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गोरखपुर की राप्ती नदी में बढ़ रहा प्रदूषण, पानी होने लगा काला; लोगों के लिए बना संकट

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हैंडपंपों से निकलने लगा है प्रदूषित पानी। जागरण



संवाद सूत्र, मझगांवा। आस्था व जीवनदायिनी मानी जाने वाली राप्ती नदी का पानी गगहा क्षेत्र में पदूषित हो गया है। मिलों व औद्योगिक इकाइयों से छोड़े जा रहे रसायनयुक्त अपशिष्ट ने कछार इलाके में राप्ती नदी के पानी को काला, चिपचिपा व बदबूदार बना दिया है। नदी से उठती दुर्गंध और प्रदूषित पानी ने आसपास के गांवों में स्वास्थ्य संकट हो गया है।

स्थिति यह है कि भूजल भी इसकी चपेट में आ गया है। कई गांवों में हैंडपंप से दूषित पानी निकल रहा है। इसके पीने से बीमार होने की डर सता रहा है। बच्चों, महिलाओं व बुजुर्गों में त्वचा रोग, पेट संबंधी बीमारियां व संक्रमण की शिकायतें बढ़ने लगी हैं।

स्थानीय निवासी ज्वाला तिवारी, राजू यादव, सत्य प्रकाश तिवारी, दिनेश पांडेय, चंदमौल पांडेय, संजय ओझा, राजन ओझा, संत प्रसाद द्विवेदी, संजय मिश्रा आदि का कहना है कि राप्ती नदी अब जहरीली बन गई है। इसका सीधा असर बेलकुर, भैंसहा, रकहट, गरयाकोल, असवनपार, सहुआकोल, पूरे, छपरा सहित अनेक गांवों में देखा जा रहा है। पशु-पक्षी भी दूषित पानी पीने से बीमार हो रहे हैं। वहीं, मछलियों की मृत्यु से नदी का जैविक संतुलन भी बिगड़ गया है।

मच्छरों का बढ़ता प्रकोप
राप्ती नदी के किनारे से गुजरना अब मुश्किल हो गया है। नदी से उठती दुर्गंध ने वातावरण को प्रदूषित कर दिया है। गंदे पानी के चलते मच्छरों का प्रकोप भी बढ़ जाता है। इससे मलेरिया, डेंगू जैसी बीमारियों का खतरा उत्पन्न हो गया है। लोगों का कहना है कि महीनों से नदी का पानी काले रंग का दिखाई दे रहा है और उसमें रसायनों की तीखी गंध महसूस हो रही है।

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ग्रामीणों ने जांच की उठाई मांग
ग्रामीणों ने राप्ती नदी की तत्काल सफाई, प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य जांच शिविर व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की सख्त निगरानी के साथ ट्रीटमेंट प्लांट की स्थापना की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते ऐसा नहीं हुआ तो राप्ती नदी का प्रदूषण सभी को अपने आगोश में ले लेगा। इस संबंध में एसडीएम बांसगांव प्रदीप सिंह से बात करने की कोशिश की गई, लेकिन उनके मीटिंग में हाेने की वजह से बात नहीं हो पाई।
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