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मोटापा और मधुमेह के खिलाफ जंग में नई उम्मीद, AIIMS के डॉक्टरों का दावा - बैरिएट्रिक सर्जरी है प्रभावी विकल्प

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एम्स के सर्जरी विभाग के चिकित्सकों का दावा। फाइल फोटो



जागरण संवाददाता, नई दिल्ली। मोटापा और टाइप-टू मधुमेह आज देश की बड़ी स्वास्थ्य चुनौतियों में शामिल हैं। लंबे समय तक दवाइयों, व्यायाम और खान-पान में बदलाव के बावजूद जब इन बीमारियों पर काबू नहीं पाया जा पाता, तब बैरिएट्रिक और मेटाबालिक सर्जरी एक प्रभावी उपचार विकल्प के रूप में सामने आ रही है।

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स), नई दिल्ली के सर्जरी विभाग के चिकित्सकों ने दावा किया कि यह सर्जरी वर्षों पुराने मोटापे और मधुमेह से जूझ रहे मरीजों के लिए नई उम्मीद बन रही है।
पेशेंट सपोर्ट ग्रुप मीटिंग का आयोजन

एम्स के सर्जरी विभाग, यूनिट-टू में बैरिएट्रिक और मेटाबालिक सर्जरी से जुड़े मरीजों के लिए रविवार को एक पेशेंट सपोर्ट ग्रुप मीटिंग का आयोजन किया गया। इस अकादमिक और मरीज-केंद्रित कार्यक्रम में लाभांवित मरीज के तौर पर डा. फग्गन सिंह कुलस्ते भी उपस्थित थे।

कार्यक्रम का उद्देश्य सर्जरी से जुड़े अनुभव साझा करना और मरीजों की शंकाओं का समाधान करना था। एम्स के वरिष्ठ सर्जन एडीशनल प्रो. डा. मंजूनाथ ने बताया कि जब मोटापा और टाइप-टू मधुमेह लंबे समय से नियंत्रित न हो और दवाइयों का असर न होने लगे, तब मेटाबालिक सर्जरी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

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दावा किया कि कई मरीजों में 15 से 20 साल पुराने मधुमेह और मोटापे का इलाज लगभग दो घंटे की सर्जरी के बाद सफलतापूर्वक किया गया है। इस सर्जरी के बाद शरीर के मेटाबालिज्म में सकारात्मक बदलाव आते हैं, जिससे ब्लड शुगर नियंत्रण में मदद मिलती है और यह नार्मल आ जाती है।

डा. मंजूनाथ ने बताया कि यह सर्जरी केवल वजन घटाने तक सीमित नहीं है, बल्कि हार्मोनल औ चयापचय स्तर पर असर डालती है। इसी कारण इसे मेटाबालिक सर्जरी कहा जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह उपचार तब अपनाया जाता है, जब दवा, व्यायाम और खानपान में बदलाव से अपेक्षित लाभ नहीं मिलता।

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बैरिएट्रिक सर्जरी कोई सौंदर्य उपचार नहीं

कार्यक्रम में उपस्थित एम्स के डा. राजेंद्र कुमार ने सर्जरी से पहले और बाद की सावधानियों, पोषण प्रबंधन और नियमित फालोअप की आवश्यकता पर जोर दिया। कहाकि सही मरीज का चयन और विशेषज्ञ टीम का उपचार ही सर्जरी की सफलता की है। चेताया कि बैरिएट्रिक और मेटाबालिक सर्जरी कोई सौंदर्य उपचार नहीं, बल्कि गंभीर चिकित्सीय प्रक्रिया है, जिसे विशेषज्ञ सलाह और पूरी जांच के बाद ही अपनाया जाना चाहिए।

इस अवसर पर सर्जरी से लाभ प्राप्त कर चुके सांसद फग्गन सिंह कुलस्ते ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने स्वयं एम्स में मेटाबालिक सर्जरी करवाई है और इसके बाद उनके स्वास्थ्य में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। उन्होंने एम्स के चिकित्सकों के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह उपचार कई मरीजों के जीवन को नई दिशा दे सकता है।

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इस समाचार में उपयोग किए गए क्रिएटिव ग्राफिक्स को NoteBookLM आर्टिफिशिएल इंटेलिजेंस प्रोग्राम की सहायता से बनाया गया है।      



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