deltin33 Publish time 1 hour(s) ago

आगरा उत्तरी बाइपास खाली: शहर में भारी वाहनों से खतरा, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

https://www.jagranimages.com/images/2026/01/17/article/image/highway-demo-picture-1768633242927.webp

सांकेतिक तस्वीर।



जागरण संवाददाता, आगरा। आगरा का उत्तरी बाईपास चार दिसंबर से पूरी तरह चालू हो चुका है, ऐसे में भारी वाहन जिनका आगरा से कोई काम नहीं है, वह शहर के बीच से क्यों गुजर रहे हैं? यह स्थिति तब है जब राष्ट्रीय राजमार्ग हादसों से भरा हुआ है। वहीं, 400 करोड़ की लागत से तैयार उत्तरी बाइपास खाली पड़ा है।

वरिष्ठ अधिवक्ता एवं सड़क-सुरक्षा कार्यकर्ता केसी जैन ने इन्हीं सवालों और सुझावों के साथ शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका दायर की है।

केसी जैन का कहना है कि याचिका केवल आगरा शहर की समस्या नहीं उठाती, बल्कि उन सभी शहरों की पीड़ा सामने लाती है, जहां राष्ट्रीय राजमार्ग घनी आबादी के बीच से होकर गुजरते हैं। भारी वाहनों के कारण आम नागरिकों का जीवन लगातार खतरे में बना रहता है। केसी जैन ने कहा कि याचिका का उद्देश्य किसी विभाग पर आरोप लगाना नहीं, बल्कि एक व्यावहारिक और जीवन-सुरक्षा से जुड़ा समाधान सामने रखना है।
उत्तरी बाईपास चालू होने के बाद भी भारी वाहनाें को नहीं गुजारा जा रहा

देश के सर्वाधिक हादसों वाले 100 शहरों में आगरा भी शामिल है। वर्ष 2025 में आगरा में 1350 से अधिक सड़क हादसों में 700 से अधिक लोगों की जान गई। सड़क दुर्घटनाओं में शून्य मृत्यु के लक्ष्य को हासिल करने के लिए जिले में तीन क्रिटिकल कॉरीडाेर बनाए गए हैं। जिसमें 208 ब्लैक स्पॉट को चिन्हित करके उनमें रोड इंजीनियरिंग, संकेतक समेत अन्य जरूरी बदलाव किए जा रहे हैं। जिसके लिए 14 क्रिटिकल टीम बनाई गई हैं। भारी वाहनों के उत्तरी बाइपास से गुजारने पर हादसों की संख्या को कम किया जा सकता है।
चौदह किलोमीटर लंबा है बाईपास

अधिवक्ता केसी जैन के अनुसार चार दिसंबर 2025 को आगरा का उत्तरी बाईपास पूरी तरह चालू कर दिया गया। यह बाइपास लगभग चौदह किलोमीटर लंबा है, इसे चार सौ करोड़ रुपये से अधिक की लागत से बनाया गया है। यह मार्ग दिल्ली से कानपुर और आगे जाने वाले वाहनों के लिए एक ऐसा रास्ता है जहां न शहर की भीड़ है, न चौराहे हैं और न ही बार-बार रुकने की मजबूरी।

इस बाईपास का उद्देश्य शुरू से ही स्पष्ट था। जो भारी वाहन आगरा नहीं जा रहे हैं, वे शहर में प्रवेश न करें। इसके बावजूद आज भी प्रतिदिन 50 हजार वाहन शहरी हिस्से से गुजर रहे हैं। जिनमें भारी ट्रक व बड़े वाहन शामिल हैं। ये वाहन स्कूलों, अस्पतालों, बस अड्डों, सब्ज़ी मंडियों, रिहायशी इलाकों और ऐतिहासिक स्मारकों के बीच से तेज़ गति से निकलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना रहता है।
व्यवस्था और तालमेल की कमी

संसाधनों की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था और तालमेल की कमी है। यही याचिका का केंद्रीय बिंदु है। यह तथ्य विशेष रूप से सामने रखा गया है कि उत्तरी बाईपास का मुख्य मोड़ रैपुरा जाट है, जो मथुरा जिले की सीमा में आता है। जिसके कारण व्यवहार में यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि भारी वाहनों को रोकने और उन्हें बाईपास पर मोड़ने की जिम्मेदारी किस प्रशासन की है।

न आगरा जिला और न ही मथुरा जिला इस बिंदु पर पूर्ण जिम्मेदारी ले पाता है। यह दर्शाती है कि जिलों के बीच स्पष्ट निर्देश और तालमेल न होने से एक अच्छी सड़क भी अपना पूरा लाभ नहीं दे पाती। याचिका में यह सुझाव भी रखा गया है कि यदि दूरी के अनुसार शुल्क लिया जाए या एकीकृत शुल्क व्यवस्था लागू हो, तो बाईपास का उपयोग स्वाभाविक रूप से बढ़ेगा और शहर के भीतर यातायात का दबाव कम होगा।
सिर्फ चार किमी का अंतर

कोई भारी वाहन रैपुरा जाट से कुबेरपुर तक शहर के बीच से जाता है, तो दूरी लगभग 34 किमी है। वही वाहन यदि उत्तरी बाईपास और यमुना मार्ग से जाता है, तो दूरी लगभग 38 किमी होती है, अंतर सिर्फ चार किलोमीटर का है।
Pages: [1]
View full version: आगरा उत्तरी बाइपास खाली: शहर में भारी वाहनों से खतरा, सुप्रीम कोर्ट में याचिका

Get jili slot free 100 online Gambling and more profitable chanced casino at www.deltin51.com