सरकारी योजनाओं के दावों के बीच खगड़िया के महादलित टोलों में बुनियादी सुविधाओं का अभाव, सड़क किनारे रहने को मजबूर
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संवाद सूत्र, परबत्ता (खगड़िया)। परबत्ता प्रखंड में महादलितों की अच्छी-खासी आबादी है। परंतु आज भी अधिकांश महादलित टोले में विकास की रोशनी नहीं पहुंची है। महादलित में मलिक समुदाय के कई परिवार आज भी सड़कों के किनारे झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रहने को विवश हैं। वहां अभी तक समुचित शिक्षा की रोशनी भी नहीं पहुंची हैं।
सरकार की तमाम घोषणाओं के बाद भी स्थिति नहीं बदली हैं। ये बुनियादी सुविधाओं से दूर हैं। इनके सामने मूलभूत सुविधाओं का अभाव अभी भी है।कई महादलितों को बास भूमि अभी भी नहीं है। जिसके कारण वे सड़कों के किनारे रहने को विवश हैं।
विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधा नहीं
कोलवारा पंचायत के कोलवारा मुसहरी में अभी तक विद्यालय और आंगनबाड़ी केंद्र की सुविधा नहीं है। यहां की रजनी देवी, रामदेव मांझी, मुन्ना, मीना देवी, गुड़िया देवी, चुन्नी देवी, फुचो मांझी, पवन मांझी आदि ने कहा कि, बुनियादी सुविधाओं से भी हमलोग वंचित हैं। हमलोगाें की उपेक्षा हो रही है। यहां घनी आबादी निवास करती है।
इनलोगों के अनुसार टोले में न तो विद्यालय है और न ही आंगनबाड़ी केंद्र ही। आवास योजना का लाभ भी कई लोगों को नहीं मिला है। जबकि यदुवंश नगर के मुकेश मलिक, खुशबू देवी ने कहा कि उनके गांव में आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है। दशकों पहले 14 हजार वाला इंदिरा आवास मिला था। उसमें ही किसी तरह से रह रहे हैं।
कई परिवार जैसे-तैसे रह रहे
अगुवानी स्टैंड के किनारे झुग्गी-झोपड़ी बनाकर रह रहे रंजीत मलिक, विपिन मलिक ने कहा कि, बास की भूमि नहीं है। इसलिए यहां झुुग्गी-झोपड़ी बनाकर किसी तरह से जीवन यापन कर रहे हैं। मड़ैया, सलारपुर चौक आदि के पास भी मलिक समुदाय के कई परिवार जैसे-तैसे रह रहे हैं।
डीपीओ सुनीता ने बताया कि, जहां आंगनबाड़ी केंद्र नहीं है वहां के अभिभावक निकटवर्ती आंगनबाड़ी केंद्र पर बच्चे का नामांकन कराएं। बच्चों को विधिवत सभी लाभ मिलेगा।
बीडीओ संतोष कुमार पंडित ने कहा कि सभी को सरकारी योजनाओं का लाभ मिल रहा है। किन्हीं को कठिनाई है, तो वे आवेदन करें। जांचोपरांत सरकारी योजना के लाभ को लेकर ठोस प्रयास किया जाएगा।
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