उत्तराखंड की विकास यात्रा में सत्यम, शिवम व सुंदरम का भाव, Jagran Forum में उपराष्ट्रपति ने कही यह बात
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/17/article/image/Vice-President-CP-Radhakrishnan-1768670762003.webpJagran Forum Dehradun शनिवार को मसूरी रोड स्थित होटल फेयरफील्ड बाय मैरियट में जागरण फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन।
राज्य ब्यूरो, जागरण, देहरादून। Jagran Forum Dehradun उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने कहा कि राज्य स्थापना के 25 वर्षों में देवभूमि उत्तराखंड की विकास यात्रा उत्साह बढ़ाने वाली है। राज्य भौतिक प्रगति की राह पर तो बढ़ ही रहा है, आध्यात्मिक चेतना व पर्यावरणीय संतुलन का समन्वय भी स्थापित कर रहा है।
राज्य की विकास यात्रा में सत्यम, शिवम व सुंदरम का भाव समाहित है। उपराष्ट्रपति शनिवार को मसूरी रोड स्थित होटल फेयरफील्ड बाय मैरियट में जागरण फोरम के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे।
उत्तराखंड राज्य की स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर ‘नए विचार, नई दिशा और नया स्वरूप’ विषय पर आयोजित सत्र में भाग लेने के लिए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन पहली बार उत्तराखंड दौरे पर यहां पहुंचे थे। उन्होंने अपने संबोधन में देवभूमि की आध्यात्मिक चेतना और प्रकृति का विशेष रूप से उल्लेख किया।
हरित विकास की दिशा में किए गए प्रदेश के प्रयासों को सराहते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा, जैविक कृषि, बागवानी, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, आयुष, पर्यावरण पर्यटन, स्टार्टअप व कौशल विकास में राज्य ने बड़ा मुकाम प्राप्त किया है।
उत्तराखंड राज्य सकल घरेलू उत्पाद के साथ ही सकल पर्यावरण उत्पाद की अवधारणा को अपनाने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। उन्होंने कहा, इन उपलब्धियों के पीछे राज्य का त्याग, दृढ़ता और राष्ट्र सेवा का संकल्प है।
सीपी राधाकृष्णन ने अपने संबोधन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की जुगलबंदी से अवस्थापना विकास के क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि राज्य ने सड़क, रेल, हवाई व संचार संपर्क में तेजी से प्रगति की है।
राज्य के विकास में पर्यावरणीय जिम्मेदारियों के महत्व को भी उन्होंने रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि राज्य के हिमनद, नदियां व वन अपनी भौगोलिक सीमाओं से आगे जाकर जीवन को संजीवनी प्रदान करते हैं। इनका संरक्षण आवश्यक है।
विकास में पर्यावरणीय चेतना को उन्होंने देवभूमि उत्तराखंड की आध्यात्मिक व सांस्कृतिक विरासत से जोड़ा। उन्होंने कहा कि भारतीय सांस्कृतिक सभ्यता में इस राज्य का विशेष स्थान है। वेद-पुराण से लेकर नदियां और जंगल यहां की पहचान हैं।
तप, साधना और सैन्य परंपराओं की भूमि है उत्तराखंड : राज्यपाल
राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेनि) ने कहा कि देवभूमि उत्तराखंड तप, साधना और सैन्य परंपराओं की भूमि है। यह राज्य राष्ट्रभक्ति, बलिदान और सेवा की निरंतर प्रेरणा देता रहा है। योग, फिल्म और जैविक खेती से उत्तराखंड की नई पहचान बनी है। जागरण फोरम राष्ट्र में चेतना जगाने का मंच है, जहां से लोकतंत्र को नई दिशा मिलेगी।
युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत हैं उपराष्ट्रपति : धामी
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि तमिलनाडु के एक सामान्य परिवार से निकलकर उपराष्ट्रपति सी.पी. राधाकृष्णन ने असाधारण उपलब्धियां हासिल कीं। उनकी जीवन यात्रा युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत है। जनसंवाद, शिक्षा और जनजातीय कल्याण को उन्होंने सदैव सर्वोच्च प्राथमिकता दी है।
पर्यावरण संरक्षण व जन भावनाओं के संतुलन से प्रगति संभव : तरुण गुप्त
दैनिक जागरण समूह के प्रबंध संपादक तरुण गुप्त ने कहा कि उत्तराखंड आध्यात्म और विकास का केंद्र है। विकास आवश्यक है, लेकिन पर्यावरण संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान और स्थानीय भावनाओं के संतुलन के साथ ही सतत प्रगति संभव है। इस अवसर पर दैनिक जागरण के निदेशक सुनील गुप्ता एवं गणमान्य नागरिक मौजूद रहे।
रचनात्मक कहानियों को प्रसारित करें
उपराष्ट्रपति ने कहा कि मीडिया युवाओं के बीच रचनात्मक और प्रेरणादायक कहानियों को प्रसारित करें, ताकि युवा राष्ट्र निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित हों।
मेरे प्रिय भाई-बहनों को नमस्कार
“मैं भारत माता के पवित्र चरणों को प्रणाम करता हूं। उत्तराखंड के मेरे प्रिय भाई-बहनों को नमस्कार।” हिंदी के इन शब्दों के साथ उपराष्ट्रपति सीपी. राधाकृष्णन ने जागरण फोरम में अपने उद्बोधन की शुरूआत की।
उत्तराखंड से रिश्ता काफी पुराना
उपराष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड से उनका रिश्ता काफी पुराना और गहरा है। उन्होंने याद दिलाया कि राज्य गठन के समय लोकसभा सदस्य के रूप में उन्होंने राज्य निर्माण विधेयक के पक्ष में मतदान किया था।
सीमांत गांव शक्ति, विरासत और दृढ़ता की पहली पंक्ति
उपराष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा में उत्तराखंड का योगदान अतुलनीय है। भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में अधिकारी और जवान उत्तराखंड से हैं।
यह भी पढ़ें- Jagran Forum में आचार्य महामंडलेश्वर स्वामी अवधेशानंद गिरि बोले- जेन-जी का असल धर्म तो भारतीय युवा ही जानता है
यह भी पढ़ें- Jagran Forum में हरित विकास पर केंद्रित सत्र में विशेषज्ञों ने साझा किए अनुभव, भविष्य की तस्वीर को किया रेखांकित
Pages:
[1]