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महादेव ऑनलाइन बुक केस में ईडी की बड़ी कार्रव ...


नई दिल्ली। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने महादेव ऑनलाइन बुक (एमओबी) के अवैध सट्टेबाजी मामले में बड़ी कार्रवाई की है। ईडी के रायपुर जोनल ऑफिस ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए) के तहत 10 जनवरी को अंतरिम कुर्की का आदेश जारी किया, जिसमें कुल लगभग 21.45 करोड़ रुपए की चल-अचल संपत्तियां जब्त की गई हैं। यह कार्रवाई मामले की चल रही जांच का हिस्सा है, जिसमें अवैध सट्टेबाजी से कमाई गई रकम को छिपाने और वैध दिखाने की कोशिश की गई थी।




अटैच की गई संपत्तियों में करीब 98.55 लाख रुपए की चल संपत्तियां शामिल हैं, जबकि भारत और दुबई में स्थित 27 अचल संपत्तियां भी जब्त की गई हैं। इन अचल संपत्तियों में आवासीय मकान, व्यावसायिक दुकानें, कृषि भूमि और लग्जरी अपार्टमेंट शामिल हैं, जिनका कुल मूल्य लगभग 20.46 करोड़ रुपए है। ये संपत्तियां विभिन्न आरोपियों से जुड़ी हुई हैं, जो महादेव ऐप के संचालन में शामिल थे।
इसमें मुख्य प्रमोटर रवि उप्पल शामिल हैं, जो अभी फरार हैं। दुबई में उनके नाम पर एट्रिया रा इलाके में लगभग 6.75 करोड़ रुपए की एक विदेशी संपत्ति अटैच की गई है। रजत कुमार सिंह, जो सौरभ चंद्राकर के करीबी सहयोगी हैं, ने कई पैनल चलाए और 15-20 करोड़ रुपए की अवैध कमाई की। उनके नाम पर भिलाई और दुबई की संपत्तियां जब्त हुई हैं।




सौरभ आहूजा और विशाल रमानी ने लगभग 100 पैनल संचालित किए और करीब 30 करोड़ रुपए की कमाई की। दुर्ग और भिलाई में उनकी संपत्तियां अटैच की गई हैं। विनय कुमार और हनी सिंह ने छह पैनल चलाए तथा ऐप के फर्जी प्रचार में हिस्सा लिया। दोनों ने मिलकर अनुमानित 7 करोड़ रुपए (प्रत्येक 3.5 करोड़) कमाए। उनके नाम पर जयपुर और नई दिल्ली में मकान के अलावा महिंद्रा थार और टोयोटा फॉर्च्यूनर जैसे कई लग्जरी वाहन जब्त किए गए हैं।




लकी गोयल टेलीग्राम पर प्रचार में शामिल थे और उन्होंने करीब 2.55 करोड़ रुपए की कमाई की। राजस्थान में उनकी कई दुकानें और प्लॉट अटैच किए गए हैं। राजा गुप्ता दुबई से ऑपरेटर थे, जिन्होंने कम से कम 10 पैनल मैनेज किए। रायपुर में उनकी एक अचल संपत्ति, जो अवैध कमाई से खरीदी गई थी, अटैचमेंट के दायरे में है।
ईडी ने छत्तीसगढ़, आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल पुलिस की कई एफआईआर के आधार पर जांच शुरू की। जांच में सामने आया कि महादेव ऐप टाइगर एक्सचेंज, गोल्ड 365 और लेजर 247 जैसे डोमेन के जरिए अवैध सट्टेबाजी चलाता था। यह फ्रेंचाइजी मॉडल पर काम करता था, जहां मुख्य प्रमोटर सौरभ चंद्राकर और रवि उप्पल दुबई से संचालन करते थे। पैनलों से होने वाले मुनाफे का 70-75 प्रतिशत प्रमोटरों के पास जाता था। अवैध कमाई को हजारों डमी बैंक खातों के जरिए लेयर किया जाता था, जिनमें अनजान लोगों के केवाईसी दस्तावेजों का दुरुपयोग होता था।
अब तक इस मामले में ईडी ने 175 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी की है। जांच के नतीजे में कुल लगभग 2,621 करोड़ रुपए की चल और अचल संपत्तियां जब्त, फ्रीज या अटैच की जा चुकी हैं। एजेंसी ने 13 लोगों को गिरफ्तार किया है और अब तक दायर पांच प्रॉसिक्यूशन शिकायतों में 74 संस्थाओं को आरोपी बनाया गया है।




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