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आगरा सेंट जार्जेज स्कूल में करोड़ों का घाेटाला: पूर्व प्रिंसिपल पिता व पुत्र का खेल, फीस में किया घालमेल

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सेंट जार्जेज स्कूल



यशपाल चौहान, आगरा। पुत्र मोह और पद का घमंड किसी को भी अराजक बना सकता है। सेंट जार्जेज स्कूल यूनिट वन के पूर्व प्राचार्य ने पद पर रहते हुए ऐसा ही कुछ किया। पुत्र के कंप्यूटर संस्थान और नए स्कूल खोले जाने के लिए सारे नियमों को दरकिनार कर बच्चों की फीस से इकट्ठा किए गए करोड़ों रुपये ट्रांसफर कर दिए गए।

नए स्कूल के मैनेजमेंट में परिवार के सदस्यों को शामिल किया। सेवानिवृत्त होने के बाद सेंट जार्जेज स्कूल यूनिट वन का प्राचार्य बेटे को बना दिया। एडीजे कानून व्यवस्था अमिताभ यश को की गई शिकायत के बाद मामले की गोपनीय जांच शुरू हो गई है।
सेंट जार्जेज स्कूल के खाते से चार वर्ष में नियमों को दरकिनार कर किया लेनदेन

शहर में सेंट जार्जेज स्कूल की दो शाखाएं हैं। पहली बालूगंज और दूसरी बाग मुजफ्फरखां में है। दोनों संस्था डायसिस आफ आगरा से संचालित होती हैं। डायसिस आफ आगरा चर्च आफ नार्थ इंडिया के अधीन कार्य करती है। इसके तहत यूपी और उत्तराखंड में 62 मिशनरी स्कूल संचालित होते हैं।
जे. एस जरमाया वर्ष 1992 में सेंट जार्जेज स्कूल यूनिट वन के प्रिंसिपल बने

जे. एस जरमाया वर्ष 1992 में सेंट जार्जेज स्कूल यूनिट वन के प्रिंसिपल बने। स्कूल में कंप्यूटर शिक्षा देने के लिए वर्ष 2006 में आउटसोर्स संस्था की मदद ली गई। इसके लिए राजशेखर कंप्यूट्रोनिक्स का पंजीकरण कराया गया। इसके मालिक जेएस जरमाया के ही बेटे अक्षय जरमाया थे। स्कूल के पते तीन गार्डन रोड बालूगंज पर ही इसका पंजीकरण कराया गया। वर्ष 2006 से 2019 तक सेंट जार्जेज कालेज यूनिट वन के खाते से इस फर्म को करोड़ों रुपये ट्रांसफर किए गए।
पुत्र के लिए कंप्यूटर संस्थान और नए स्कूल बनाने को ट्रांसफर किया स्कूल से फंड

वर्ष 2004 में एक नया स्कूल बनाने के लिए अकबरपुर में भूमि खरीदी गई। इसके लिए भी सेंट जार्जेज की प्रथम और द्वितीय यूनिट से धन दिया गया। वर्ष 2007 से 2011 तक इसका निर्माण चला। इसके बाद एक जून 2011 को इंडियन हेरिटेज स्कूल सोसायटी पंजीकृत कराई गई। इसमें अध्यक्ष जेएस जरमाया और सचिव उनके बेटे अक्षय राज शेखर जरमाया व उपाध्यक्ष पत्नी किरन जरमाया बनीं। अन्य सदस्य भी उनके रिश्तेदार ही हैं। इस स्कूल के लिए राज शेखर कंप्यूट्रोनिक्स के माध्यम से धन दिया गया।
इंडियन हेरिटेज स्कूल के खाते में ट्रांसफर हुई

राज शेखर कंप्यूट्रोनिक्स सेंट जार्जेज को कंप्यूटर सेवा देती थी और उसे स्कूल की फीस की फीस से धन दिया जाता था। कंप्यूट्रोनिक्स से धनराशि इंडियन हेरिटेज स्कूल के खाते में ट्रांसफर हुई। धनराशि ट्रांसफर का सीक्वेंस भी गोलमाल की ओर इशारा कर रहा है।

