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पानीपत में 311 पहुंचा AQI, ग्रैप-3 लागू; सांस रोगियों के लिए खतरनाक स्थिति

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धुंध और प्रदूषण से खतरा, प्रशासन ने लागू की ग्रैप-3 पाबंदियां (फोटो: जागरण)



जागरण संवाददाता, पानीपत। एनसीआर में एक बार फिर हवा में प्रदूषण का जहर घुल गया है। बीते कुछ हफ्ते साफ हवा के बाद एक बार फिर धुंध के बीच प्रदूषण का लेवल बढ़ गया है। पाल्यूशन को कंट्रोल करने के लिए वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने ग्रैप-3 की पाबंदियां लागू कर दी हैं। पाबंदियों में प्रदूषण फैलाने वाले उद्योग और ईंट भट्टों को बंद किया जाता है।

सड़कों की मैकेनिकल स्वीपिंग और पानी का छिड़काव बढ़ाया जाता है, कोयला, लकड़ी, डीज़ल जनरेटर जैसे प्रदूषणकारी ईंधन के इस्तेमाल पर सख्ती रहती है वहीं सरकारी और निजी दफ्तरों को वर्क फ्राम होम अपनाने की सलाह दी जा सकती है। शनिवार को पानीपत का वायु प्रदूषण लगातार खतरनाक स्तर पर जा पहुंचा। औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स 311 दर्ज किया गया, जबकि प्रति घंटे के हिसाब से इसने 400 का आंकड़ा भी पार किया।

निर्माण कार्यों पर सख्ती, खुले में कूड़ा व पत्तियां जलाने पर पूर्ण प्रतिबंध, डीज़ल जनरेटर के उपयोग पर रोक, सड़कों की नियमित सफाई और पानी का छिड़काव जैसी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जानी होती हैं। इसके अलावा प्रदूषण फैलाने वाले उद्योगों पर निगरानी बढ़ाने और नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने का प्रविधान है।

हालांकि, हकीकत यह है कि इन पाबंदियों का असर जमीनी स्तर पर कम ही दिखाई दे रहा है। खुले में कचरा जलाने, धूल उड़ाते निर्माण कार्य और ट्रैफिक से निकलता धुआं प्रदूषण को और बढ़ा रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ग्रैप-3 को कड़ाई से लागू नहीं किया गया, तो आने वाले दिनों में हालात और बिगड़ सकते हैं।

ग्रैप-3 लागू होने के बाद प्रशासन की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। नगर निगम, प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से निगरानी करनी होती है। सड़कों पर मैकेनिकल स्वीपिंग, जल छिड़काव, निर्माण स्थलों पर कवरिंग, कूड़ा जलाने पर तत्काल कार्रवाई और जन जागरूकता अभियान चलाना अनिवार्य है। साथ ही स्वास्थ्य विभाग को भी सतर्क रहकर बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों के लिए एडवाइजरी जारी करनी होती है।

मौसम ने भी लोगों की मुश्किलें कम नहीं की हैं। पानीपत में शनिवार को अधिकतम तापमान 14.2 डिग्री सेल्सियस व न्यूनतम तापमान 5.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया। ठंडी हवाओं और घने कोहरे के कारण सुबह और रात के समय दृश्यता बेहद कम हो रही है, जिससे सड़क हादसों का खतरा भी बढ़ गया है। ठंड के चलते लोग घरों में कैद होने को मजबूर हैं, वहीं खुले में काम करने वाले मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।

मौसम विभाग के अनुसार, आने वाले 24 घंटों में घनी धुंध छाने और तापमान में और गिरावट की संभावना बनी हुई है। इसका सीधा असर वायु गुणवत्ता पर भी पड़ सकता है, क्योंकि ठंडी हवा और कोहरा प्रदूषक तत्वों को वातावरण में लंबे समय तक रोक लेते हैं।

नागरिक अस्पताल में इमरजेंसी की इंचार्ज डा. सुखदीप कौर ने बताया कि इस तरह का मौसम और प्रदूषण का स्तर अस्थमा, सांस की बीमारी, एलर्जी और हृदय रोगियों के लिए बेहद खतरनाक है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। मास्क का उपयोग, सुबह-शाम बाहर निकलने से बचाव और गर्म कपड़ों का प्रयोग जरूरी बताया जा रहा है।
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