WEF Davos 2026: 10 राज्यों के प्रतिनिधि बदलती वैश्विक व्यवस्था के बीच निवेशकों को लुभाएंगे, भारत के लिए कितना अहम है यह बैठक?
स्विट्जरलैंड के दावोस में 56वें वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम (डब्ल्यूईएफ) का आयोजन ऐसे वक्त हो रहा है, जब वैश्विक स्तर पर काफी अनिश्चितता है। इस दौरान \“स्पिरिट ऑफ डायलॉग\“ थीम पर आयोजित चर्चा में दुनिया के कई बड़े लीडर्स शामिल होंगे। पिछले साल डब्ल्यूईएफ में ड्रामा देखने को मिला था। इसके संस्थापक क्लॉस श्वाब ने पांच दशक बाद चेयरमैन पद से इस्तीफा दे दिया था। उन पर वित्तीय हेराफेरी के आरोप लगे थे।19 जनवरी से 23 जनवरी के बीच आयोजन
WEF का 56वां एडिशन 19 जनवरी से 23 जनवरी के बीच होगा। इस बार दुनिया के देश नई विश्व व्यवस्था के लिए खुद को तैयार कर रहे हैं, जिस पर ट्रंप की छाया दिख रही है। ग्लोबल इंटिग्रेटेड मार्केट प्लेस अब बंटा हुआ नजर आता है। किसी देश की संप्रभुता की गांरटी नहीं रह गई है। चीन टेक्नोलॉजी के सुपरपावर के रूप में मजबूत हो रहा है। इकोनॉमिस्ट्स और डिप्लोमैट्स आज के माहौल को ऐसे मार्केट्स के रूप में देख रहे हैं, जो तटस्थ नहीं रह गया है। ट्रेड, टेक्नोलॉजी और कैपिटल फ्लो के साथ ही पावर पॉलिटिक्स इसकी दिशा तय कर रहे हैं।
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इस बार भारत का प्रतिनिधिमंडल सबसे बड़ा
ऐसे माहौल में स्विट्जरलैंड में भारत की मौजूदगी और अहम हो जाती है। भारत खुद को ग्लोबल कैपिटल के लिए एक भरोसेमंद डेस्टिनेशन के रूप में पेश किया जाता है, जहां ग्रोथ की अपार संभावनाएं हैं। दावोस में इंडिया का प्रतिनिधिमंडल इस बार पहले के मुकाबले काफी बड़ा है। केंद्रीय मंत्रियों के साथ 10 राज्यों के प्रतिनिधि और बिजनेस एग्जिक्यूटिव्स इस आयोजन में हिस्सा ले रहे हैं।
10 राज्यों के प्रतिनिधि भी आयोजन में लेंगे हिस्सा
केंद्रीय मंत्रियों अश्विनी वैष्णव, प्रह्लाद जोशी और के राममोहन नायडू के अलावा 10 राज्यों के प्रतिनिधि भारतीय प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं। इनमें असम, उत्तर प्रदेश, गुजरात, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक, झारखंड, महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश और केरल शामिल हैं। आंध्र को छोड़ जिसका अलग पेवेलियन होगा, बाकी राज्य इंडियन पेवेलियन में एक साथ होंगे।
पॉलिसी डिस्कशन को दिशा देने की होगी भारत की कोशिश
दावोस में यह आयोजन दिल्ली में होने वाले ग्लोबल इंडिया एआई समिट के कुछ हफ्तों पहले हो रहा है। एआई समिट में दुनिया के टॉप टेक्नोलॉजी लीडर्स और सीईओ के शामिल होने की उम्मीद है। दावोस में भारत का फोकस अपने यहां उपलब्ध आर्थिक मौकों के बारे में बताना और ग्लोबल पॉलिसी डिस्कशन को दिशा देने पर होगा। भारत की नजरें सिर्फ डील पर हस्ताक्षर पर नहीं होंगी बल्कि यह बंटी हुई ग्लोबल इकोनॉमी में अपने लिए सही जगह तलाशने की भी कोशिश करेगा।
भारत की जीडीपी ग्रोथ तेज, लेकिन कंजम्प्शन सुस्त
इंडियन इकोनॉमी की ग्रोथ स्ट्रॉन्ग है। लेकिन, प्राइवेट कंजम्प्शन सुस्त है, जिसकी जीडीपी में करीब 60 फीसदी हिस्सेदारी है। इनवेस्टमेंट की बात की जाए तो यह सरकार के कंधों पर टिका है। अगर टेक्नोलॉजी के क्षेत्र में तरक्की रोजगार के पर्याप्त मौके उपलब्ध कराने में नाकाम रहती है तो कमजोर कंजम्प्शन का असर इकोनॉमी पर पड़ सकता है। अमेरिका जैसे देशों में एआई आधारित ग्रोथ ग्लोबल मार्केट्स की दिशा तय कर रही है।
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दुनिया के दिग्गज पॉलिटिकल लीडर्स ले रहे हैं हिस्सा
WEF का 56वां एडिशन 19 जनवरी से 23 जनवरी के बीच होगा। इसमें 130 से ज्यादा देशों के करीब 3000 लीडर्स हिस्सा लेंगे। इनमें 400 टॉप पॉलिटिकल लीडर्स और 850 सीईओ होंगे। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप, कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क केर्नी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज सहित कई दिग्गज नेता शामिल होंगे। टेक्नोलॉजी की दुनिया से जेनसेन हुआंग, सत्या नडेला और डेमिस हसाबिस सहित कई बड़े एग्जिक्यूटिव्स हिस्सा लेंगे।
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