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कैंसर का साइलेंट अटैक: चतरा में 10 महीने में 128 नए मरीज, आपकी लाइफस्टाइल तो जिम्मेदार नहीं?

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स्वास्थ्य विभाग ने लोगों से असामान्य लक्षणों पर तुरंत जांच कराने की अपील की है।



अमन राणा, चतरा। जिले में कैंसर रोगियों की संख्या चिंताजनक रूप से बढ़ती जा रही है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार मार्च से दिसंबर तक की अवधि में कुल 128 नए कैंसर मरीज चिन्हित किए गए हैं। निजी तौर पर इलाज कराने वाले की संख्या इसमें शामिल नहीं है।

उक्त मरीज सिविल सर्जन कार्यालय में मुख्यमंत्री गंभीर बीमार उपचार योजना के तहत सहायता के लिए आवेदन जमा किए है। विभाग द्वारा जारी आंकड़ा को छोड़ दें, तो कैंसर पीड़ितों की संख्या डेढ़ सौ के पार जा सकती है।

यह स्थिति न केवल स्वास्थ्य विभाग, बल्कि आमजन के लिए भी गंभीर चेतावनी है। स्वास्थ्य विभाग के ताजा आंकड़ों के अनुसार मार्च से दिसंबर तक की नौ माह की अवधि में जिले में कुल 128 नए कैंसर मरीजों की पहचान की गई है।

आंकड़े बताते हैं कि जिले में लगभग हर माह औसतन छह से सात लोग कैंसर जैसी गंभीर बीमारी की चपेट में आ रहे हैं। यह स्थिति आने वाले समय में और भयावह रूप ले सकती है, यदि समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।

महीना-वार आंकड़ों पर नजर डालें, तो मार्च माह में 10, अप्रैल में 12, मई में 13, जून में 14, जुलाई में 15, अगस्त में 12, सितंबर में 14, अक्टूबर में 13, नवंबर में 13 तथा दिसंबर में 12 कैंसर जैसी गंभीर बीमारी के मरीज मुख्यमंत्री गंभीर बीमार योजना का लाभ लेने पहुंचे हैं।

इन आंकड़ों से स्पष्ट है कि मार्च से दिसंबर तक लगातार कैंसर के मरीजों की संख्या में वृद्धि दर्ज की गई है। खास बात यह है कि किसी भी माह में मामलों की संख्या एक अंकीय नहीं रही, जो जिले में बढ़ते खतरे की ओर इशारा करता है।
आम लोगों से अपील

जिला महामारी पदाधिकारी डॉ. आशुतोष कुमार ने आमजन से अपील की है कि वे किसी भी असामान्य लक्षण जैसे लंबे समय तक खांसी, अचानक वजन घटना, शरीर में गांठ, लगातार थकान या असामान्य रक्तस्राव को हल्के में न लें और तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लें।

साथ ही संतुलित आहार, नियमित व्यायाम और नशे से दूरी अपनाकर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
क्या कहते हैं चिकित्सक

असंतुलित जीवनशैली, बदलता खानपान, तंबाकू और गुटखा जैसे नशे का बढ़ता प्रचलन, शारीरिक श्रम की कमी तथा पर्यावरण प्रदूषण कैंसर के मामलों में वृद्धि के प्रमुख कारण हैं। इसके अलावा लोगों का लाइफ स्टाइल बदल गया है।

देर रात सोना और देर उठना भी इसका कारण है। इसके अलावा बाजार में फास्ट फूड में इस्तेमाल हो रहे एजिनोमोटो, प्लास्टिक के कप में चाय पीना, बाहरी खान-पान आदि मुख्य कारण है। इसके अलावा समय पर जांच न कराना और शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज करना भी स्थिति को गंभीर बना देता है।

अधिकांश मरीज तब अस्पताल पहुंचते हैं, जब बीमारी उन्नत अवस्था में पहुंच चुकी होती है, जिससे उपचार जटिल और खर्चीला हो जाता है।
-डॉ अरविंद केसरी, जनरल फिजिशियन, चतरा।
इसे नजरअंदाज न करें

[*]लगातार खांसी: यदि खांसी लंबे समय तक बनी रहे या आवाज में भारीपन आ जाए।
[*]अचानक वजन कम होना: बिना किसी प्रयास के शरीर का वजन तेजी से गिरना।
[*]शरीर में गांठ: शरीर के किसी भी हिस्से में असामान्य गांठ या सूजन।
[*]असामान्य रक्तस्राव: शरीर के किसी भी द्वार से बिना कारण खून आना।
[*]अत्यधिक थकान: पर्याप्त आराम के बाद भी लगातार कमजोरी महसूस होना।

बचाव के उपाय: स्वस्थ जीवन, कैंसर से दूरी

[*]नशे से तौबा: तंबाकू, गुटखा, सिगरेट और शराब का पूरी तरह त्याग करें।
[*]खान-पान में सुधार: फास्ट फूड और \“अजीनोमोटो\“ युक्त पदार्थों से बचें। प्लास्टिक के कप में गर्म चाय न पिएं।
[*]सक्रिय जीवनशैली: प्रतिदिन कम से कम 30 मिनट व्यायाम या योगाभ्यास करें।
[*]समय पर नींद: देर रात तक जागने की आदत बदलें और पर्याप्त नींद लें।
[*]नियमित जांच: 40 की उम्र के बाद साल में कम से कम एक बार फुल बॉडी चेकअप जरूर कराएं।
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