बाबूलाल मरंडी ने डीजीपी की नियुक्ति पर कह दी बड़ी बात; सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का दिया हवाला
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/16/article/image/babulal_marandi-1768577379753.webpबाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया है।
राज्य ब्यूरो,रांची। पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी के निशाने पर अब नई डीजीपी तदाशा मिश्रा हैं। मरांडी ने शुक्रवार को प्रेस वक्तव्य जारी कर कहा कि राज्य सरकार ने डीजीपी की नियुक्ति में सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का उल्लंघन किया है।
सुप्रीम कोर्ट के दिशा-निर्देशों का हवाला देकर झारखंड में डीजीपी नियुक्ति नियमावली में संशोधन किया और तर्क दिया गया कि राज्य में अनुभवी पुलिस प्रमुख की नियुक्ति अनिवार्य है।
लेकिन कई वरिष्ठ आइपीएस अधिकारी के केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर होने के कारण डीजीपी पद पर चयन हेतु उपलब्ध नहीं हैं। मरांडी ने कहा कि गृह विभाग द्वारा नियमावली में अधिकारियों की अनुपलब्धता का जो आधार बताया गया है, वह पूरी तरह भ्रामक है।
वास्तविकता यह है कि झारखंड कैडर के डीजी रैंक के तीन वरिष्ठ अधिकारी अनिल पालटा, प्रशांत सिंह और एमएस भाटिया में से कोई भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर नहीं हैं।
इन तीनों अधिकारियों की सेवा अवधि भी एक वर्ष, दो वर्ष और तीन वर्ष शेष है। इसके बावजूद, सेवानिवृत्ति से ठीक एक दिन पहले वरीयता क्रम में उनसे कनिष्ठ अधिकारी को डीजीपी नियुक्त कर दिया गया।
केंद्रीय जांच एजेंसी को डराने की कोशिश नहीं करे पुलिस
पूर्व मुख्यमंत्री एवं नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने कहा कि राज्य पुलिस केंद्रीय जांच एजेंसियों को डराने की कोशिश कर रही है जिस पर हाइकोर्ट ने कड़ा निर्देश दिया है।
हाइकोर्ट ने ईडी के विरुद्ध रांची पुलिस द्वारा की जा रही कारवाई पर रोक लगाते हुए क्षेत्रीय कार्यालय की सुरक्षा केंद्रीय सुरक्षा बलों को सौंपने का आदेश दिया है।
मरांडी ने कहा कि राज्य सरकार पुलिस के सहारे जांच एजेंसियों को डराने-धमकाने की चाहे जितनी कोशिश कर ले भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई रुकने वाली नहीं है।
ईडी के विरुद्ध झूठे और मनगढ़ंत आरोप का स्क्रिप्ट तैयार कराने वाले मुख्यमंत्री के करीबी पूर्व मंत्री मिथिलेश ठाकुर एवं अन्य घोटालेबाजों के साथ ही इस षडयंत्र में शामिल सभी लोगों पर कानून की नजर है।
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