गाजियाबाद के ट्रांस हिंडन क्षेत्र में खूंखार कुत्तों का आतंक, न तो शेल्टर होम बना; ना ही पकड़े जा रहे कुत्ते
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/18/article/image/Stray-Dogs-(1)-1768702275458.webpवसुंधरा में खूंखार कुत्ते। जागरण
जागरण संवाददाता, साहिबाबाद। ट्रांस हिंडन क्षेत्र में कई जगह कुत्तों का आतंक है। लोगों का कहना है कि रात में गली या मार्ग पर गुजरते हुए कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं और काटने के लिए पीछे दौड़ते हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों की मांग है कि गलियों से खूंखार कुत्तों को पकड़ा जाए और नगर निगम के शेल्टर होम में रखा जाए। लोगों का आरोप है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी आक्रामक कुत्तों के लिए शेल्टर होम नहीं बनाया गया।
वैशाली, वसुंधरा, इंदिरापुरम, राजेंद्रनगर, सूर्यनगर, अर्थला, मोहननगर समेत अन्य इलाकों में रात में कुत्तों का जमघट सड़क पर लगा रहा है। वसुंधरा निवासी सुनील कुमार ने बताया कि रात के समय कुत्ते आक्रामक होकर लोगों के पीछे लग जाते हैं और काटने की कोशिश करते हैं। बाइक सवार लोग गिरकर घायल भी हुए हैं।
वैशाली सेक्टर-4 निवासी प्रदीप सुथार ने बताया कि बच्चों पर कुत्तों के हमले करने की घटनाएं हो रही हैं। नगर निगम को खूंखार कुत्तों की जानकारी भी दी जाती है लेकिन सुनवाई नहीं होती। सुप्रीम कोर्ट हाल ही में कुत्तों के काटने और मौत के मामलों में राज्य सरकारों को मुआवजा देने के आदेश दिए हैं लेकिन इस बारे में भी शासन से कोई निर्देश नहीं आए हैं।
सोसायटियों में नहीं होता नियमों का पालन
इंदिरापुरम, वसुंधरा समेत अन्य इलाकों में सोसायटियों में कुत्ता पालने वालों के लिए आरडब्ल्यूए और एओए ने नियम भी बनाए हैं। इनमें कुत्ते के मुंह पर मजल लगाना अनिवार्य है लेकिन लोग ऐसा नहीं करते हैं। इंदिरापुरम निवासी प्रिया ने बताया कि कुत्तों के लिए फीडिंग प्वाइंट भी बने हैं लेकिन लोग अपनी मर्जी से कुत्तों को अलग-अलग जगह खाना खिलाते हैं। मजल लगाकर कुत्तों को नहीं टहलाया जाता है।
कौशल की मदद के लिए आए चिकित्सक
कनावनी में कुत्तों के झुंड के हमले में घायल चार साल के कौशल की मदद को गाजियाबाद के चिकित्सक आगे आए हैं। शनिवार को डा. बीपी त्यागी ने कौशल के पिता को काल कर बुलाया और 24 हजार रुपये कीमत का सीरम निशुल्क लगाया। उन्होंने पिता अमरपाल को हर संभव मदद का आश्वासन दिया है।
खूंखार कुत्तों के लिए शेल्टर होम की प्रक्रिया चल रही है। इसके अलावा बधियाकरण की संख्या को भी बढ़ाया जा रहा है।
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- डॉ. अनुज, पशु चिकित्सा अधिकारी, नगर निगम
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