उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड की वर्टिकल व्यवस्था से सुधरी बिजली व्यवस्था, बढ़ा विद्युत राजस्व
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/17/article/image/UPPCL-Consumer-Service-1768634719772.webpउत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊः उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड की वर्टिकल व्यवस्था का भले ही विभिन्न संगठन विरोध कर रहे हैं, लेकिन पावर कारपोरेशन प्रबंधन का दावा है कि बिजली आपूर्ति व्यवस्था में व्यापक सुधार हुआ है।
ट्रिपिंग व लाइन हानियां कम हुई हैं और विद्युत राजस्व में बढ़ोतरी हो रही है। नई व्यवस्था फेसलेस होने से पारदर्शिता बढ़ी है जिससे उपभोक्ताओं को शोषण से निजात मिलने के साथ ही बिजली संबंधी किसी भी तरह की समस्या के लिए इधर-उधर भागदौड़ नहीं करनी पड़ रही है।
दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, सूरत आदि बड़े शहरों की तरह प्रदेश की बिजली आपूर्ति व्यवस्था सुधारने के लिए पावर कारपोरेशन प्रबंधन ने पहले-पहल केस्को, अलीगढ़, मेरठ और बरेली में वर्टिकल व्यवस्था लागू करने के बाद लखनऊ, नोएडा, गाजियाबाद, मुरादाबाद तथा सहारनपुर में भी इसी व्यवस्था को लागू किया है।
पावर कारपोरेशन के निदेशक (वितरण) जीडी द्विवेदी ने बताया कि पहले जहां विद्युत खण्ड, जोन आदि में तैनात कार्मिक बिजली संबंधी सभी कार्य के लिये उत्तरदायी रहते थे वहीं वर्टिकल व्यवस्था में प्रत्येक कार्मिक को एक ही प्रकार के कार्य का दायित्व सौंपा गया है।जबावदेही तय होने से बेहतर परिणाम आ रहे हैं। उपभोक्ताओं की शिकायतों का तेजी से निस्तारण हो रहा है।
इस व्यवस्था में 1912 पर आने वाली शिकायतों का तय अवधि में निस्तारण सुनिश्चित किया जाता है। मुख्य अभियन्ता से लेकर नीचे तक के कार्मिक दर्ज शिकायतों का समाधान सुनिश्चित करते हैं। पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष डा. आशीष कुमार गोयल शिकायतों के निस्तारण की नियमित समीक्षा करते हैं।
द्विवेदी के अनुसार वर्टिकल व्यवस्था से लाइन हानियां कम होने के साथ विद्युत राजस्व बढ़ा है। ट्रिपिंग (बिजली की आवाजाही), ट्रांसफार्मर के खराब होने के साथ ही बिजली आपूर्ति ठप रहने की अवधि में कमी आई है।
दावा किया गया कि लखनऊ में ट्रिपिंग 60 प्रतिशत, नोएडा में 65 प्रतिशत, मुरादाबाद में 68 प्रतिशत, सहारनपुर में 42 प्रतिशत, गाजियाबाद-1 में 45 प्रतिशत तथा गाजियाबाद-3 में 61 प्रतिशत की कमी आई है।
Pages:
[1]