दिल्ली के छह जिलों में मिनी सचिवालयों के निर्माण स्थल तय, जल्द शुरू होगा काम; PWD को जिम्मेदारी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/17/article/image/Delhi-Secritoraite-1768591647900.webpराज्य ब्यूरो, नई दिल्ली। दिल्ली सरकार ने शहर भर में जिला-स्तरीय मिनी सचिवालयों के निर्माण के लिए छह जगहों को फाइनल कर दिया है। लोक निर्माण विभाग द्वारा जारी एक आदेश के अनुसार पूर्वी दिल्ली जिले का मिनी सचिवालय मंडावली में, उत्तर-पश्चिम जिले का मिनी सचिवालय कंझावला में, दक्षिण जिले का साकेत में और द्वारका सेक्टर 10 में दक्षिण-पश्चिम जिले का मिनी सचिवालय बनेगा।
दक्षिण-पूर्व जिला और उत्तर-पश्चिम जिले के कार्यालय वहां के डीएम कार्यालय में बनाए जाएंगे। विभाग ने इस परियोजना पर काम करने के लिए परियोजना विंग को जिम्मेदारी भी सौंप दी है। द्वारका सेक्टर 10 में दक्षिण-पश्चिम जिले का मिनी सचिवालय के लिए सरकार ने कुछ दिन पहले राशि की मंजूरी भी दे दी है।
काम परियाेजना जोन को ट्रांसफर कर दिया गया
पीडब्ल्यूडी के आदेश में कहा गया है कि सक्षम अधिकारी ने यह फैसला किया है कि दिल्ली के हर जिले में मिनी सचिवालयों का निर्माण कार्य जोन के स्टाफ का सही इस्तेमाल करने के लिए यह काम परियाेजना जोन को ट्रांसफर कर दिया गया है। सभी कंट्रोलिंग अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि वे संबंधित रिकार्ड तुरंत परियाेजना जोन को सौंप दें।
बता दें कि हाल ही में वित्त विभाग की व्यय वित्त समिति (ईएफसी) ने द्वारका में एक मिनी सचिवालय के निर्माण के लिए 212.91 करोड़ रुपये मंजूर किए और राजस्व विभाग को अन्य जिलों में केंद्रीकृत प्रशासनिक इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने के लिए प्रस्ताव तैयार करने का निर्देश दिया था।
सभी 13 राजस्व जिलों में अत्याधुनिक जिला मिनी सचिवालय होंगे
अधिकारियों ने बताया कि मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली के सभी 13 राजस्व जिलों में अत्याधुनिक जिला मिनी सचिवालय बनाने की जरूरत पर जोर दिया है, जिसमें पब्लिक इंटरफेस और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर खास ध्यान दिया जाएगा। गुप्ता ने राजस्व विभाग को छह मिनी सचिवालयों का निर्माण 18 महीनों के भीतर पूरा करने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का भी निर्देश दिया है।
प्रस्तावित इमारतों को जीरो-वेस्ट सुविधाओं के रूप में विकसित किया जाएगा, जो प्रदूषण कम करने के लिए मिस्ट स्प्रिंकलर, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और बिजली की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त सौर ऊर्जा प्रणालियों से लैस होंगी।
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