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UP में ईंट भट्ठों और पान-मसाले से सरकार को 1150 करोड़ का नुकसान, वित्त मंत्री ने की टैक्स व्यवस्था पर फिर से विचार करने की पैरवी

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राज्य ब्यूरो, लखनऊ। जीएसटी लागू होने के बाद से राज्य में पान मसाला व तंबाकू उत्पादों के साथ ईंट भट्ठा उद्योग से मिलने वाले राजस्व में भारी कमी आई है। इन दोनों उद्योगों से सरकार को प्रतिवर्ष 1150 करोड़ रुपये राजस्व का नुकसान उठाना पड़ रहा है। पान मसाला उद्योग से सालाना 1000 करोड़ रुपये राजस्व प्राप्ति घटकर 300 करोड़ रुपये रह गई हैं, जबकि ईंट भट्ठों से होने वाली वार्षिक कमाई 700 करोड़ रुपये से घटकर 250 करोड़ रह गई है। सरकार ने वर्ष 2017-18 से लगातार हो रहे राजस्व नुकसान के इस मुद्दे केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के समक्ष उठाया है।

राज्य के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने केंद्रीय वित्त मंत्री से कहा है कि वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने से पहले पान मसाला और तंबाकू उत्पादों से लगभग 1000 करोड़ रुपये राजस्व मिलता था। जीएसटी लागू होने के बाद से इन उत्पादों से मिलने वाला कर महज 300 करोड़ रुपये रह गया है। खपत में कोई कमी नहीं आने पर भी राजस्व में यह कमी बनी हुई है। उन्होंने ईंट भट्ठा उद्योगों से जीएसटी लागू होने के बाद करों में हुई भारी कमी से भी अवगत कराया।

250 करोड़ रह गया राजस्व

जीएसटी से पहले इस उद्योग से 700 करोड़ रुपये राजस्व राज्य सरकार को मिलता था, जो अब महज 250 करोड़ रुपये रह गया है। सुरेश खन्ना ने कहा कि वर्तमान कर व्यवस्था राज्य व उद्योग दोनों के लिए अव्यवहारिक साबित हो रही है। इसकी समग्र समीक्षा किए जाने का अनुरोध किया। उन्होंने कहा कि क्षमता/उत्पादन आधारित कर व्यवस्था लागू किए जाने पर विचार किया जाना चाहिए।

क्षमता आधारित टैक्स व्यवस्था में मशीन और ईंट भट्ठों की कुल उत्पादन क्षमता के आधार पर टैक्स तय कर दिया जाता था। जिसमें कारोबारी को तय धनराशि देने की बाध्यता थी। सरकार को तय धनराशि मिल जाती थी। वर्ष 2017 में जीएसटी लागू होने के बाद पान मसाला व तंबाकू उत्पादों पर 28 प्रतिशत कर लगाया गया था।

अभी सिंतबर से जीएसटी दरें बढ़ने के बाद पान मसाला व तंबाकू उत्पादों पर 40 प्रतिशत जीएसटी लागू की गई है। जीएसटी दरें बढ़ने से पान मसाला व तंबाकू उत्पादों से मिलने वाले कर में कुछ बढ़ोत्तरी होने का अनुमान है। जीएसटी में मशीन व ईंट भट्ठों की कुल उत्पादन क्षमता नहीं देखी जाती है, इसमें व्यापारी खुद कुल उत्पादन की घोषणा करता है, जिसके आधार पर जीएसटी ली जाती है।
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