UP में वन विभाग पकड़ेगा बंदर, शासन ने तय की जिम्मेदारी
https://www.jagranimages.com/images/2026/01/18/article/image/Monkey-1768703867018.webpतस्वीर का इस्तेमाल प्रतीकात्मक प्रस्तुतीकरण के लिए किया गया है। जागरण
राज्य ब्यूरो, जागरण, लखनऊ। बंदरों की समस्या से जूझ रहे शहरों के लोगों को राहत मिलने की उम्मीद जाग गई है। लंबे समय से बंदरों की समस्या के निदान की जिम्मेदारी का मामला नगर निगम और वन विभाग के बीच उलझा हुआ था। अब सरकार ने बंदरों को पकड़ने और उनके प्रबंधन की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग को सौंप दी है।
इसके लिए एक माह में कार्ययोजना बनाने के निर्देश दिए गए हैं। बंदर पकड़ने में नगर निगम सहयोग करेंगे। इस संबंध में आदेश भी जारी कर दिया गया है।आठ जनवरी को शासन में इस प्रकरण को लेकर उच्च स्तरीय बैठक की गई थी। प्रमुख सचिव नगर विकास पी. गुरुप्रसाद की मौजूदगी में हुई बैठक में शहरी क्षेत्रों में बंदरों की बढ़ती संख्या, उनके कारण होने वाली दुर्घटनाएं, लोगों की सुरक्षा और मानव-बंदर टकराव की समस्या पर विस्तार से चर्चा की गई।
निर्णय लिया गया कि अब नगर निगम सीमा में बंदरों को पकड़ने की पूरी जिम्मेदारी वन विभाग की होगी। नगर निगम अब सीधे तौर पर बंदर पकड़ने का काम नहीं करेंगे। बंदरों को पकड़ने, उन्हें सुरक्षित स्थान पर ले जाने, पुनर्वास करने और उनके वैज्ञानिक प्रबंधन से जुड़ा पूरा कार्य पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग द्वारा किया जाएगा।
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नगर निगम की भूमिका अब केवल उन इलाकों की पहचान करने तक सीमित रहेगी, जहां बंदरों का ज्यादा आतंक है। साथ ही वन विभाग को जरूरी जानकारी देने और स्थानीय स्तर पर सहयोग करने की जिम्मेदारी निभाएगा। बंदर के वन्य जीव होने और वन विभाग के पास वन्य जीवों के प्रबंधन, पुनर्वास के लिए विशेषज्ञता होने के कारण यह निर्णय लिया गया है।
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