उत्तर प्रदेश मतांतरण गिरोह पर बड़ी कार्रवाई, सरगना छांगुर का मुख्य सहयोगी नागपुर से गिरफ्तार
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/18/article/image/police-team-1768681448890.webpउत्तर प्रदेश में मतांतरण गिरोह के सरगना छांगुर का प्रमुख सहयोगी नागपुर में गिरफ्तार (सांकेतिक तस्वीर)
पीटीआई, नागपुर। महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश एटीएस के संयुक्त अभियान में मतांतरण गिरोह के सरगना छांगुर के एक प्रमुख सहयोगी को शनिवार सुबह नागपुर में गिरफ्तार किया गया।
छांगुर बाबा उर्फ जलालुद्दीन और उसके सहयोगियों से उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा लखनऊ में भारतीय न्याय संहिता और उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धर्मांतरण निषेध अधिनियम के तहत दर्ज एफआइआर के संबंध में पूछताछ की जा रही है, जबकि ईडी उसकी गतिविधियों से जुड़े मनी लांड्रिंग के पहलू की जांच कर रही है।
एक अधिकारी ने बताया कि छांगुर के नेटवर्क के धन प्रबंधन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इधु इस्लाम को पचपाओली पुलिस थाना क्षेत्र के आशी नगर से गिरफ्तार किया गया। अधिकारी के अनुसार, इस्लाम उत्तर प्रदेश में दर्ज गंभीर मामलों में वांछित है। उसके खिलाफ गिरफ्तारी वारंट था।
उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने से बचने के लिए आशी नगर की एक संकरी गली में अत्यंत सावधानीपूर्वक कार्रवाई की गई। हमारी टीम ने बिना किसी प्रतिरोध के आरोपित को गिरफ्तार कर लिया।
उत्तर प्रदेश पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि वह पिछले कुछ वर्षों से गिरफ्तारी से बचता आ रहा था। उसकी गिरफ्तारी खुफिया सूचनाओं के आधार पर हुई। अधिकारी ने बताया कि कई साल पहले नागपुर में छांगुर के मजबूत संपर्क थे।
इसके बाद उसने उत्तर प्रदेश में आकर मतांतरण और अन्य अवैध गतिविधियों को संचालित करने के लिए एक सुव्यवस्थित नेटवर्क स्थापित किया। पुलिस का आरोप है कि छांगुर ने हिंदू और अन्य गैर-मुस्लिम समुदायों के लोगों को संगठित तरीके से इस्लाम में परिवर्तित किया।
इस गिरोह का निशाना गरीब मजदूर, विधवाएं और कमजोर लोग थे, जिन्हें बहला-फुसलाकर या वित्तीय प्रलोभन देकर इस्लाम अपनाने को विवश किया जाता था। उसे पिछले साल पांच जुलाई को उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले के माधपुर गांव से गिरफ्तार किया गया था।
लखनऊ के गोमतीनगर स्थित एटीएस पुलिस स्टेशन में दर्ज इस मामले में बीएनएस की धारा 121ए (राज्य के खिलाफ युद्ध छेड़ना), 153ए (शत्रुता को बढ़ावा देना), 417 (धोखाधड़ी), 420 (फर्जीवाड़न) और उत्तर प्रदेश गैरकानूनी धार्मिक धर्मांतरण निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत आरोप लगाए गए हैं।
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