बच्चों में निमोनिया की गंभीरता व मृत्यु का बड़ा कारण मिला कुपोषण, BRD का शोध
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/17/article/image/BRD_News-1768633284925.webpकैचवर्ड- बीआरडी मेडिकल कालेज
-बाल रोग विभाग में हुए अध्ययन में निमोनिया से ग्रसित 56 प्रतिशत बच्चे मिले कुपोषित
-कुपोषण पीड़ित बच्चों को पड़ी वेंटीलेटर व अधिक समय तक एंटीबायोटिक देने की जरूरत
जागरण संवाददाता, गोरखपुर : बच्चों में होने वाले कम्युनिटी एक्वायर्ड निमोनिया (सीएपी) की गंभीरता और मृत्यु दर बढ़ाने में कुपोषण एक बड़ा कारण बनकर सामने आया है। बीआरडी मेडिकल कालेज के बाल रोग विभाग में हुए अध्ययन में यह बात सामने आई है। अध्ययन में निमोनिया से ग्रसित कुल 155 बच्चों को शामिल किया गया। इनमें से 87 बच्चे अर्थात 56 प्रतिशत कुपोषित पाए गए, जिनका शारीरिक विकास उम्र के अनुरूप नहीं था और जिनकी रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर थी। ऐसे बच्चों की मृत्यु दर भी अधिक रही।
बाल रोग विभाग की अध्यक्ष डा. अनीता मेहता के निर्देशन में डा. अंकिता वर्मा ने सीएपी से ग्रसित 155 बच्चों पर अध्ययन किया। इनकी उम्र दो माह से 60 माह के बीच रही। इनमें मृत्यु दर 15.5 प्रतिशत पाई गई। मध्यम तीव्र कुपोषण (एमएएम) से ग्रसित बच्चों में मृत्यु दर 18.6 प्रतिशत और गंभीर तीव्र कुपोषण (एसएएम) से पीड़ित बच्चों में 35.7 प्रतिशत रही। जबकि सामान्य बच्चों में मृत्यु दर मात्र 4.4 प्रतिशत रही।
कुपोषण से ग्रसित निमोनिया पीड़ित बच्चों में जटिलताओं का खतरा भी अधिक पाया गया। 48.3 प्रतिशत बच्चों में सेप्सिस, 14.9 प्रतिशत में पायोथोरैक्स या न्यूमोथोरैक्स, 3.4 प्रतिशत में मेनिन्जाइटिस तथा 10.3 प्रतिशत में शाक के साथ सांस की दिक्कत देखी गई। इसके अलावा कुपोषित बच्चों में निमोनिया के लक्षण ठीक होने में अधिक समय लगा। 33 प्रतिशत बच्चों में यह अवधि 14 दिनों से अधिक रही। 29.9 प्रतिशत बच्चों को वेंटीलेटर पर रखना पड़ा, जबकि बिना कुपोषण वाले बच्चों में यह आवश्यकता केवल 4.4 प्रतिशत को पड़ी। वहीं कुपोषित बच्चों को लंबे समय तक एंटीबायोटिक देने की जरूरत पड़ी। 55 प्रतिशत बच्चों को 10 दिनों से अधिक समय तक एंटीबायोटिक दी गई, जबकि अच्छी तरह पोषित बच्चों में 70 प्रतिशत मामलों में 10 दिनों से कम में इलाज संभव हो सका।
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अध्ययन में पाया गया कि निम्न सामाजिक-आर्थिक वर्ग के बच्चों में निमोनिया और कुपोषण का खतरा अधिक है। कुपोषित बच्चों में खांसी और दौरे जैसी गंभीर समस्याएं भी अपेक्षाकृत अधिक देखी गईं। बच्चों में निमोनिया से होने वाली मौतों को रोकने के लिए कुपोषण पर प्रभावी नियंत्रण बेहद जरूरी है।
-डा. अनीता मेहता, अध्यक्ष बाल रोग विभाग, बीआरडी मेडिकल कालेज
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अच्छी तरह पोषित और कुपोषित बच्चों में कम्युनिटी एक्वायर्ड निमोनिया के परिणामों की तुलना और उससे प्राप्त डाटा का विश्लेषण किया गया। कुपोषित बच्चों में इसके खतरे ज्यादा मिले। उनकी स्थिति भी सामान्य बच्चों की अपेक्षा ज्यादा गंभीर थी, प्रयास के बाद भी अनेक को बचाया नहीं जा सका।
-डा. अंकिता वर्मा, अध्ययनकर्ता
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