Tawang: अरुणाचल के तवांग की सेला झील में बड़ा हादसा, टूट गई जमी हुई सतह; केरल के दो पर्यटकों की डूबने मौत
Arunachal Pradesh: अरुणाचल प्रदेश के तवांग जिले में शुक्रवार दोपहर एक दुखद हादसे में केरल के दो पर्यटकों की मौत हो गई। यह घटना प्रसिद्ध सेला झील (Sela Lake) पर हुई, जहां जमी हुई झील की सतह पर टहलते समय अचानक बर्फ टूटने से पर्यटक बर्फीले पानी में गिर गए। तवांग के पुलिस अधीक्षक डीडब्ल्यू थुंगोन के अनुसार, केरल के सात पर्यटकों का एक समूह दोपहर करीब 2:30 से 3:00 बजे के बीच यहां रुका था। झील की ऊपरी परत कमजोर होने के कारण तीन लोग फिसलकर अंदर गिर गए। उनमें से एक को बचा लिया गया, लेकिन दो अन्य गहरे पानी में डूब गए।ठंड की वजह से रोका गया बचाव अभियान
हादसे के तुरंत बाद भारतीय सेना, सशस्त्र सीमा बल (SSB), NDRF और स्थानीय पुलिस ने संयुक्त रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। बरामद किए गए शव की पहचान बिनु प्रकाश (26) के रूप में हुई है, जो केरल के कोल्लम के रहने वाले थे। दूसरे पर्यटक, जिनकी पहचान महावीर के रूप में हुई है, उनकी तलाश अभी भी जारी है। अत्यधिक ठंड और तापमान 1 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिरने के कारण शुक्रवार शाम रेस्क्यू ऑपरेशन रोकना पड़ा। शनिवार सुबह से बचाव कार्य दोबारा शुरू किया गया है।
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बहुत खास है सेला झील
समुद्र तल से लगभग 13,700 फीट की ऊंचाई पर स्थित सेला झील जिसे पैराडाइज लेक भी कहा जाता है अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जानी जाती है। यह झील स्थानीय मोनपा समुदाय के लिए अत्यंत पवित्र मानी जाती है। सर्दियों में झील पूरी तरह जम जाती है, जिससे पर्यटक अक्सर इसकी सतह पर चलने की कोशिश करते हैं। हालांकि, बर्फ की मोटाई हर जगह समान न होने के कारण ऐसी दुर्घटनाओं का खतरा बना रहता है। प्रशासन ने पर्यटकों के लिए चेतावनी साइनबोर्ड लगाए है और उन्हें निर्धारित सुरक्षित क्षेत्रों के भीतर ही रहने की सख्त हिदायत दी है।
पर्यटकों के लिए जारी है सुरक्षा दिशा-निर्देश
तवांग जैसे उच्च एल्टीट्यूड वाले क्षेत्रों में पर्यटकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रशासन ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए है, जिनका पालन करना जान बचाने के लिए अनिवार्य है। सबसे महत्वपूर्ण चेतावनी जमी हुई झील की सतह को लेकर है, जहां पर्यटकों को कभी भी बर्फ पर चलने या खड़े होने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि बर्फ की परत पतली होने पर टूटने का गंभीर जोखिम रहता है। इसके साथ ही, शून्य से नीचे के तापमान में \“हाइपोथर्मिया\“ (अत्यधिक ठंड) से बचने के लिए पर्याप्त ऊनी कपड़े पहनना और शरीर के तापमान की निगरानी करना आवश्यक है। साथ ही, 13,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर \“एक्यूट माउंटेन सिकनेस\“ (AMS) के खतरे को देखते हुए, सांस लेने में तकलीफ या सिरदर्द महसूस होने पर पर्यटकों को तुरंत निचले इलाकों की ओर लौटने की सलाह दी गई है।
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