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औरंगाबाद के सरकारी अस्पतालों में दिखा आवारा कुत्ता तो खैर नहीं, पदाधिकारी होंगे जिम्मेदार

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अस्पताल में कुत्ते दिखने पर होगी कार्रवाई। (जागरण)



जागरण संवाददाता, औरंगाबाद। सरकारी अस्पतालों और स्वास्थ्य संस्थानों में आवारा कुत्तों की बढ़ती समस्या को गंभीरता से लेते हुए स्वास्थ्य विभाग ने सख्त रुख अपनाया है।

विभाग के अपर सचिव ने पत्र जारी कर स्पष्ट निर्देश दिया है कि यदि किसी अस्पताल परिसर में आवारा कुत्ता दिखाई देता है तो संबंधित पदाधिकारी इसकी जिम्मेदारी से बच नहीं सकेंगे।

निर्देश में कहा गया है कि मरीजों, उनके स्वजनों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

सदर अस्पताल औरंगाबाद के उपाधीक्षक को नोडल पदाधिकारी बनाया गया है। उनकी जिम्मेदारी होगी कि अस्पताल परिसर में दिन-रात निगरानी रखी जाए और आवारा कुत्तों का जमावड़ा किसी भी स्थिति में न होने पाए। इसके साथ ही सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, अनुमंडलीय अस्पताल और अन्य स्वास्थ्य संस्थानों के प्रधान लिपिक से ऊपर के पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी नियुक्त किया है।

प्रभारी पदाधिकारियों को इसी तरह की सतर्कता बरतने का निर्देश दिया गया है। जानकारी के अनुसार वर्तमान में अधिकांश स्वास्थ्य संस्थानों में आवारा कुत्तों का जमावड़ा आम बात हो गई है। रात के समय तो स्थिति और भयावह हो जाती है।

कई बार कुत्तों के झुंड अस्पताल के बरामदे, इमरजेंसी वार्ड, आईसीयू के बाहर और दवा वितरण काउंटर के आसपास बैठे रहते हैं। इससे मरीजों के साथ आए स्वजन भयभीत रहते हैं, वहीं स्वास्थ्यकर्मियों को भी ड्यूटी के दौरान परेशानी का सामना करना पड़ता है।

बीते दिनों कुत्तों के काटने की घटनाएं सामने आने के बाद यह मुद्दा और गंभीर हो गया है। उम्मीद की जा रही है कि इस सख्त निर्देश के बाद अस्पताल परिसरों में आवारा कुत्तों की समस्या पर प्रभावी नियंत्रण लगेगा और मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिले।

पत्र में अपर सचिव ने लिखा है कि सभी स्वास्थ्य संस्थानों में एक नोडल पदाधिकारी को नामित किए जाने का निर्देश दिया गया है जो परिसर के रख-रखाव एवं सफाई के लिए जिम्मेदार होंगे। यह सुनिश्चित करेंगे कि कुत्ता परिसर में प्रवेश न करें या रहें। आदेश के अनुपालन में संबंधित स्वास्थ्य संस्थान के कार्यालय प्रधान के पश्चात वरीय पदाधिकारी को नोडल पदाधिकारी नामित किया जाता है।

सदर अस्पताल की स्थिति में उक्त अस्पताल के उपाधीक्षक को नोडल पदाधिकारी नामांकित किया जाता है। निर्देश दिया है कि नोडल पदाधिकारी का विवरण प्रवेश द्वारा पर प्रमुखता से प्रदर्शित किया जाए एवं संबंधित नगर परिषद एवं प्राधिकार को इस संदंर्भ में सूचना दी जाए।

सदर अस्पताल के प्रबंधक ने बताया कि अपर सचिव के आदेश के बाद दूसरा छोटा गेट को बंद करने की कार्रवाई की जा रही है। इसी रास्ते कुत्ता आ जाते हैं। प्रमुख द्वार पर गार्ड की तैनाती रहती है। उनको निर्देश दिया गया है कि किसी हाल में आवारा कुत्ता अस्पताल परिसर में प्रवेश न कर सकें।

इसके अलावा अस्पताल परिसर में तैनात सुरक्षा कर्मियों को इस संदर्भ में आदेश दिया गया है। शहर में आवारा कुत्तों का आतंक अधिक है। रात के समय के कुत्ते आक्रामक हो जाते हैं। 15 से 20 की झुंड में चलते हैं। कुत्तों से शहरवासी परेशान हैं।
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