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आतंकियों की तरह मतांतरण कराने की मिलती है ट्रेनिंग, पलभर में मिटाते है सबूत, पादरी और सहयोगियों ने यहां से लिया था प्रशिक्षण

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जागरण संवाददाता, कन्नौज। लालच देकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों का मतांतरण कराने वालों को आतंकियों की तरह ट्रेनिंग दी जाती है। प्रशिक्षण केंद्र में इन्हें पूरी तरह ईसाई धर्म के प्रति समर्पित होना सिखाया जाता है। यह लोग पलभर में मतांतरण से जुड़े साक्ष्य नष्ट कर देते हैं। पुलिस की गिरफ्त में आने पर चुप्पी साध लेते हैं। एक भी व्यक्ति के चुप्पी साध लेने पर पुलिस मतांतरण की जड़ तक पहुंचने में असमर्थ हो जाती है।

पुलिस ने सात दिसंबर 2025 को ठठिया थाना के करसाह में बगैर अनुमति बने चर्च में मतांतरण कराकर प्रार्थना कर रहे पन्नालाल, उसके भाई विद्यासागर और उमाशंकर को गिरफ्तार किया था। पुलिस ने तीनों के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेजा है। एसआइटी की जांच में सामने आया है कि आरोपितों ने केरल और आंध्रप्रदेश में मतांतरण का प्रशिक्षण लिया था। इसके बाद से इनके खातें में प्रतिमाह 67 सौ रुपये भेजे जाते थे।

यह लोग ईसाई धर्म के पूरी तरह समर्पित हैं। पुलिस के लाख पूछने पर भी कुछ नहीं बताते हैं। एसपी विनोद कुमार का कहना है कि आरोपित एक दम आतंकियों की तरह सोच रखकर मतांतरण कराते हैं। एक भी व्यक्ति के चुप्पी साध लेने पर मतांतरण की जड़ तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।

इन तीन तरह का मिलती है ट्रेनिंग

संपर्क अधिकारी:- मतांतरण करने के बाद सबसे पहले व्यक्ति को ईसाई धर्म के प्रति प्राण त्याग शपथ दिलाई जाती है। इसके बाद क्षेत्रों में भ्रमण कर लोगों को ईसाई धर्म के बारे में प्रेरित करने के तरीके बताए जाते हैं। इसके बाद लालच और सुविधाएं मुहैया कराकर प्रार्थना कराने की मुहिम चलाई जाती है। 50 से अधिक लोगों के मतांतरण करने पर चर्च का निर्माण कराकर खातों में धनराशि भेजना शुरू कराया जाता है।

उप पादरी:- 500 लोगों का मतांतरण कराने के बाद संपर्क अधिकारी को उप पादरी का प्रशिक्षण दिया जाता है। इसमें बीमार लोगों को अंगूर के रस का डोज देना, चर्च का मैनेजमेंट करना बताया जाता है। पादरी की गैरमौजूदगी में पूरी जिम्मेदारी उप पादरी की होती है। यह लोग ईसाई धर्म के अनुसार रहन-सहन के बारे में प्रचार करते हैं।

पादरी:- संपर्क अधिकारी के पद से प्रमोशन पाकर बने उप पादरी को ही पादरी का प्रशिक्षण दिया जाता है। क्षेत्र की मुख्य सर्किल चर्च के अलावा अन्य चर्च की भी इन पर जिम्मेदारी होती है। प्रार्थना सभा के बाद लोगों को स्नान कराकर मतांतरण कराने की जिम्मेदारी पादरी पर होती है। पादरी महानगरों से मतांतरण का नेटवर्क चलाने वालों के संपर्क में रहता है।
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