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आमी का पानी प्रदूषित होने से बढ़ी किसानों की परेशानी, खेतों की नहीं कर पा रहे सिंचाई

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प्रदूषण के कारण आमी का पानी काला हो गया है। जागरण



संवाद सूत्र, पिपरौली। आमी नदी का पानी प्रदूषित होने से ग्रामीणों की समस्या बढ़ गई है। गोरखपुर औद्योगिक विकास प्राधिकरण (गीडा) क्षेत्र की कई फैक्टरियों का पानी नदी में पहुंच रहा है। प्रदूषण की वजह से किसान अपने खेतों की सिंचाई नहीं कर पा रहे हैं। नदी के पानी के बीच से होकर खेतों में जा रहे किसानों के पैरों में खुजली और चर्म रोग जैसी समस्याएं बढ़ने लगी हैं।

अडीलापार के सेमरहवा बाबा के पास गीडा की कारखानों से निकलने वाला पानी सरिया नाला के रास्ते आकर आमी नदी में मिलता है। यहां नदी का पानी काला हो गया है। ग्रामीण अब नदी में पशुओं को नहीं जाने दे रहे हैं। पानी पीने के कारण पशु भी बीमार हो रहे हैं। गांव के कई किसानों की खेती नदी के दूसरी तरफ है।

पानी में प्रवेश करके ही किसान अपने खेतों में आते- जाते हैं। पानी में प्रवेश करने से उनको खुजली अन्य चर्म रोगों की परेशानी बढ़ने लगी है। कैली के रहने वाले इंद्रेश ने बताा कि नदी के पानी से होकर गुजरना पड़ता है।

गंदे पानी के कारण पैरों में खुजली होने लगती है। बेलवा डाड़ी के सुजीत कुमार यादव ने बताया कि हम लोग पशुओं को आमी नदी का पानी पीने से रोकते हैं लेकिन अगर कभी गलती से पी लें तो बीमार पड़ जाते हैं। भगवानपुर के शैलेंद्र सिंह ने कहा कि समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस पहल नहीं हो रही है।

पर्यावरणविद प्रोफेसर डा.गोविंद पांडेय ने बताया कि नदियों में गंदा जल (औद्योगिक अपशिष्ट, सीवेज आदि) प्रवाहित होने से जल प्रदूषित हो जाता है। इससे जल में घुलित आक्सीजन की मात्रा तेजी से कम हो जाती है और जैव रासायनिक आक्सीजन की मात्रा बढ़ जाती है।

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इससे जलीय जीव-जंतुओं को आक्सीजन की कमी के कारण सांस लेने में कठिनाई होती है और वे धीरे-धीरे खत्म होने लगते हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पिपरौली के प्रभारी चिकित्साधिकारी शिवानंद मिश्रा ने कहा कि चर्म रोग से बचने के लिए प्रदूषित पानी के सीधे संपर्क में आने से बचें। नारियल के तेल का उपयोग करें और चिकित्सालय पहुंचकर उपचार कराएं।

इस संबंध में सहजनवा के एसडीएम केशरी नंदन तिवारी ने बताया कि मामला संज्ञान में आया है। इसकी जांच कराई जाएगी। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया जाएगा।
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