटिव बैंक के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारियों पर ट्रांसपोर्टर्स, छोटे व्यवसायियों का उत्पीड़न व धोखाधड़ी का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि बैंक प्रबंधकों ने लाेन की राशि जमा करने पर भी एनओसी नहीं दी है। वहीं, पूर्व सीईओ ने सभी आरोपों को खारिज कर ट्रांसपोटर्स को डिफाल्टर बताया है। मामले में हाईकोर्ट से स्टे मिलने की भी बात कही है।

एसोसिएशन के अध्यक्ष संदीप धुप्पर और महासचिव अनिल दीक्षित ने बताया कि नोएडा के ट्रांसपोर्टर्स और व्यवसायियों ने व्यवसाय का विस्तार करने लिए नोबल को-आपरेटिव बैंक से लोन लिया था। इसके बाद बैंक सभी को जानबूझकर परेशान करने लगा। आरोप है कि ब्याज सहित ऋण चुकाने पर भी उन्हें एनओसी नहीं दी।

कई तरह से कानूनी प्रक्रिया में उलझा कर गिरवी संपत्तियों को हड़पने का प्रयास किया। बैंक के पूर्व और वर्तमान पदाधिकारी मिलीभगत से संगठित गिरोह में काम करते हैं। आरोप ये भी है कि पुलिस और प्रशासन में प्रभाव होने की धमकी देते हैं।

प्रबंधकों पर 24 मई 2024 को पंकज चौहान 29 जुलाई को 2025 को कालू सिंह चौहान और सात नवंबर को सतपाल यादव व 12 नवंबर को राहुल ने मुक़दमा दर्ज कराए लेकिन, कार्रवाई नहीं हुई। ट्रांसपोर्टर्स ने पुलिस और प्रशासन के अधिकारियों से बैंक गतिविधियों की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। दीक्षित के मुताबिक, बैंक के सीईओ रहे वीके शर्मा के सेवानिवृत्त होेने के बाद अब उनके बेटे इस पद पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
बैंक के सीईओ ने नहीं दिया काल का जवाब

इस मामले में बैंक के सीईओ राघव भारद्वाज को उनका पक्ष जानने के लिए फोन काल से कई बार संपर्क किया लेकिन, उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। मैसेज भेजने के बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
सेवानिवृत्त सीईओ का दावा

बैंक के सेवानिवृत्त सीईओ वीके शर्मा का दावा है कि ट्रांसपोर्टर्स ने जो लोन लिए थे, वो जमा नहीं किए हैं। बीते वर्ष बैंक ने 1.10 करोड़ रुपये जमा करने के लिए कहा था। तब उन्होंने ओटीएस में 50 लाख रुपये जमा करने का दबाव बनाकर 15 लाख का डिमांड ड्राफ्ट दिया था। उनका प्रस्ताव अप्रैल 2025 में रद कर दिया था।

तब ट्रांसपोर्टर्स ने बैंक प्रबंधकों को विभिन्न केस में फंसाने और झूठा प्रसार-प्रचार करने की धमकी दी। आरोप है कि ट्रांसपोर्टर्स के खिलाफ 2020 में बैंक प्रबंधन ने मुकदमा कराया था, जिसमें आरोपित जेल गए थे। इस मामले में हाईकोर्ट में भी याचिका दायर हुई थी। तीन दिन पहले उन्हें स्टे मिल गया है। फिलहाल उन्होंने ट्रांसपोर्टर्स के सभी आरोपों को खारिज करते हुए बैंक का डिफाल्टर बताया है।
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