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संघर्ष, साइकिल और शिखर... पर्वतारोही समीरा खान की कहानी जो लड़कियों को देती है उड़ान, धनबाद पहुंचकर दिया संदेश

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साइकिल से दुनिया नापने वाली समीरा खान। (फाइल फोटो)



जागरण संवाददाता, धनबाद। Cyclist Sameera Khan: 37 देशों और भारत के दर्जनों राज्यों में सात हजार किलाेमीटर तक साइकिल से सफर करने वाली पर्वतारोही समीरा खान शनिवार को धनबाद पहुंचीं। यहां कई स्कूलों में छात्र-छात्राओं से रूबरू हुईं। इनमें कार्मल स्कूल धनबाद, राजकमल सरस्वती विद्या मंदिर, केंद्रीय विद्यालय-एक विनोद नगर, डीएवी पब्लिक स्कूल कोयला नगर, दिल्ली पब्लिक स्कूल, क्रेडो वर्ल्ड स्कूल और झारखंड बालिका आवासीय विद्यालय का भ्रमण किया।

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समीरा खान ने कार्मल स्कूल की छठी से नौवीं तक की छात्राओं को संबोधित किया। समीरा ने छात्राओं को आत्मविश्वास बनाए रखने, अपनी क्षमताओं पर विश्वास करने और समाज में अपनी पहचान बनाने का प्रेरक संदेश दिया।

पढ़ाई, आत्मनिर्भरता और अपने फैसले खुद लेने के लिए प्रेरित किया। प्राचार्या सिस्टर सिल्वी ने अभिनंदन किया। स्कूल प्रबंधक सिस्टर श्रेया ने उपलब्धियों की सराहना करते हुए पौधा एवं स्मृति चिह्न भेंट किया।

समीरा ने बताया कि आंध्र प्रदेश के एक छोटे से गांव अनंतपुर से निकलकर 37 देशों और भारत के दर्जनों राज्यों तक साइकिल से सफर कर चुकी हैं। कई पर्वत शिखरों पर तिरंगा फहराने का गौरव और गांव-गांव जाकर लड़कियों से संवाद करने का मौका मिला।

समीरा अपनी साइकिल यात्रा के जरिए ग्रामीण बालिकाओं को उनके अधिकारों, आत्मसम्मान और स्वतंत्र सोच के प्रति जागरूक कर रही हैं। उनका मानना है कि असली बदलाव शहरों में नहीं, गांवों से शुरू होता है। आज भी यहां लड़कियां पितृसत्तात्मक सोच, सामाजिक बंदिशों और भेदभाव का सबसे अधिक सामना करती हैं।

समीरा की यात्रा का उद्देश्य संदेश देना नहीं, ग्रामीण वास्तविकता को करीब से समझना भी है। मानवशास्त्र (एंथ्रोपोलाजी) की पढ़ाई कर चुकी समीरा ने दक्षिण-पूर्व एशिया से लेकर अफ्रीका, मध्य एशिया और यूरोप तक की साइकिल यात्राओं ने लड़कियों को यह अहसास कराया कि लड़कियों के संघर्ष लगभग समान हैं कहीं कम, कहीं अधिक।
साइकिल से दुनिया, शिखरों की ओर सफर

समीरा खान साहस, संकल्प और आत्मविश्वास की मिसाल हैं। अब तक वे साइकिल से 37 देशों की यात्रा कर चुकी हैं, जिनमें फ्रांस, जर्मनी, नॉर्वे, तुर्की, श्रीलंका, थाईलैंड और नेपाल जैसे देश शामिल हैं। सिर्फ साइकिलिंग ही नहीं, समीरा ने पर्वतारोहण में भी अपनी पहचान बनाई है।

उन्होंने 11 ऊंचे पर्वतों पर चढ़ाई की कोशिश की, जिनमें से 7 शिखरों पर सफलतापूर्वक पहुंचीं। नेपाल की 6,859 मीटर ऊंची अमा डबलाम चोटी फतह करना उनकी बड़ी उपलब्धि मानी जाती है। उनका अंतिम लक्ष्य दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना है।
संघर्ष से सशक्तिकरण तक

समीरा का सफर आसान नहीं रहा। नौ साल की उम्र में मां और 2015 में पिता को खोने के बावजूद उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। वर्ष 2018 में ‘मिशन माउंट एवरेस्ट’ के संकल्प के साथ उन्होंने साइकिल यात्रा शुरू की।

भारत में साइकिलिंग के दौरान सुरक्षा और सामाजिक चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन वे डटी रहीं। फिलहाल समीरा बालिका सशक्तिकरण अभियान चला रही हैं और महाराष्ट्र, कर्नाटक, गुजरात, मध्य प्रदेश व उत्तर प्रदेश के स्कूलों में छात्राओं को प्रेरित कर रही हैं।

उनका संदेश साफ है-लड़कियों को भी बराबर अवसर मिलने चाहिए, क्योंकि वे कमजोर नहीं, अपनी प्रतिभा से शक्तिशाली बन सकती हैं।
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