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डॉक्टरों-इंजीनियरों के घर से निकला क्रिकेटर, सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ को मानता है आदर्श; विजय हजारे में मचाया कोहराम

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स्पोर्ट्स डेस्क, नई दिल्ली। बीते कुछ सालों में भारत के घरेलू क्रिकेट में विदर्भ की टीम ने कमाल किया है। ये टीम रणजी ट्रॉफी भी जीती और ईरानी कप भी अपने नाम किया। इस टीम ने भारत को कई युवा सितारे दिए हैं। इस सीजन भी विदर्भ की टीम से एक सितारा निकल कर सामने आया है जिसने बताया है कि हालात मुश्किल हों लेकिन वो जीतना जानता है। ये खिलाड़ी हैं अमन मोखाडे।

विदर्भ ने विजय हजारे ट्रॉफी के सेमीफाइनल में कर्नाटक को मात देकर फाइनल में जगह बनाई है। इस सेमीफाइनल मैच में अमन का बल्ला जमकर चला है। उन्होंने चोट के बाद भी मैदान संभाले रखा और 138 रनों की पारी खेल अपनी टीम को फाइनल का टिकट दिलाने में अहम भूमिका निभाई। ये उनका इस टूर्नामेंट का पांचवां शतक था। अभी तक वह नौ पारियों में 781 रन बना चुके हैं।
डॉक्टर, इंजीनियर के परिवार से आते हैं अमन

नागपुर में रहने वाले अमन उस परिवार से आते हैं जहां ज्यादातर डॉक्टर, इंजीनियर, लेक्चरर हैं। चारों तरफ फैली पढ़ाई की आदत के बीच अमन ने कुछ अलग राह चुनी और क्रिकेटर बनने की ठानी। नौ साल की उम्र में उन्होंने बल्ला थामा और गलियों में क्रिकेट खेलकर प्रदर्शन को निखारा। अमन का नाम पहली बार 2019-20 में चमका। इस साल कूच बिहार ट्रॉफी में उन्हें विदर्भ की कप्तानी मिली और यहां से फिर उन्होंने रुकने का नाम नहीं लिया और सीनियर टीम में आ गए।
खुद से करते हैं बात

दैनिक भास्कर में छपी रिपोर्ट के मुताबिक, अमन की बल्लेबाजी की खासियत है कि वह गेंद दर गेंद खेलते हैं। वह लगातार खुद से बात करते हैं। अगर उनके बल्ले से कोई खराब शॉट निकल जाता है तो वह बेकाबू होने के बजाए खुद से बात करते हैं और कहते हैं कि इसे किस तरह से सुधारा जाए। वह लगातार खुद को टोकते रहते हैं।
कोच ने इस तरह निखारा

अमन की बल्लेबाजी में निखार और परिपक्वता उनके कोच की मेहनत का नतीजा भी है। उनके कोच वही हैं जिन्होंने भारत को यशस्वी जायसवाल जैसा बल्लेबाज दिया है। उनके कोच का नाम है ज्वाला सिंह। ज्वाला ने अमन को सीमेंट की गीली पिच पर प्लास्टिक की गेंदों से बल्लेबाजी कराई और उनकी टैक्निक को निखारा। वह यशस्वी को अपना गुरुभाई भी कहते हैं।

ऐसा नहीं है कि अमन के लिए हमेशा सब कुछ अच्छा रहा। जब बल्ला नहीं चला तो उन्हें टीम से बाहर जाना पड़ा और इस समय उन्होंने बेंच पर बैठकर दूसरों को देखकर काफी कुछ सीखा। करुण नायर पिछले सीजन तक विदर्भ की टीम का हिस्सा हुआ करते थे। नायर को देखकर उन्होंने काफी कुछ सीखा और टीम में वापसी की। अमने भारत के दो महान बल्लेबाजों-सचिन तेंदुलकर और राहुल द्रविड़ को अपना आर्दश मानते हैं।

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