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ट्रंप का बैन भी बेअसर! अंबानी की रियालंस बाहर हुई तो इन कंपनियों ने बढ़ा दी रूस से तेल खरीद, कितना हो रहा फायदा?

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ट्रंप का बैन भी बेअसर! अंबानी की रियालंस बाहर हुई तो इन कंपनियों ने बढ़ा दी रूस से तेल खरीद, कितना हो रहा फायदा?



नई दिल्ली| अमेरिकी बैन की परवाह किए बिना भारत ने रूसी कच्चे तेल से मुनाफा निकालना शुरू कर दिया है। जहां कई कंपनियां पीछे हटी हैं, तो वहीं सरकारी रिफाइनर आक्रामक अंदाज में खरीद बढ़ाकर सस्ते तेल का फायदा (Russian Crude Oil Import) उठा रहे हैं। नतीजा- रूस से कुल आयात घटा, लेकिन चुनिंदा भारतीय कंपनियों की खरीद तेज हो गई।

हाल ही में सामने आए आंकड़ों के मुताबिक, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (IOC) और नायरा एनर्जी (Nayara Energy) ने इस महीने रूस से कच्चा तेल खरीदने में बड़ा उछाल दिखाया है। नायरा एनर्जी रूस की कंपनी रोसनेफ्ट (Rosneft) से जुड़ी है। हालांकि, अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते भारत का रूस से कुल तेल आयात घटा है। पिछले साल सबसे बड़ी खरीदार रही रिलायंस इंडस्ट्रीज (Reliance Industries) ने इस बार रूस से एक भी बैरल नहीं खरीदा।
भारत ने हर दिन खरीदा 11.8 लाख बैरल तेल

डेटा एनालिटिक्स कंपनी केप्लर (Kpler) के अनुसार, इस महीने के पहले पखवाड़े में भारत ने रूस से औसतन 11.8 लाख बैरल प्रतिदिन तेल खरीदा। यह पिछले साल की इसी अवधि और 2025 के औसत से करीब 30% कम है। दिसंबर की तुलना में भी आयात लगभग 3% घटा है।

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किन-किन कंपनियों ने बढ़ाई अपनी खरीद?

अमेरिकी बैन के बाद रूसी तेल खरीदने वालों की सूची सिमट गई है। इस महीने अब तक केवल इंडियन ऑयल, नायरा एनर्जी और भारत पेट्रोलियम कॉरपोर्शन लिमिटेड (BPCL) ही खरीदार बने हैं।

इंडियन ऑयल: करीब 5 लाख बैरल प्रतिदिन खरीद, रूस से भारत आने वाले कुल तेल का 43%। यह मई 2024 के बाद सबसे ज्यादा और 2025 के औसत से 64% अधिक है।
नायरा एनर्जी: करीब 4.71 लाख बैरल प्रतिदिन, कुल आयात का 40%। यह कम से कम दो साल में सबसे बड़ी खरीद और 2025 के औसत से 56% ज्यादा है।
BPCL: करीब 2 लाख बैरल प्रतिदिन, जबकि पिछले साल औसत 1.85 लाख बैरल था।
किन-किन कंपनियों ने बना ली दूरी?

रिलायंस इंडस्ट्रीज के साथ-साथ हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉरपोरेशन (HPCL), एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी (Mittal Energy) और मंगलोर रिफाइनरी एंड पैट्रोकैमिकल (Mangalore Refinery & Petrochemicals) ने इस महीने के पहले पखवाड़े में रूस से कोई तेल नहीं खरीदा।
छूट बढ़ी, भारत को फायदा

भारतीय और चीनी खरीदारों की घटती दिलचस्पी के चलते रूसी सप्लायर्स ने छूट बढ़ा दी है। इंडस्ट्री सूत्रों के मुताबिक, रूस के प्रमुख यूराल्स क्रूड पर भारतीय बंदरगाहों तक डिलीवरी के लिए छूट 5-6 डॉलर प्रति बैरल हो गई है- जबकि अक्टूबर में अमेरिकी प्रतिबंधों से पहले यह करीब 2 डॉलर थी। इसी बढ़ी छूट का फायदा उठाने के लिए इंडियन ऑयल ने जनवरी में खरीद बढ़ाई है।
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