महाराष्ट्र के नतीजे परिवारवाद पर चोट, ठाकरे ब्रदर्स जुगलबंदी के बावजूद नहीं बचा पाए किला
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/16/article/image/Maharashtra-local-elections-1768582148099.webpठाकरे परिवार ने बीएमसी में 30 साल का आधिपत्य खोया।
नीलू रंजन, नई दिल्ली। महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव के नतीजों ने परिवारवादी पार्टियों के कड़ा संदेश दिया है। राज ठाकरे और उद्धव ठाकरे की जुगलबंदी के बावजूद बीएमसी से ठाकरे परिवार का 30 साल का आधिपत्य खत्म हो गया।
इसके साथ ही शरद पवार और अजित पवार गुट की पुणे और पिंपरी चिंचवाड़ के लिए बनाए गए गठबंधन को भी जनता ने सिरे से नकार दिया।
दूसरी ओर महाराष्ट्र के नतीजों ने साबित कर दिया कि भाजपा भले ही 2014 में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की लोकप्रियता के बल पर सत्ता में आई हो, लेकिन वह गली-मुहल्ले में अपनी जड़े जमाने में सफल रही है और विरासत के विकास की बात जेनजी को भी पसंद आ रहा है।
ठाकरे परिवार ने बीएमसी में 30 साल का आधिपत्य खोया
महाराष्ट्र नगर निकाय चुनाव के नतीजों से साफ है कि परिवार केंद्रीत पार्टियों को अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने के लिए नए सिरे से रणनीति तय करनी पड़ेगी। राजनीति के लिए सिर्फ खानदान की विरासत काफी नहीं है।
13 महीने पहले हुए विधानसभा चुनाव में मतदाताओं ने इसका संकेत दे दिया था। लेकिन उद्धव ठाकरे ने इससे भी कोई सबक नहीं सीखा और राज ठाकरे से मिलकर बीएमसी के अंतिम गढ़ को बचाने की कोशिश की। जनता ने मराठी बनाम बाहरी के चार दशक पुराने फार्मूले को भी नकार दिया।
यह तमिलनाडु की आगामी विधानसभा चुनाव में हिंदीविरोध को मुद्दा बनाने की कोशिश कर रही डीएमके और मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के लिए भी चेतावनी है। चुनाव जीतने के लिए बदलते सामाजिक, जातीय, धार्मिक समीकरणों के साथ तालमेल बिठाना भी जरूरी है।
पवार परिवार के गठबंधन को पुणे-पिंपरी चिंचवाड़ में नकारा गया
पवार परिवार और ठाकरे परिवार से यही चूक हुई।परिवार केंद्रीय राजनीति के दिन खत्म होने का संकेत दो महीने पहले आए बिहार विधानसभा चुनाव में भी देखने को मिला था।
लालू यादव से विरासत में मिले सामाजिक, जातीय और धार्मिक समीकरण के भरोसे तेजस्वी यादव ने नीतीश कुमार के सामने चुनौती पेश करने की कोशिश की, लेकिन राजद 243 सीटों वाली विधानसभा में 27 सीटों पर सिमट कर रह गई।
गांधी परिवार के इर्दगिर्द सिमटी कांग्रेस राहुल गांधी के नेतृत्व में जनता के बीच जगह बनाने में लगातार विफल हो रही है।चुनाव के नतीजे प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भाजपा की जमीनी स्तर पर बढ़ती पकड़ को भी दिखाती है।
भाजपा ने मोदी के नेतृत्व में जमीनी स्तर पर पकड़ मजबूत की
पिछले एक दशक में मोदी सरकार की विकास और जनकल्याणकारी योजनाओं के सहारे भाजपा निचले स्तर पर संगठनात्मक ढांचा तैयार करने में रही है।
कभी शहरी बनियों, ब्राह्मणों की पार्टी कही जाने वाली भाजपा अब गली, मुहल्लों की पार्टी बन गई है और समाज के सभी वर्गों में उसकी पैठ बढ़ रही है।
सांप्रदायिक राजनीति के विपक्षी दलों के आरोपों से आगे निकलकर विरासत और विकास के सहारे जनता के बीच स्वीकार्यता बढ़ाने की भाजपा की रणनीति सफल होती दिख रही है।
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