यूपी में मिनरल वाटर बनाने वाली 164 यूनिटों के फूड लाइसेंस सस्पेंड, FSDA ने 522 प्रोसेसिंग यूनिट का किया निरीक्षण
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/16/article/image/C-496-1-GKP1554-531329-1768581916940-1768581941278.webpसांकेतिक तस्वीर।
राज्य ब्यूरो, लखनऊ। नागरिकों को स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने के अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने पैकेज्ड मिनरल वाटर (बोतल बंद पानी) बनाने वाली 164 इकाइयों के खाद्य लाइसेंस निलंबित किए हैं। इनमें मिनरल वाटर बनाने और पैकिंग के लिए जरूरी मानकों का पालन नहीं किया जा रहा था। 104 इकाइयों को कमियां सुधारने के लिए नोटिस दिया गया है।
एफएसडीए ने मिनरल वाटर बनाने वाली 522 इकाइयों की 12 से 14 जनवरी तक अभियान चलाकर जांच की थी। इनमें से 140 निरीक्षण में बंद पाई गईं थी। बची हुई 382 इकाईयों से 387 पानी के नमूने लिए गए, जिनकी जांच कराई जा रही है। संयुक्त आयुक्त खाद्य हरि शंकर ने बताया कि जिन 104 इकाईयों को कमियां सुधारने का नोटिस दिया गया है, उन्हें 14 दिन में अपनी रिपोर्ट देनी होगी। इसके बाद फिर से उनकी जांच की जाएगी। यदि सुधार नहीं मिला तो इनके भी लाइसेंस निलंबित किए जाएंगे।बीते वर्ष 18 इकाइयों के नमूने जांच में असुरक्षित पाए गए हैं, इनके भी लाइसेंस निलंबित किए जाएंगे।
उन्होंने बताया कि मिनरल वाटर बनाने वाली इकाइयों में स्रोत से लिए गए पानी में जीवाणु, विभिन्न रसायनों, भारी धातुओं और कीटनाशकों की जांच की जाती है। इसके बाद मिनरल वाटर बनाने में आरओ, अल्ट्रा वायलट, ओजोन की प्रक्रिया के इस्तेमाल और फिर तैयार मिनरल वाटर की जांच की जाती है। जिस बोतल में पानी पैक किया जाता है, उसकी जांच भी एफएसडीए करता है। इनमें कोई खामी मिलने पर इकाइयों के लाइसेंस निलंबित किए जाते हैं।
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