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गोरखपुर एम्स में अब भर्ती होने को मिलेंगे छह घंटे, अब बेड फंसाकर नहीं रख पाएंगे डॉक्टर-कर्मी

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गोरखपुर एम्स। जागरण



जागरण संवाददाता, गोरखपुर। डॉक्टर व कर्मचारी मिलकर एम्स की आइपीडी में बेड फंसाकर नहीं रख पाएंगे। अब जिन रोगियों को भर्ती होना है, उन्हें भर्ती का पर्चा बनने के छह घंटे के भीतर संबंधित विभाग की आइपीडी में हर हाल में पहुंच जाना होगा। ऐसा न होने पर बेड का आवंटन निरस्त करते हुए दूसरे रोगी को आवंटित कर दिया जाएगा।

दैनिक जागरण ने शनिवार के अंक में \“रोगी बिहार में, डाॅक्टर ने कर लिया भर्ती\“ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसका संज्ञान लेकर कार्यकारी निदेशक डा. विभा दत्ता ने नई व्यवस्था बनाई है।

एम्स में बनाई गई नई व्यवस्था के अनुसार ओपीडी या इमरजेंसी में डाक्टर संबंधित विभाग की आइपीडी में भर्ती करने के लिए लिखेंगे। यह पर्चा लेकर ओपीडी के काउंटर नंबर 19 पर जाना होगा। यहां संबंधित विभाग में बेड खाली रहने की स्थिति में भर्ती पर्चा बनेगा। भर्ती का शुल्क जमा करने के बाद रोगी को आइपीडी में भेजा जाएगा। भर्ती पर्चा बनने के बाद छह घंटे में राेगी आइपीडी में नहीं पहुंचेगा तो बेड का आवंटन निरस्त कर दिया जाएगा।

जो रोगी छह घंटे के अंदर आइपीडी में पहुंचेंगे उनकी सूचना बेड हेड टिकट पर दर्ज की जाएगी। ताकि जांच में पता चले कि भर्ती पर्चा बनने के कितनी देर बाद रोगी आइपीडी में आया। यदि रोगी नहीं आया तो छह घंटे बाद इसकी सूचना डैशबोर्ड पर अंकित कर दी जाएगी। इससे बेड फिर खाली दिखने लगेगा और नए रोगी को भर्ती होने का मौका मिलेगा।

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दैनिक जागरण ने किया है खेल का पर्दाफाश
एम्स में बिना रोगी आए ही आइपीडी में भर्ती करने के खेल का दैनिक जागरण ने पर्दाफाश किया है। बिहार के सिवान जिला अंतर्गत पक्वालिया की 50 वर्षीय उमा देवी का उपचार एम्स के सर्जरी विभाग में हो रहा है। डाक्टर ने जांच की सलाह दी और पांच जनवरी को रिपोर्ट के साथ आने को कहा।

पांच जनवरी को बेटा धर्मेंद्र यादव जांच रिपोर्ट लेकर एम्स पहुंचा। उसके साथ उमा देवी नहीं आईं। डाक्टर ने जांच रिपोर्ट के आधार पर भर्ती के लिए लिख दिया। बेटा ओपीडी के काउंटर नंबर 19 पर पहुंच और रुपये जमा कर भर्ती की प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद वह भर्ती पर्चा लेकर सर्जरी विभाग की आइपीडी में पहुंचा।

यहां नर्सिंग आफिसर ने बेड नंबर तीन आवंटित कर दिया। थोड़ी देर बाद नर्सिंग आफिसर ने ब्लड प्रेशर की जांच की प्रक्रिया शुरू की। वह बेड पर पहुंचीं तो पता चला कि रोगी तो अभी घर पर है। इसके बाद वार्ड में अफरातफरी मच गई।
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