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हरियाणा: पत्नी और मासूम बेटे की हत्या मामले में SSB कॉन्स्टेबल को उम्रकैद, हाईकोर्ट ने खारिज की आरोपी की दलील दलील

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हरियाणा: पत्नी और मासूम बेटे की हत्या मामले में SSB कॉन्स्टेबल को उम्रकैद (फाइल फोटो)



दयानंद शर्मा, चंडीगढ़। पानी में डाले गए शवों में अपेक्षित सड़न (प्यूट्रिफ़ैक्शन) न मिलने को आधार बनाकर पहचान और समय-रेखा पर सवाल उठाने की दलील को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने सिरे से खारिज कर दिया।

मेडिकल जुरिस्प्रूडेंस के प्रामाणिक ग्रंथों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि ठंडे मौसम, गहरे पानी, कपड़ों से ढके और वजन बांधकर डाले गए शवों में सड़न की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से धीमी होती है।
कॉन्स्टेबल की सजा को रखा बरकरार

इसी वैज्ञानिक सिद्धांत के आधार पर कोर्ट ने हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले में पत्नी और नाबालिग बेटे की हत्या के दोषी एसएसबी कॉन्स्टेबल की उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा।

जस्टिस जीएस गिल और जस्टिस रमेश कुमारी की डिवीजन बेंच ने अपील खारिज करते हुए कहा कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की शृंखला पूरी तरह अभियुक्त के अपराध को स्थापित करती है और उसकी बेगुनाही की किसी भी संभावना को नकारती है।

अदालत ने मेडिकल साइंस की एक किताब का संदर्भ देते हुए कहा कि पानी में पड़ा शव, हवा के संपर्क में रहे शव की तुलना में समान स्तर की सड़न तक पहुंचने में लगभग दोगुना समय ले सकता है। विशेषकर सर्दियों में, जब शव गहरे ठंडे पानी में हो, कपड़ों से ढका हो और ईंटों से वजन बांधकर डुबोया गया हो, तब प्यूट्रिफ़ैक्शन और अधिक विलंबित हो जाती है।
नहर से बरामद हुआ शव

कोर्ट ने रेखांकित किया कि यह वही परिस्थितियां थीं, जिनमें मृतका और बच्चे के शव नहर से बरामद हुए। इसी आधार पर कोर्ट ने कहा कि उन्नत सड़न का अभाव अभियोजन के मामले को कमजोर नहीं करता। पोस्टमार्टम के अनुसार मृत्यु और परीक्षण के बीच 5 से 10 दिन का अंतर पूरी तरह स्थापित फॉरेंसिक सिद्धांतों के अनुरूप है।

हाई कोर्ट ने यह भी देखा कि हत्या के दिन 14 दिसंबर 2015 को अभियुक्त अपने कार्यस्थल से अनुपस्थित था। उसने न तो उस दिन अपनी मौजूदगी का संतोषजनक स्पष्टीकरण दिया और न ही घर में मिले खून के धब्बों की कोई विश्वसनीय वजह बताई। इसके अलावा, पत्नी और बच्चे के लापता होने की कोई रिपोर्ट भी उसने दर्ज नहीं कराई।
गर्दन पर अटैक कर की हत्या

अभियोजन के अनुसार, अभियुक्त धर्मेंद्र, जो एसएसबी में कॉन्स्टेबल था, ने अपनी पत्नी रीना की गर्दन पर गंभीर चोटें पहुंचाकर हत्या की और मासूम बेटे देवेश का गला रस्सी से घोंटकर जान ली। बाद में दोनों शवों को कंबल रजाई के कवर में लपेटकर ईंटों से बांधा गया ताकि वे पानी में तैर न सकें, और नहर में फेंक दिया गया।
मेडिकल साक्ष्यों में मौत की ये वजह आई थी सामने

मेडिकल साक्ष्यों ने रीना की मौत गर्दन की चोटों से और बच्चे की मौत दम घुटने से होने की पुष्टि की। रिकार्ड पर यह भी आया कि रीना ने अपने मायके पक्ष को एक लाख रुपये की मांग को लेकर प्रताड़ना और जान से मारने की धमकियों की शिकायत की थीं।

लापता होने से कुछ दिन पहले उसने अपने पिता को अपनी जान को खतरा होने की बात भी कही थी। जब परिजन ससुराल पहुंचे तो वह और बच्चा गायब थे, जबकि घर के भीतर खून के निशान मौजूद थे।
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