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पुंछ नगर पालिका पुलस्त नदी के पास फेंक रही थी कचरा, अब कम्युनिटी हॉल बेच NGT को चुकाना पड़ रहा 2.71 करोड़ जुर्माना

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पर्यावरण कार्यकर्ताओं ने पुंछ जिला प्रशासन के इस कदम की आलोचना की है।



डिजिटल डेस्क, पुंछ। पर्यावरण से खिलवाड़ पुंछ नगर पालिका पर भी भारी पड़ गया। नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल पर्यावरण कानूनों के लगातार उल्लंघन को देखते हुए नगर पालिका पर 2.71 करोड़ रुपये का जुर्माना किया है, जिसे चुकता करने के लिए उन्हें अपनी संपत्ति को निलाम करना पड़ रहा है।

डिप्टी कमिश्नर पुंछ ने नगर पालिका के एक कम्युनिटी हॉल समेत अन्य संपत्ति बेचने के लिए एक नीलामी कमेटी भी बनाई है ताकि नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) द्वारा लगाए गए जुर्माने को समय रहते अदा किया जा सके।

आपको बता दें कि यह जुर्माना पुंछ नगर पालिका परिषद (MC) पर पुंछ नदी के पास ठोस कचरे की बिना वैज्ञानिक तरीके से डंपिंग और वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट को चालू न करने के लिए लगाया गया है। एनजीटी को सौंपे गए आधिकारिक रिकॉर्ड बताते हैं कि शांति नगर डंपिंग साइट पर लगभग 19,000 मीट्रिक टन पुराना कचरा बिना ट्रीट किया हुआ है।

कुल जुर्माने में से अब तक केवल 25 लाख रुपये वसूले गए हैं, जिससे 2.46 करोड़ रुपये बकाया हैं। NGT ने पहले सितंबर 2024 में डिप्टी कमिश्नर पर रकम वसूलने में देरी के लिए 10,000 रुपये का पर्सनल कॉस्ट लगाया था। अब फिर से एनजीटी की गाज डीसी पर न गिरे इसी वजह से नगर पालिका की संपत्ति निलाम की प्रक्रिया डीसी पुंछ ने तेजी से शुरू कर दी है।
नीलामी के फैसले की हो रही कड़ी आलोचना

एनवायरनमेंटल एक्टिविस्ट ने डीसी पुंछ द्वारा पब्लिक एसेट्स की नीलामी के कदम की कड़ी आलोचना की है। उन्होंने इसे गहरी एडमिनिस्ट्रेटिव नाकामी का लक्षण बताया है। एनजीटी केस में पिटीशनर डॉ. राजा मुजफ्फर भट ने तर्क दिया कि नियमों के उल्लंघन के लिए जिम्मेदार अधिकारियों को यह फाइनेंशियल बोझ उठाना चाहिए।

डॉ. भट ने कहा, “एडमिनिस्ट्रेशन की नाकामियों की भरपाई के लिए टैक्सपेयर्स के एसेट्स क्यों बेचे जा रहे हैं?“ “नदी के पास कचरा फेंकना वॉटर एक्ट, 1974 के तहत एक क्रिमिनल एक्ट है। इसका हर्जाना उन सीइओ और डिप्टी कमिश्नरों की सैलरी और पेंशन से वसूला जाना चाहिए जिन्होंने पिछले 15 सालों में यहां काम किया है।“

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की प्रोग्रेस के बारे में एनजीटी को झूठे एफिडेविट दिए गए थे, जो तीन साल पहले दिए गए भरोसे के बावजूद अभी भी काम नहीं कर रहा है।
अभी भी नदी किनारे फेंका जा रहा कचरा

लोकल सोशल एक्टिविस्ट लोकेश शर्मा ने भी चल रहे एनवायरनमेंटल खतरे पर रोशनी डाली। “डिप्टी कमिश्नर पर जुर्माना लगाए जाने के बाद भी, पवित्र पुंछ नदी, जिसे पुलस्त नदी भी कहा जाता है, के पास कचरा फेंका जा रहा है। यह कई पर्यावरण कानूनों का साफ उल्लंघन है और एनजीटी को तुरंत सख्त दखल देने की जरूरत है।“
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