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थाने पहुँचते ही पीड़ित के वो 10 मिनट: DGP राजीव कृष्णा ने क्यों बताया इन्हें सबसे कीमती?

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आनलाइन डीजीपी राजीव कृष्‍णा की बातें को सुनते पुल‍िस अध‍िकारी



जागरण संवाददाता, बरेली। जीआइसी आडिटोरियम में शुक्रवार को मिशन शक्ति कौशल कार्यशाला हुई। इसमें प्रदेश के डीजीपी राजीव कृष्णा आनलाइन जुड़े। उन्होंने कहा कि थाना स्तर पर मिशन शक्ति केंद्र की स्थापना कारगर साबित हुई। यहां सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण संवाद और संवेदनशीलता है। उन्होंने बताया कि मिशन शक्ति केंद्र पर आने वाले पीड़ितों के लिए पहले दस मिनट सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण हैं।

उनकी बात को गंभीरता से सुनकर उनका समाधान किया जाए। अभी से इसके सार्थक परिणाम भी देखने को मिल रहे हैं। कार्यक्रम की शुरुआत डीआइजी अजय कुमार साहनी के नेतृत्व में सुबह 9.30 बजे से हुई, जिसमें वक्ता के रूप में सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डा. शांतनु, एसआरएमएस के डा. जसविंदर, मनोविज्ञानी डा. मनाली और स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेष डा. शशिवाला शामिल थीं।

डा. जसविंदर ने बताया कि न्याय की शुरुआत हमेशा पुलिस स्टेशन से होती है, वह पहला इंप्रेशन होता है। पुलिस स्टेशन में आने के बाद पुलिस को पीड़ित की सराहना करनी चाहिए, क्योंकि वो डरा होता है। मनोविज्ञानी डा. मनाली ने बताया कि पीड़ित की मानसिक स्थिति को समझाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि शुरुआत के 10 मिनट में ही यह तय हो जाता है कि पीड़ित पुलिस पर भरोसा करेंगे या नहीं। उन्होंने बताया कि सभी को पीड़ित के साथ संवदेनशील तरीके से बात करनी चाहिए। इसके बाद स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डा. शशिवाला ने बताया कि किसी भी महिला के परीक्षण के समय ऐसा जरूरी नहीं कि जब पुरुष मेडिकल कर रहा हो तभी साथ में एक महिला की जरूरत है।

जब एक महिला भी यदि पीड़ित का मेडिकल कर रही है तो उसके साथ में भी एक अन्य महिला होना अनिवार्य है। वहीं, सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता डा. शांतनु ने महिला संबंधी अपराध में विवेचनात्मक मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) से संबंधित व्याख्यान दिया। वहीं, परिवार परामर्श केंद्र आंवला के जय गोविंद सिंह ने टूटते 100 परिवारों के सफल मध्यस्थता के अनुभव साझा किया।
नुक्कड़ नाटक से समझाया गया एमएसके का महत्व

कार्यक्रम में एसआरएमइस के छात्रों ने नुक्कड़ नाटक से मिशन शक्ति का प्रभाव दिखाया। पहले एक दुष्कर्म पीड़ित जब थाने जाती तो उसे टहला दिया जाता, लेकिन मिशन शक्ति केंद्र खुलने से उस पीड़ित की मदद में आसानी हुई। न उसे किसी बात का डर लगा न ही उसकी आइडेंटी को लीक किया गया। इसमें मिशन शक्ति केंद्र की स्थापना के बाद पुलिस के कार्य में बदलाव को दिखाया।
इनकी रही मौजूदगी

कार्यक्रम में एडीजी रमित शर्मा, कमिश्नर भूपेंद्र एस चौधरी, डीआइजी अजय कुमार साहनी, एसएसपी अनुराग आर्य, सीडीओ देवयानी, एसपी साउथ अंशिका वर्मा, एसपी ट्रेफिक अकमल खान समेत रेंज के सभी थानों के एमएसके प्रभारी व महिला कांस्टेबल शामिल हुए। इसके अलावा तीनों जिलों के एसएसपी व एसपी, सीओ और थाना प्रभारी ने आनलाइन प्रतिभाग किया।




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