मामले की शिकायत आरटीआई एक्टिविस्ट अशोक कुशवाह ने एडीजी कानून व्यवस्था अमिताभ यश से की। इसके बाद एसीपी हरीपर्वत अक्षय महाडिक ने गोपनीय जांच की। सूत्रों का कहना है कि उनकी जांच में स्कूल की फीस के दुरुपयोग और गवन के तथ्य सामने आए हैं। अगर इसकी विस्तृत जांच हुई तो बड़े-बड़े चेहरे बेनकाब होंगे।
स्कूल के खातों से करोड़ों रुपये देने के दो वर्ष बाद कराई भूमि की रजिस्ट्री

सेंट जार्जेस स्कूल की फीस की रकम को नई यूनिटों के विस्तार में लगाने में भी नियमों को ताक पर रखा गया।करोड़ों रुपये देने के दो वर्ष बाद भूमि की रजिस्ट्री कराई गई। इसमें जो पैन कार्ड लगाया गया वह भी उस संस्था का था जो पूर्व में बंद हो चुकी है ।यह भी गड़बड़ी की ओर इशारा कर रहा है।
विस्तृत जांच होने पर बेनकाब हो सकते हैं बड़े चेहरे

जेएस जरमाया ने अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों की सहमति से सेंट जार्जेज स्कूल यूनिट दो के फंड ट्रांसफर करने के लिए सिंडिकेट बैंक में न्यू प्रोजेक्ट सेंट जार्जेज कालेज नाम से खाता खुलवा लिया।इसके बाद सेंट जार्जेज कालेज यूनिट एक और सेंट जार्जेज स्कूल यूनिट दो से रकम इसमें ट्रांसफर की गई। इसके बाद राहुल जैन के खाते में 23 अक्टूबर 2018 से वर्ष 2022 के बीच 38 करोड़ से अधिक रुपये ट्रांसफर किए गए।इसमें सेंट जार्जेज कालेज के खाते से भी सीधे राहुल जैन के खाते में 3.33 करोड़ रुपये ट्रांसफर किए गए।
भूमि की खरीद में लगाया गया बंद हुई संस्था का पैन कार्ड

करोड़ों की धनराशि ट्रांसफर करने के दो वर्ष बाद 13 जून 2022 को मघटई में खसरा नंबर 412, 415 और 416 स्थित संपत्तियां 23.33 और 15.85 करोड़ रुपये में खरीदी गईं।इस भूमि की खरीद में जो पैन कार्ड लगाया गया वह सेंट जार्जेज डायोसेसन स्कूल सोसायटी के नाम से जारी था।जबकि यह संस्था 10 अक्टूबर 1988 को बंद हो चुकी थी।

स्कूल की फीस को भूमि खरीद में लगाना सुप्रीम कोर्ट के 27 अप्रैल 2004 के आदेश मार्डन स्कूल बनाम यूनियन इंडिया का उल्लंघन है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि किसी भी विद्यालय की फीस से प्राप्त राशि न तो किसी ट्रस्ट और सोसायटी में ट्रांसफर की जा सकती है और न ही किसी अन्य उपयोग में लाई जा सकती है।
नहीं दिया पक्ष

शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों पर पक्ष जानने के लिए जागरण संवाददाता ने 23 दिसंबर को सेंट जार्जेज कालेज यूनिट प्रथम में जाकर प्रधानाचार्य अक्षय जरमाया से मुलाकात की।उन्होंने क्रिसमस के बाद पक्ष देने के लिए कहा। क्रिसमस के बाद उनसे फोन पर संपर्क किया गया तो उन्होंने कहा कि हम अपना पक्ष उपलब्ध करा रहे हैं। इसके बाद तीसरी बार फिर फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया, लेकिन उन्होंने काल रिसीव नहीं की।वाट्सएप पर संदेश दिया, लेकिन उसके बाद भी कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली।


वित्तीय अनियमितताओं की जांच पूर्व में हुई थी। यह मामला मेरे संज्ञान में है। इसके परीक्षण के लिए फाइल निकलवाई जा रही है।
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विपुल सिंह, उप निबंधक, फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स।


मामले की गोपनीय जांच कराई गई थी। शिकायतकर्ता ने जो आरोप लगाए हैं, उन पर आरोपित वित्तीय अनियमितता और अवैध संपत्ति हस्तांतरण के मामले में पूर्व में हाई कोर्ट से स्टे प्राप्त कर चुके हैं। पूर्व में जांच डिप्टी रजिस्ट्रार चिट फंड सोसायटी के कार्यालय से जांच की थी। उनसे पत्राचार किया जा रहा है।
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दीपक कुमार, पुलिस आयुक्त।
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