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गया में रंगदारी को लेकर फैलाए गए जाल में खुद फंसे डॉक्टर, SP ने किया खुलासा; 3 गिरफ्तार

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पुलिस की गिरफ्त में तीनों आरोपित। (जागरण)



जागरण संवाददाता, गयाजी। अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में न्योरोलाजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. सतेंद्र कुमार से एक करोड़ रुपये रंगदारी को लेकर कराई गई प्राथमिकी पुलिस जांच में पूरी तरह फर्जी निकली।

रंगदारी को लेकर विभागाध्यक्ष ने जो प्राथमिकी दर्ज कराई थी, उसमें वह खुद फंस गए। पुलिस ने फर्जी प्राथमिकी दर्ज कराने के मामले में चिकित्सक डॉ. सतेंद्र कुमार, उनके पार्टनर नौशाद अहमद और उनके भाई इरशाद अहमद को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने मोबाइल भी बरामद किया है।

सभी लोगों को रंगदारी की षड़यंत्र रचने और पुलिस को गुमराह करने के मामले में गिरफ्तार न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। इस बात का राजफाश शनिवार को नगर पुलिस अधीक्षक कोटा किरण कुमार ने प्रेस वार्ता में की है।
रंगदारी की दर्ज कराई थी एफआईआर

उन्होंने बताया कि अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल के चिकित्सक डॉ. सतेंद्र कुमार द्वारा बीते दिनों मगध मेडिकल थाना में रंगदारी की प्राथमिकी दर्ज कराई गई थी। इसे गंभीरतापूर्वक लेते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक सुशील कुमार के निर्देश पर नगर पुलिस उपाधीक्षक-2 के नेतृत्व में थानाध्यक्ष कृष्णा कुमार, तकनीकी सेल को लेकर विशेष टीम का गठन किया गया।

प्राथमिकी में जिस मोबाइल नंबर का कॉल करने के लिए उपयोग किया गया। इसकी तकनीकी जांच की गई। तकनीकी जांच में चिकित्सक के मोबाइल पर मुम्बई से कॉल आया। इसका डिजिटल साक्ष्य टीम को मिला। उसके आधार पर गठित विशेष टीम ने महाराष्ट्र राज्य के मुम्बई पहुंची।

जहां स्थानीय पुलिस के सहयोग से थाने जिला के मानपाड़ा थाना क्षेत्र के पलावा सिटी में छापामारी की गई। जहां से इरशाद अहमद को गिरफ्तार किया गया। गिरफ्तार इरशाद से गहनता से पूछताछ की गई। जहां से रंगदारी की बात गलत निकली। लेकिन उसने अपने नंबर से चिकित्सक के नंबर से कॉल कर धमकी दी गई।
मुंबई से लाया गया आरोपित

सिटी एसपी ने बताया कि उस व्यक्ति को गिरफ्तार मुम्बई से गया लाया गया। आरोपित को मुम्बई से आने के बाद पूछताछ के लिए चिकित्सक डॉ. सतेंद्र कुमार को मगध मेडिकल थाना बुलाया गया। थाना में पूछताछ के दौरान रंगदारी की पुष्टि नहीं हुई।

लेकिन पूछताछ में बताया गया कि रामपुर थाना क्षेत्र के वरीय पुलिस अधीक्षक आवास के सामने चिकित्सक द्वारा एक निजी अस्पताल पार्टनर से खोले थे। उसी पार्टनरशिप को लेकर नाैशाद अहमद से विवाद हुआ था। उसी विवाद को लेकर नौशाद का भाई इरशाद से बातचीत हुई थी। जिसे चिकित्सक द्वारा रंगदारी की बात की कहानी बनाते हुए गलत प्राथमिकी दर्ज की थी।

सिटी एसपी ने बताया कि चिकित्सक से कोई रंगदारी नहीं मांगी गई थी। यह प्राथमिकी पूरी तरह फर्जी है। इस मामले की गहनता से पुलिस ने जांच की है।

सिटी एसपी ने बताया कि डॉ. सतेंद्र पटना जिले के कंकड़बाग थाना क्षेत्र के आरएमएस कॉलोनी लोहिया नगर का रहने वाला है, जबकि नौशाद अहमद एवं इरशाद अहमद गया जिले के रामपुर थाना क्षेत्र के गेवाल बिगहा मोहल्ला निवासी है। इस तरह रंगदारी मामले की फर्जी प्राथमिकी दर्ज करने का पटाक्षेप किया गया।
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