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उन्नाव में दो बाइकों की आमने-सामने भीषण टक्कर, दो युवकों की मौके पर हो गई मौत

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जागरण संवाददाता, उन्नाव। उन्नाव-हरदोई मार्ग पर काली मिट्टी पेट्रोल पंप व ईंट भट्ठा के पास दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। हेलमेट न लगा होने व सिर में गंभीर चोट से दोनों युवकों की मौत हो गई।

दिवंगत युवकों में एक टाइल्स कारीगर व दूसरा फल बेंचता था। हादसे में टाइल्स कारीगर का भाई व पैदल जा रहा युवक चपेट में आकर घायल हो गया। दोनों का अस्पताल में इलाज चल रहा है। राहगीरों के अनुसार दोनों बाइकों की रफ्तार 80 किमी प्रति घंटा के लगभग थी।

क्षेत्र के कठिघरा गांव निवासी कुलदीप अपने भाई नागेश्वर के साथ घरों में टाइल्स लगाने का काम करता था। शनिवार शाम छह बजे बांगरमऊ से टाइल्स लगाकर दोनों एक बाइक से घर लौट रहे थे। काली मिट्टी चौराहा स्थित पेट्रोल पंप के पास सामने से आ रही दूसरी बाइक से उनकी बाइक टकरा गई।

टक्कर इतनी जोरदार थी कि हादसे में 34 वर्षीय कुलदीप व दूसरी बाइक चला रहे क्षेत्र के राजीवपुरम कालीमिट्टी निवासी 18 वर्षीय विजय कुमार की मौत हो गई। कुलदीप का भाई नागेश्वर व दोनों बाइकों की चपेट में आकर पैदल जा रहा छोटू निवासी खेरवा अलदादपुर थाना अजगैन घायल हो गए।

दोनों को सीएचसी फतेहपुर चौरासी से जिला अस्पताल रेफर किया गया है। विजय महाराष्ट्र के पुणे में फल का कारोबार करता था। 12 दिन पहले घर लौटा था।

शनिवार शाम वह बाजार से सब्जी खरीदकर घर लौट रहा था। अस्पताल पहुंचीं विजय की मां मुन्नी देवी बेटे का शव देख चीख पड़ीं। बहन ज्योति भी भाई की मौत पर चीख पड़ी। एसओ ज्ञानेंद्र सिंह ने बताया कि तहरीर के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
भाई के साथ पुणे चला जाता तो बच जाती विजय की जान

हादसे में जान गंवाने वाला विजय अपने भाई मनोज के साथ महाराष्ट्र के पुणे में फल का कारोबार करता था। 12 दिन पहले विजय व मनोज दोनों घर आए थे। शनिवार दोपहर 12 बजे मनोज पुणे के लिए निकला था। उसने विजय से भी साथ चलने को कहा, पर विजय ने तीन-चार दिन बाद आने की बात कही थी।

इस पर मनोज पुणे के लिए निकल गया था। हादसे की जानकारी जैसे ही उसे मिली, वह बेहाल हो गया। रास्ते से वह घर के लिए लौट पड़ा। विजय चार भाइयों में तीसरे नंबर का था।

पिता नरेश, मां मुन्नी बेहाल है। मुन्नी बार-बार यही कहती रही कि बेटा विजय यदि अपने भाई मनोज के साथ पुणे चला जाता तो उसकी जान बच जाती। विजय अविवाहित था।
दो भाइयों में बड़ा था कुलदीप

कुलदीप दो भाइयों में बड़ा था। पिता राधेलाल लोकनिर्माण विभाग में मेट हैं। कुलदीप का शव देख पिता राधेलाल व पत्नी मीरा के अलावा पांच बेटियों का रो-रोकर बुरा हाल है।

एक बेटे का शव व दूसरे को अस्पताल के बेड पर पड़ा देख स्वजन पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। सभी छोटे बेटे नागेश्वर के सकुशल बचने की ईश्वर से प्रार्थना करते रहे।
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